तस्करी रुके तो पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है खाद

Siddhartha nagar Updated Sat, 14 Jul 2012 12:00 PM IST
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सिद्धार्थनगर। जिले में अगर खाद की तस्करी पर लगाम लग जाए तो किसानों को खाद की किल्लत से नहीं जूझना पड़ेगा। किसानों की आवश्यकता और विभाग की मांग को देखते हुए शासन ने पर्याप्त मात्रा में उर्वरक जिले को उपलब्ध करा दिया है। 970 मिट्रिक टन यूरिया जनपद को तीन दिन पहले प्राप्त हुआ है। इसके अलावा पहले से विभाग को पर्याप्त मात्रा में डीएपी और एनपीके भी मिल चुका है, फिर भी किसान खाद के लिए परेशान हैं।
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जनपद में खरीफ के सीजन कि लिए कृषि महकमे ने जो डिमांड रखी थी, उसके सापेक्ष आधी खाद जिले को उपलब्ध हो चुकी है। फिर भी किसान खाद के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं। साधन सहकारी समितियों पर लटके ताले अब भी किसानों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। इस कारण खाद की तस्करी है। जनपद को खाद आवंटित होते ही तस्करों की गतिविधियां तेज हो जाती हैं। भारतीय किसानों के हक की खाद से नेपाल के कृषि क्षेत्र लहलहा उठते हैं। वहीं भारतीय किसानों को अधिक पैसा खर्च करके प्राइवेट दुकानों से खाद खरीदनी पड़ती है। कृषि महकमे ने खरीफ सीजन के लिए 35000 मिट्रिक टन यूरिया, 6000 मिट्रिक टन डीएपी तथा 4000 मिट्रिक टन एनपीके की डिमांड शासन को भेजी थी, जिसमें से अब तक 18620 एमटी यूरिया 3463 एमटी डीएपी तथा 3850 जिले को प्राप्त हो चुका चुकी है। इसमें 970 मिट्रिक टन यूरिया महज तीन दिन पूर्व ही जनपद को प्राप्त हुआ है। प्रचुर मात्रा में खाद की उपलब्धता के बावजूद किसान परेशान हैं। विभाग का दावा है कि प्राप्त खाद को सहकारी समितियों को वितरण के लिए उपलब्ध करा दिया गया है, लेकिन अब तक समितियों के ताले तक नहीं खुले हैं। ऐसे में प्राप्त हुई खाद कहां जा रही है, इसका अनुमान लगाया जा सकता है। कपिलवस्तु क्षेत्र के एक दर्जन गांव खाद तस्करी के अड्डे बने हुए हैं। दिन-रात यहां से खाद की तस्करी जूट के बोरों में हो रही है। सुरक्षा एजेंसियों की उदासीनता और प्रशासन की शह पर चल रहे इस तस्करी के खेल ने ही भारतीय किसानों को खाद के लिए मोहताज बना रखा है। इसी प्रकार खुनुवां बार्डर, ककरहवा, गढ़मोर, बर्डपुर, मोहाने, ठोठरी आदि रास्तों से भी खाद की तस्करी हो रही है। किसानों का यहां तक आरोप है कि समितियों के माध्यम से खाद प्राइवेट दुकानों को बेंच दी जाती हैं, जिससे उन्हें महंगे रेट में खाद खरीदनी पड़ती है। बर्डपुर क्षेत्र के काश्तकार राजेश पांडेय का कहना है कि धान की रोपाई का कार्य किसान शुरू कर चुके हैं। खाद समितियों पर नहीं है। किसानों को प्राइवेट दुकानों से खाद खरीदनी पड़ रही है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। जिले मेें पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्धता के बावजूद किसान खाद के लिए परेशान है, क्योंकि खाद तस्करी पर कोई अंकुश नहीं है। इस संदर्भ में अपर कृषि निदेशक गंगाराम का कहना है कि शीघ्र ही खाद तस्करी रोकने के लिए विभाग अभियान चलाएगा। समितियों की भी पड़ताल होगी, जिससे कोई गड़बड़ी न होने पाए।
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