बिच्छुओं का डंक, धराशायी स्वास्थ्य महकमा

Siddhartha nagar Updated Sat, 14 Jul 2012 12:00 PM IST
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सिद्धार्थनगर। मौसम परिवर्तन के साथ ही गांवों में सांप और बिच्छुओं का आतंक बढ़ गया है। बीते डेढ़ माह में आधा दर्जन लोगों की जान इनकी वजह से जा चुकी है। इतनी मौतों के बाद भी अस्पताल प्रशासन दवाएं न होने का रोना रो रहा है। जब जिला अस्पताल का यह हाल हैं तो सीएचसी और पीएचसी के हालात आसानी से समझा जा सकता है। वहीं बिच्छू या सांप काटने के बाद अंधविश्वास में पड़कर इलाज में देरी करना भी पीड़ितों पर भारी पड़ रहा है।
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बीते डेढ़ माह में बिच्छू से काटने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। तीस जून को दो जगहों पर बिच्छू के काटने से दो लोगों की मौत हुई। पहले झाड़फूंक कराया गया। फिर अस्पताल तक पहुंचने पर पीड़ितों का उचित इलाज नहीं हो पाया। दोनों काल के गाल में समा गए। गांवों के हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग बच्चों को अकेले खेलने से भेजने में भी कतराने लगे हैं। बता दें कि जिले के कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां अब भी यातायात सुविधाओं का पूरी तरह अभाव है। अपनी बाइक न हो तो कसबे तक आना मुश्किल है। इसके अलावा साक्षरता दर कम है। सो, पिछड़ा जनपद होने के कारण अंधविश्वास की जड़ें भी गहरी हैं। जब इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं तो लोग पहले दवा कराने के बजाए झाड़फूंक पर विश्वास कर रहे हैं। नतीजतन इलाज में देर हो जाती है और पीड़ित की जान बचाना मुश्किल हो जाता है।
अब तक कई हो चुके शिकार
29 जून को बिच्छू के काटने से मौत के दो मामले सामने आए। बांसी के करमा गांव निवासी रफीक अहमद के पुत्र मोहम्मद ईशा (10) को बिच्छू ने काट लिया। उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रूधौली पहुंचाया गया। डाक्टर ने उसे बस्ती रेफर किया था, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसी दिन डुमरियागंज तहसील के भनवापुर ब्लाक अंतर्गत नावडीह निवासी लक्ष्मण के पुत्र गनेश (10) को बिच्छू ने काटा था। उसे बिस्कोहर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन कोई सुधार न होने पर बेवा ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। 10 जुलाई को इटवा थाना अंतर्गत ग्राम कटेश्वर नाथ में व्यास गिरी के डेढ़ वर्षीय बेटे को बरामदे में खेलते समय बिच्छू ने काट लिया। जब वह रोने लगा तो परिजन दौड़े। पता चला कि बिच्छू ने काट लिया है। उसे सीएचसी इटवा ले जाया गया, जहां उसे उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

झाड़फूंक पर करते हैं विश्वास
सिद्धार्थनगर। अब भी लोग अंधविश्वास में पड़कर जान गंवा रहे हैं। बिच्छू काटने के बाद लोग इलाज से पहले झाड़फूंक पर विश्वास करते हैं। इटवा क्षेत्र में एक माह पूर्व एक बच्चे को बिच्छू ने काटा था और उसकी मौत हो गई, लेकिन परिवार वालों को विश्वास था कि वह झाड़फूंक के बाद बच जाएगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं। कुल मिलाकर अंधविश्वास की जंजीरों में जकड़े इस पिछड़े क्षेत्र के लिए चिकित्सा इंतजाम की कमी भी भारी पड़ रही है। शोहरतगढ़ के एक गांव में एक चिकित्सक ने बोर्ड टांगा है। इस चिकित्सक का दावा है कि बिच्छू काटने के बाद यदि तत्काल उसे ले आया जाए तो बीस मिनट के भीतर उसकी जान बचा ली जाएगी।

बिच्छू काटने के बाद पड़ जाता है शरीर काला
सिद्धार्थनगर। अब तक जो मामले सामने आए हैं, उससे यह पता लगता है कि जहां भी बिच्छू काटने की घटनाएं हुई, वहां वह जहरीला ही रहा। इस दौरान जहां पीड़ित का शरीर काला पड़ जाता है और उसकी मौत हो जाती है।

नहीं है बिच्छू काटने की दवा
सिद्धार्थनगर। जिला अस्पताल में दवा का अभाव है। जो इलाज चलता है, वह संभावनाओं पर ही होता है। बिच्छू काटने के बाद यदि तत्काल इलाज मिल जाए तो जान बचाई जा सकती है। जिस तरह सांप काटने के बाद इलाज किया जाता है, उसी प्रकार इसकी भी दवा और इंजेक्शन चिकित्सक करते हैं। मरीजों की स्थिति देखकर दवाएं देने की बात सामने आई है। जिला अस्पताल के सीएमएस डा. रामचंद्र कहते हैं कि बिच्छू काटने के बाद बचाने के लिए कोई दवा नहीं है। जिस तरह सांप काटने के बाद इलाज होता है, वही प्रक्रिया अपनाई जाती है। हमारे पास अब तक इस प्रकार का कोई मामला सामने नहीं आया है। यहां अगर ऐसे मामले आते हैं तो उसका प्राथमिकता के आधार पर इलाज कराया जाएगा।
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