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ट्रेन की चपेट में आकर छह गायों की मौत 

अमर उजाला ब्यूरो। तिलहर।  Updated Sun, 21 May 2017 12:04 AM IST
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cow - फोटो : अमर उजाला

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पुलिस, हिंदू संगठनों ने दफन कराए शव 
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बख्शी नाले की पुलिया पर शनिवार तड़के ट्रेन की चपेट में आने से छह गायों की कटकर मौत हो गई, जबकि दो बैल जख्मी हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस और हिंदू संगठनों के लोगों ने रेलवे ट्रैक किनारे गड्ढा खुदवाकर मृत गायों को दफन करवा दिया। 
रेलवे के की-मैन रवि मीना ने बताया कि सुबह छह बजे गायों का एक झुंड अचानक रेलवे ट्रैक पर आ गया। इसी बीच ट्रेन आ गई और यह गायें उसकी चपेट में आ गईं। ट्रेन से कटकर छह गायों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो बैल जख्मी हो गए। इनमें से एक बैल लंगड़ाता हुआ चला गया। जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल है। मालूम हो कि दो दिन पहले भी इसी स्थान पर दो गाय ट्रेन से कट गईं थीं। उनके शव अब भी नाले में पडे़ हैं। सूचना पर एसआई सुभाष कुमार, पशु चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अखिलेश गर्ग, लेखपाल अनूप शर्मा, नगर पालिका परिषद के सफाई निरीक्षक दीपक कुमार, विश्व हिंदू परिषद कार्यकर्ता सुरेश, रूपराम, लखनराम, अर्पित राठौर, नवनीत आदि ने मृत गायों को ट्रैक के समीप गड्ढा खुदवाकर दफन करा दिया। जख्मी बैल का डॉक्टर ने उपचार किया।



फसल की बर्बादी रोकने को हो रही गायों की हत्या!
तीन वर्ष पहले इसी जगह ट्रेन से कटी थीं 13 गाय 

ट्रेन की चपेट में आने से गायों की मौत का यह कोई नया मामला नहीं है, इससे पहले भी रेलवे ट्रैक पर इसी तरह गायों की मौत हो चुकी है। इन घटनाओं के पीछे उन किसानों का हाथ माना जा रहा है जो अपनी फसल में गायों के पहुंचने पर उन्हें हांककर रेलवे ट्रैक पर कर देते हैं। बेजुबान जानवरों की इस तरह सुनियोजित हत्या की ओर पुलिस भी तबज्जो नहीं दे रही है और न ही हिंदू संगठन तथा गोरक्षक सामने आ रहे हैं।
जानवरों के चारे का टोटा होने के कारण लोग गायों और बछड़ों को पालने के बजाय उन्हें लावारिस छोड़ देते हैं। इस कारण गायों, बछड़ों ने आस-पास खेतों में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है। कुछ लोग रखवाली के दौरान जानवरों को खेत से भगा देते हैं, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी हैं जो गायाें की जान लेने पर आमादा हो जाते हैं। तीन साल पहले इसी तरह कुछ लोगों ने फसलोें का नुकसान करने पर गायों के झुंड को घेरकर रेलवे ट्रैक पर लाकर जाकर छोड़ दिया था। इसी दौरान ट्रेन आ गई और तेरह गायों की कटकर मौत हो गई। 

संरक्षण के लिए बनी गोशाला बदहाल
नगर में बाईपास चौराहे पर बनी गोशाला बदहाली के आंसू बहा रही है। यह गौशाला एक सौ वर्ष से अधिक पुरानी है लेकिन प्रबंध समिति द्वारा व्यवस्थाओं पर ध्यान न देने से गोशाला बदहाल है। इस समय यहां सिर्फ आठ गायें हैं। उनके चारे की भी ठीक से व्यवस्था नहीं है। 

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