मेले नहीं लगने से छोटे दुकानदारों को बड़ा नुकसान

Meerut Bureauमेरठ ब्यूरो Updated Sun, 25 Oct 2020 12:36 AM IST
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शामली। दशहरा मेले की परंपरा को इस बार कोरोना का ग्रहण लग गया है। जनपद में करीब 12 स्थानों पर लगने वाले मेले इस बार नहीं लगेंगे। इन मेलों में हर साल छोटे दुकानदारों को अच्छी आमदनी हो जाती थी। इस बार इनको बड़ा नुकसान हुआ है।
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कोरोना संक्रमण काल की शुरुआत से ही लोगों के कामकाज पर असर पड़ने लगा था। कांवड़ यात्रा स्थगित हो जाने से इससे होने वाली कमाई बंद हो गई थी। अब लोग दशहरा मेले में दुकानें लगाने की उम्मीद में थे, लेकिन प्रशासन ने भीड़ की आशंका के चलते मेले की अनुमति नहीं दी है।
शामली में हनुमान धाम, कांधला, कैराना, झिंझाना, जलालाबाद, बाबरी, कैराना, ऊन समेत करीब 12 स्थानों पर बड़े मेलों का आयोजन होता था। जलालाबाद, कांधला तथा बाबरी में मेला लगभग सात दिन चलता था। बाबरी में लगभग 100 दुकानें लगती थीं। इसी तरह गढ़ी अब्दुल्ला खां में भी लगभग इतने ही लोग दुकानें लगाते थे।
कैराना में भी रावण दहन के दिन मेला लगाया जाता था। यहां दुकानों की संख्या 25 से 30 तक होती थी। मेलों में खेल-खिलौने, सौंदर्य प्रसाधन, मिठाई, चाट-पकौड़ी आदि की खूब बिक्री होती थी।
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कुछ ही जगहों पर होगा रावण दहन
शनिवार शाम तक कांधला में ही रावण के पुतले के दहन की अनुमति मिली थी। इसके अलावा जलालाबाद एवं बाबरी की अनुमति प्रक्रिया में थी। शामली में इस बार पुतला दहन नहीं होगा। जलालाबाद में केवल रावण के छोटे पुतले का दहन किया जाएगा। कैराना में भी इस बार केवल रावण का 20 फीट ऊंचा पुतला जलाया जाएगा, जबकि हर साल तीन पुतले जलाए जाते थे। बाबरी, गढ़ीअब्दुल्ला खां आदि स्थानों पर भी रावण दहन किया जाएगा।
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दुकानदार परेशान, ठप हो गया कारोबार
संवाद न्यूज एजेंसी
जलालाबाद। मेले में दुकान लगाने वाले दुकानदार परेशान हैं। उनका कारोबार ठप हो गया है।
लाला महेंद्र हलवाई वर्षों से मिठाई की दुकान लगाते आ रहे हैं, लेकिन इस बार नहीं लगेगी। उनका कहना है कि इस कार मेला नहीं लगने से उन्हें भारी नुकसान होगा। कोरोना के कारण पहले से ही नुकसान झेल रहे हैं। जानसठ निवासी राशिद हलवा पराठा की दुकान लगाते हैं। इस बार मेला नहीं लग रहा तो उन्होंने मेला स्थल के पास ही जगह किराये पर लेकर अपना काम शुरू कर दिया है। काम बंद होने से परेशान हैं। दशहरा पर कुछ कारोबार की उम्मीद है।
धर्मवीर सैनी सौंदर्य प्रसाधन की दुकान लगाते हैं। वह कहते हैं कि इस बार कोई मेला नहीं लगा। काम ठप पड़ा हुआ है। अब दशहरा मेला भी नहीं लग रहा। उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। काला हलवाई वर्षों से मेले में जलेबी की दुकान लगाते आ रहे हैं। दशहरा के अलावा अन्य मेलों में भी दुकानें लगाते थे। इससे उन्हें अच्छी आमदनी हो जाती थी लेकिन इस बार पूरा काम ठप हो गया है।
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