फूड प्वॉजनिंग से दो भैंसों और तीन पड्डों की मौत

Shahjahanpur Updated Sat, 22 Dec 2012 05:31 AM IST
छह भैंसें मरणासन्न, खली जहरीली होने की आशंका
- सीवीओ पहुंचे, इलाज के लिए डॉक्टरों की टीमें जुटीं
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। हद्दफ क्षेत्र के मोहल्ला चौक आला खां की एक डेयरी पर शुक्रवार सुबह उस वक्त अफरातफरी का माहौल हो गया जब वहां बंधीं दो दुधारू भैंसों समेत पांच जानवरों की मौत हो गई और छह अन्य भैंसें मरणासन्न हालत में पहुंच गईं। जानकारी पाकर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. इंद्रमणि तत्काल मौके पर पहुंचे और बीमार पशुओं के इलाज को पशु चिकित्सकों की टीम जुटाई।
चौक आला खां निवासी श्याम पाल पिछले दस साल से दूध का कारोबार कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने घर के आंगन में डेयरी खोलकर भैंसें पाल रखी हैं। वह भैंसें अपनी निगरानी में आसपास के बागों में चराने ले जाते हैं और शाम को उनका चारा-दाना भी खुद तैयार करते हैं। चारा में मिलाने को सरसों की खली ककरा कलां का एक युवक नियमित रूप से डेयरी पर दे जाता है।
श्याम पाल के अनुसार बुधवार की शाम खली मिलाकर चारा खिलाने के बाद दो-तीन भैंसें अस्वाभाविक रूप से जमीन में पसर गईं। बीते दिन सुबह सदर के पशु अस्पताल खबर करने पर वहां के कर्मचारी ने डेयरी में आकर भैंसों को दवाएं भी दीं, लेकिन शाम तक भैंसों की हालत और बिगड़ गई। आज सुबह उठने पर बाड़े में दो भैंसें और तीन पड्डे मरे देखकर पशु अस्पताल खबर दी गई तो स्टाफ में हड़कंप मच गया।
मौके पर आकर सीवीओ डॉ. इंद्रवीर ने पशुओं की हालत गंभीर देख अधीनस्थों को तलब कर लिया। कुछ देर बाद ही वहां सदर अस्पताल के पशु चिकित्सक डॉ. शिवकुमार शुक्ला, सेहरामऊ दक्षिणी के डॉ. अरुण कुमार और भावलखेड़ा पशु अस्पताल के प्रभारी डॉ. अनिल कुमार अपने साथ सरदार खां, आनंद प्रकाश पांडेय, शिव कुमार सिंह आदि फार्मेसिस्ट लेकर पहुंच गए। इन सभी ने मरणासन्न भैंसों को बचाने के लिए उनका गहन उपचार शुरू किया। इन सभी के प्रयास से और पशु हानि होने से रुक गई।
भैंसों को जानबूझकर जहर दिए जाने की आशंका को खारिज करते हुए डेयरी स्वामी ने किसी से कोई रंजिश होने से साफ इनकार किया। श्याम पाल ने इसलिए पुलिस को कोई तहरीर नहीं दी। अलबत्ता, तहसीलदार केनाम पत्र देकर मृत पशुओं के ऐवज में बतौर मुआवजा आर्थिक सहायता की मांग की है। पशु चिकित्सकों के अनुसार खली या फिर घास में मिले जहरीले तत्वों से पशुओं की हालत बिगड़ गई।


‘अक्सर खली या फिर घास में इंसेक्टिसाइड के इस्तेमाल से आर्गेनो फास्फोरस नामक जहरीले तत्व का समावेश हो जाता है। पेट में यही जहरीला तत्व जाने से जानवरों का आमाशय जाम हो गया और गहरी बेहोशी उनकी मौत का कारण बन गई। दो बीमार भैंसों को दूसरी डेयरियों में शिफ्ट कराया गया है जिससे कि उनकी हालत में शीघ्र सुधार हो सके। मुआवजा प्रक्रिया अपनाने संबंधी उच्चाधिकारियों से आदेश मिलने पर मृत पशुओं की कीमत का आंकलन किया जाएगा।’
-डॉ. शिवकुमार शुक्ला, प्रभारी, सदर पशु अस्पताल

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