कागजों में चल रही 753 मातृ समितियां

Siddhartha nagar Updated Fri, 06 Jul 2012 12:00 PM IST
इटवा। एक तरफ जहां शासन अपनी योजनाओं में सुधार करके उसे और बेहतर तथा प्रभावशाली बनाने का प्रयास कर रही है, वहीं स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता के चलते इन योजनाओं का लाभ आम लोगों को नहीं मिल पा रहा है। बाल विकास परियोजना में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से केंद्रवार मातृ समितियों का गठन किया गया, लेकिन इटवा तहसील में यह समितियां मात्र कागजी बन कर रह गई हैं। इन समितियों की न तो कभी कोई बैठक आयोजित होती है और न ही कोई जांच पड़ताल। समितियों में जिन लोगों के नाम शामिल किए गए हैं, उन्हें ही इस बात की जानकारी नहीं है कि वे समिति के सदस्य हैं।
जानकारी के अनुसार बाल विकास परियोजना के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, किशोरियों तथा पांच माह से छह वर्ष तक के बच्चों को पुष्टाहार तथा गर्म भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को पुष्टाहार के अलावा प्रतिमाह गर्म भोजन उपलब्ध कराने के लिए चार हजार रुपये का भुगतान भी मिलता है, लेकिन तहसील के किसी भी केंद्र पर न तो गर्म भोजन वितरित होता है और न ही पुष्टाहार। शासन ने इस निष्क्रियता को भांपते हुए ही शायद केंद्रवार मातृ समितियों के गठन की कार्रवाई शुरू की थी, लेकिन यह समितियां महज कागजी बनकर रह गई हैं। इटवा तहसील के तीन ब्लाकों में कुल 753 मातृ समितियां कागजों में चल रही हैं। इन समितियों में ग्राम पंचायत सदस्य, लाभार्थियों के अभिभावक तथा स्थानीय स्वास्थ्यकर्मी को शामिल करने का प्रावधान है, लेकिन समितियों के गठन में भारी अनियमितता बरती गई है। इन समितियों में ऐसे लोगों के नाम शामिल हैं, जिन्हें स्वयं ही नहीं पता है कि वे समिति के सदस्य हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इटवा ब्लाक में 232, खुनियांव ब्लाक में 267 तथा भनवापुर में 254 मातृ समितियां गठित की गई हैं। इनका कार्य केंद्रोें से दी जाने वाले सुविधाओं की मानिटरिंग करना है, लेकिन यह समितियां केवल कागजों में ही प्रभावी हैं। धरातल पर इनका कोई वजूद नहीं हैं। इटवा के राजू सिंह, दीपक कन्नौजिया, वीरेंद्र, दीनानाथ, रामदयाल, दुर्गेश सहित दर्जनों लोगों का कहना है कि मातृ समितियों के गठन के बाद भी आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत दयनीय है। अधिकतर केंद्रों पर सदैव ताले बंद मिलते हैं। विभागीय अधिकारी भी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे लोगों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस संदर्भ में सीडीपीओ इटवा गौरीशंकर का कहना है कि निगरानी के लिए समितियों का गठन किया गया, लेकिन अगर इसमें कहीं त्रुटि है तो यह जांच का विषय है। मैं सक्षम अधिकारियों को इसकी रिपोर्ट भेजूंगा।

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