बारिश से किसानों के चेहरे खिले, मौसम खुशगवार

Siddhartha nagar Updated Fri, 06 Jul 2012 12:00 PM IST
सिद्धार्थनगर। मानसून को लेकर जो इंतजार किसानों को था, वह अब पूरा होने को है। गुरुवार की सुबह हुई झमाझम बारिश से मौसम तो खुशगवार हुआ ही, किसानों के चेहरे भी खिल गए। 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि पर पैदावार करने वाले जिले के अधिकांश किसानों के चेहरे पर मुस्कान छा गई। बहरहाल 1.85 लाख हेक्टेयर भूमि तक सिंचाई संसाधन की पहुंच वाले किसान से ज्यादा वे प्रसन्न हुए, जहां तक सिंचाई के संसाधन का अभाव था। यानी कुल 50 हजार हेक्टेयर भूमि जो असिंचित क्षेत्र है, वहां के किसानों में मौसम परिवर्तन को लेकर उत्साह देखा गया।
इस मानसून का इंतजार शहर से लेकर गांव तक लोगाें को था। शहरी लोग जहां भीषण गर्मी से निजात पाना चाहते हैं तो किसान खेत की सिंचाई को लेकर फिक्रमंद। गुरुवार की दोपहर हल्की बारिश से इनके चेहरे खिल गए। इसके बाद हल्की धूप फिर शाम को काले बदरा से घिरा वातावरण लोगाें के लिए सकून भरा रहा।
बता दें कि मानसून के आने में देरी से किसानों के माथे पर बल पड़ गया था। किसान, खेती को लेकर चिंतित हो गए। डीजल के भरोसे महंगी हो गई खेती तथा बिजली की आंख मिचौली से किसान पूरी तरह प्रकृति पर ही निर्भर हो चुके हैं। एक सप्ताह पूर्व हल्की बारिश से किसानों के मन में कुछ आस जगी थी, लेकिन यह बारिश महज कुछ जगहों पर ही हुई। पर जहां हुई वहां के खेत को ताकत तो मिल गई। इसके बाद फिर कई दिनों तक भीषण गर्मी और आखिरकार गुरुवार को हुई बारिश ने मौसम में एकाएक परिवर्तन ला दिया। बारिश के बाद गांवों में किसान प्रफुल्लित हो गए। क्षेत्रीय किसान बर्डपुर निवासी रामचंदर यादव, अलीगढ़वा के राम नरेश यादव आदि कहते हैं कि बारिश से काफी राहत मिली है। मौसम के साथ ही खेती को लेकर भी काफी सहूलियत हो गई। खेत को जोता जा चुका है। अब भरपूर बारिश का इंतजार किया जा रहा है। उधर, बारिश से गर्मी से कुछ हद तक राहत मिली है। शहरी लोगों ने भी काफी राहत महसूस की है। वन विभाग कालोनी निवासी रजनी, संध्या के अलावा दुकानदार विवेक कहते हैं कि एक सप्ताह से गर्मी के कारण शरीर जल रहा था। मौसम बदला है। हालांकि जैसी बारिश होनी चाहिए, वैसी अभी नहीं हो पा रही है।

2.45 लाख हेक्टेयर भूमि पर होती है पैदावार
सिद्धार्थनगर। जिले में इस समय कुल 245273 हेक्टेयर भूमि ऐसी है, जहां खेती होती है। इस भूमि के अलावा जिले में 4763 हेक्टेयर भूमि कृषि योग्य बंजर भूमि भी है। इसके अलावा जिले में 183081 हेक्टेयर ऐसी भूमि है, जो कृषि विभाग के कागजों में सिंचित क्षेत्र के रूप में जानी जाती है। यानी पचास हजार हेक्टेयर से अधिक ऐसी भूमि है, जहां के किसान सिंचाई के लिए सीधे प्रकृति पर ही निर्भर रहते हैं। इन किसानों को इस बारिश से काफी राहत मिली।

इनके भरोसे हैं सिंचाई की व्यवस्था
सिद्धार्थनगर। नेपाल से सटा जनपद होने के कारण यहां आठ बड़ी नदियां तथा नाले बहते हैं। इसके अलावा सिंचाई संसाधन के लिए ब्रिटिश हुकूमत के दौरान बनवाए गए ताल-तलैया भी मौजूद हैं। इनके भरोसे काफी बड़े कृषि योग्य भू भाग की सिंचाई हो जाती है। इसमें राप्ती नदी, बूढ़ी राप्ती नदी, बान गंगा, कूड़ा, घोघी, जमुआर नाला, तेलार नाला ऐसे हैं, जहां के भरोसे किसान सिंचाई करते हैं। इसके अलावा घोरही, सोतवा, जमुआर और तेलार नदियों के भरोसे भी किसान रहते हैं।

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