जिला पंचायत अध्यक्ष बहादुर का हटना तय

Shahjahanpur Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
हाईकोर्ट ने अविश्वास प्रस्ताव के क्रियान्वयन पर लगी रोक हटाई
- 20 अक्टूबर को भारी मतों से पारित हो चुका है अविश्वास प्रस्ताव
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष बहादुर लाल आजाद के खिलाफ पारित अविश्वास प्रस्ताव के क्रियान्वयन पर लगी रोक हाईकोर्ट ने हटा दी है। हालांकि श्री आजाद की रिट पर फैसला जनवरी के प्रथम सप्ताह में होगा, किंतु स्टे समाप्त होने से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी से बहादुर लाल आजाद का हटना लगभग तय हो गया है।
ध्यान रहे कि जिला पंचायत अध्यक्ष बहादुर लाल आजाद के खिलाफ जिला पंचायत के 27 सदस्यों ने डीएम के समक्ष पेश होकर अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था। जिस पर विचार व मतदान के लिए डीएम ने 20 अक्टूबर की तिथि तय की थी। बहादुर लाल आजाद ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में रिट दायर की। हाईकोर्ट ने 18 अक्टूबर को अंतरिम आदेश में अविश्वास प्रस्ताव के परिणाम के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी।
सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति विनीत सरन और मुशफ्फे अहमद की खंडपीठ ने बहादुर लाल आजाद की रिट पर सुनवाई करते हुए 18 अक्टूबर को जिला पंचायत के अविश्वास प्रस्ताव के नतीजे के क्रियान्वयन पर लगाई गई रोक को समाप्त कर दिया। साथ ही रिट पर फैसले के लिए अब जनवरी के प्रथम सप्ताह में सुनवाई होगी। इलाहाबाद से फोन पर जिला पंचायत सदस्य हरिश्चंद्र वर्मा और नीरज मिश्रा ने बताया कि स्टे समाप्त होने से बहादुर लाल आजाद का जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी से हटने का रास्ता साफ हो गया है।
विदित रहे कि 20 अक्टूबर को अविश्वास प्रस्ताव पर जिला पंचायत के 39 में 34 सदस्यों ने मतदान में हिस्सा लिया। जिसमें 33 सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया जबकि एक मत निरस्त किया गया। इस तरह बहादुर लाल आजाद के खिलाफ एकतरफा अविश्वास प्रस्ताव पारित हुआ था।


दो साल में अपने भी रूठ गए आजाद से
जिला पंचायत का चुनाव नवंबर 2010 में हुआ था और बहादुर लाल आजाद ने 14 जनवरी 2011 को अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला था। उस समय बसपा की सरकार थी। बहादुर लाल आजाद जब अध्यक्ष बने थे तब उनके बसपा के लोग तो साथ थे ही अन्य दलों से भी उन्हें समर्थन मिला था, लेकिन दो वर्ष के कार्यकाल में उनके अपने दल के साथी भी साथ छोड़ गए। यही वजह रही कि 39 में 33 वोट उनके खिलाफ पड़े। वोटिंग के दौरान बसपा जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार की पत्नी सरिता सुमन का वोट भी बहादुर लाल को नहीं मिला। हालांकि इसी मुद्दे को लेकर बसपा हाईकमान ने दिनेश कुमार को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।


राजनीति में पद स्थाई नहीं होते। कुर्सियां मिलती हैं और चली जाती हैं, लेकिन हम राजनीति में जनसेवा को आए हैं और यह काम निरंतर करते रहेंगे। प्रदेश में सत्ता बदलने के साथ जिला पंचायत के सदस्य सपा नेताओं के बहकावे में आ गए। हालांकि अभी हाईकोर्ट में स्टे समाप्त किया है, रिट पर अंतिम फैसला अभी आना है।
-बहादुर लाल आजाद, अध्यक्ष जिला पंचायत

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