लेट से बारिश, प्रभावित होगा धान का उत्पाद!

Siddhartha nagar Updated Sun, 08 Jul 2012 12:00 PM IST
सिद्धार्थनगर। जिले में मूसलाधार बारिश के बाद किसानों के चेहरे खिल गए हैं। जिन किसानों की धान की नर्सरी तैयार हो गई है, वे उसकी रोपाई में जुट गए हैं। इस वर्ष जिले में 28 से 30 कुंतल प्रति एकड़ उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। 1,53,000 हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती होनी है। हालांकि कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय से बरसात न होने के कारण धान का उत्पादन प्रभावित होगा।
जिले में लंबे समय से मानसून के आने का रास्ता देख रहे किसानों की आस अंतत: श्रावण माह शुरू होते ही पूरी हो गई और मानसून ने अपना दस्तक दिया। विगत तीन दिनों से हो रही बरसात के बाद किसानों के खेत पानी से लबालब भर चुके हैं। बरसात के अभाव में बेजान हो चुकी धान की नर्सरी में फिर से जान आ चुकी है। जिन कृषकों की नर्सरी तैयार हो गई है, वे रोपाई कार्य भी शुरू करवा चुके हैं। मानसून ने दस्तक भले ही दे दिया हो, लेकिन कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खेती पिछड़ गई है। समय से बरसात होने से किसान धान की नर्सरी तैयार कर जून माह तक धान की रोपाई कर लेते थे, लेकिन इस बार अब तक मात्र 25 प्रतिशत कृषि भूमि पर ही धान की रोपाई हो सकी है। अधिकतर खेतों में किसान पहले से ही डायरेक्ट ड्रिल व्यवस्था से धान की बुआई कर चुके हैं। ऐसा करने वाले किसान आर्थिक रूप से सबल नहीं हैं, जिसके कारण इस बार मानसून की लेट लतीफी से तंग आकर उन्होंने धान की छिटुवा बुआई कर डाली है। इटवा क्षेत्र में दर्जनों किसान ऐसे हैं, जो मानसून समय से न आने के कारण इस विधि से धान की खेती करने को मजबूर हुए हैं। करहिया गांव के निवासी बृजेश का कहना है कि पिछली बार हमने आठ एकड़ भूमि में धान की रोपाई कराई थी, लेकिन इस बार समय से बरसात न होने के कारण आधा से अधिक भूमि पर अरहर की खेती कर रहे हैं तथा जो बाकी के बचे खेत हैं, उसमें धान की सीधे बुआई कराई हैं। सर्वदानंद कहते हैं कि धान की रोपाई पहले से काफी महंगी हो गई है 1500 रुपये प्रति बीघे की दर से मजदूरी देनी पड़ रही है। मनरेगा में काम मिलने के कारण समय से मजदूर भी नहीं मिलते। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. मारकंडेय सिंह का कहना है कि समय से बरसात न होने के कारण धान का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। जिले में जितने रकबों पर पिछली बार धान की खेती हुई थी, इस बार वह रकबा कम हो गया है, क्योंकि किसानों ने मानसून की देरी को देखते हुए अन्य फसलों की बुआई कर दी है। धान की रोपाई का प्रतिशत जिले में अब काफी कम है।

नेपाली मजदूरों ने संभाला रोपाई का जिम्मा
इटवा। मनरेगा योजना शुरू होने के बाद से कृषि कार्यों में मजदूरों की जबरदस्त कमी हो गई। गांवों में ढूंढने से भी मजदूर नहीं मिलते। जो मिलते भी हैं वे 125 से लेकर 150 रुपये तक मजदूरी लेते हैं। इसी दिक्कत से परेशान हो क्षेत्र के किसान धान की रोपाई के लिए नेपाली मजदूरों का सहयोग ले रहे हैं। इटवा क्षेत्र के विभिन्न गांवों में इस समय नेपाली मजदूरों का झुंड धान की रोपाई करने में जुटा है। यह मजदूर धान की रोपाई के लिए 1000 रुपये प्रति बीघे की दर से कर रहे हैं। नेपाली मजदूरों के आने से किसानों को मजदूर इकट्ठा करने तथा उनसे काम करवाने के झंझट से छुटकारा मिल गया है।

Spotlight

Most Read

Jharkhand

गरीबी की वजह से इस शख्स ने शुरू किया था मिट्टी खाना, अब लग गई लत

गरीबी की वजह से झारखंड के कारु पासवान ने मिट्टी खानी शुरू की थी।

19 जनवरी 2018

Related Videos

VIDEO: नए साल पर सीएम योगी ने इन्हें दिया 66 करोड़ का तोहफा!

सिद्धार्थनगर के 29वें स्थापना दिवस के मौके पर चल रहे सात दिवसीय कपिलवस्तु महोत्सव का रविवार को समापन किया गया। समापन कार्यक्रम में खुद सीएम योगी आदित्यनाथ पहुंचे। इस दौरान उन्होंने 66 करोड़ रुपये की आठ परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।

1 जनवरी 2018

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper