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वार्डेन सहित पूरा स्टाफ बर्खास्त

Shahjahanpur Updated Sat, 09 Feb 2013 05:31 AM IST
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रेल ट्रैक पर मूक बधिर छात्रों की मौत का मामला
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- तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के बाद बीएसए ने की कार्रवाई
- प्री इंटीग्रेशन कैंप बरतारा पर लटका रहा ताला, छात्र और स्टाफ नदारद
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। बुधवार को रेल हादसे का शिकार हुए दो मूक बधिर छात्रों की मौत के मामले में वार्डेन समेत स्कूल का पूरा स्टाफ बर्खास्त कर दिया गया है। तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने यह कार्रवाई की है। शुक्रवार को भी स्टाफ और छात्र नदारद थे और स्कूल में ताला पड़ा था।
विदित रहे कि छह फरवरी को रोजा के दबहा नाले के समीप फरक्का एक्सप्रेस की चपेट में आने से दो किशोरों की मौत हो गई थी। बाद में हुई शिनाख्त में पता चला कि दोनों किशोर विनोबा सेवा आश्रम बरतारा में चलने वाले बेसिक शिक्षा विभाग के मूक बधिर स्कूल के छात्र थे। वार्डेन डीडी भटट् ने बताया कि मरने वाले छात्र कपिल और इस्लामुददीन थे। प्री इंटीग्रेशन कैंप बरतारा नाम से चलने वाले इस स्कूल का प्रबंधन बेसिक शिक्षा अधिकारी देखते हैं। विनोबा सेवा आश्रम ने स्कूल के लिए किराए पर भवन दिया है। स्कूल के प्रबंधन से आश्रम का कोई संबंध नहीं है।

बेसिक शिक्षा अधिकारी मनोज कुमार वर्मा ने बताया कि मामले की जांच को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। समिति की रिपोर्ट आने के बाद जिलाधिकारी को वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया और उनकेअनुमोदन केपश्चात वार्डन समेत पूरे स्टाफ को बर्खास्त कर दिया गया है। बर्खास्त होने वालों में प्री इंटीग्रेशन कैंप के वार्डन के अलावा चार शिक्षक और तीन केयर टेकर भी शामिल हैं। जांच समिति में सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी पीपी सिंह, जिला समन्वयक सुशील बाबू मिश्रा और बीपी सिंह शामिल रहे।
बताया जाता है कि स्कूल में 60 मूक बधिर छात्रों को प्री इन्टीग्रेशन कैंप के तहत आवासीय सुविधा के साथ पढ़ाया जाता है। शुक्रवार को स्कूल का कोई छात्र और स्टाफ नहीं मिला। मूक बधिर बच्चों के इस सरकारी स्कूल में ताला लगा था।



हादसे का आश्रम से
कोई वास्ता नहीं
रेल हादसे के शिकार हुए दोनों मूक बधिर छात्र विनोबा सेवा आश्रम के नहीं थे। वे प्री इन्टीग्रेशन कैंप के छात्र थे। उनका इस सरकारी स्कूल से कोई वास्ता नहीं है। हादसे के लिए आश्रम नहीं बल्कि बेसिक शिक्षा विभाग जिम्मेदार है।
-रमेश भइया, संचालक विनोबा सेवा आश्रम


प्रताड़ना के शिकार तो
नहीं थे मूक बघिर छात्र!
- सर्द रातों में भी बच्चों को लिटाया जाता है पुआल पर
- बिना पल्ले की खिड़कियों वाले कमरे में बिताते हैं रात
राजेश वाजपेयी
रोजा। बरतारा में सर्व शिक्षा अभियान के तहत संचालित मूक बधिर बच्चों के स्कूल के दो छात्रों की रेल हादसे से हुई मौत को लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं। आशंका है कि छात्र प्रताड़ना से तंग आकर स्कूल से भागे और हादसे का शिकार हो गए।
बरतारा के इस स्कूल में पूरा स्टाफ अध्ययनरत छात्रों के साथ कहीं छिपा हुआ है। स्कूल की आवासीय व्यवस्था देखने से लगता है कि स्कूल की व्यवस्था दोषपूर्ण है। जिसमें छात्र घुटन महसूस कर रहे थे। जिन कमरों में बच्चों को रखा जाता है उनकी खिड़कियों पर दरवाजे भी नहीं हैं। कड़ाके की सर्द रातों में मूक बधिर बच्चों के लिए पर्याप्त रजाई गदद्े आदि तक नहीं हैं। बच्चों को पुआल पर लिटाया जाता है।
विनोबा सेवा आश्रम के संचालक बताते है कि मूक बधिरों के लिए सरकारी व्यवस्था होती है। व्यवस्था में कहीं कमी जरूर होगी जिससे यह दोनों छात्रों ने स्कूल छोड़ा है। बताया जाता है कि घटना से दो दिन पहले से ही दोनों छात्र लापता थे उनको खोजने तक का प्रयास नहीं हुआ। सवाल यह है कि स्कूल से आठ किमी दूर घटना स्थल है, वहां दोनों छात्र कैसे पहुंचे? एसओ रोजा आरएस यादव का कहना है कि रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। जल्द ही डीएम को भेजेेंगे।

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