यात्री पुल के विस्तारीकरण का अधिकारियों ने लिया जायजा

Shahjahanpur Updated Sun, 09 Dec 2012 05:30 AM IST
पिछले छह माह से रुका है निर्माण कार्य
- मातहतों को रिपोर्ट भेजने के निर्देश
- पांच साल में कई हुए हादसे का शिकार
अमर उजाला नेटवर्क
रोजा। हादसे का पर्याय बने यहां के पैदल यात्री पुल के अब दिन बहुरने वाले हैं। तमाम रेल यात्रियों को मौत की नींद सुला चुका यह पुल अब उनके जीवन का खेवनहार बनेगा। इसी परिपेक्ष्य में रेलवे के सहायक मंडल यांत्रिक अभियंता मुरादाबाद और सहायक अभियंता निर्माण सीताराम ने यहां का दौरा कर पुल के विस्तारीकरण में दिए जाने वाले ब्लाक के संबंध में मातहतों का निर्देश जारी किए।
बता दें कि रोजा का पैदल यात्री पुल अधूरा होने के कारण प्लेटफार्म तीन एवं चार से उतरने वाले यात्री पुल के अभाव में अनाधिकृत रूप से रेलवे लाइन को पार करते हैं और हादसों का शिकार हो जाते हैं। पिछले पांच साल में यह आंकड़ा करीब सैकड़ा पार कर चुका है।
यहां के तमाम राजनैतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पैदल यात्री पुल के विस्तारीकरण की मांग करते हुए इसको पुराने मालगोदाम तक बढ़ाने के मांग की थी और यहां आए डीआरएम, जीएम और सीआरएस को ज्ञापन भी सौपा था। वर्ष 2010 में इस पुल के विस्तारीकरण की योजना को मंजूरी दे दी गई और उस पर काम भी शुरू हो गया था, लेकिन तकनीकी कारणों से यह काम पिछले छह माह से अधर में लटका हुआ था। हाल ही में मां-बेटे की रेल लाइन पार करते हुए हुई मौत से मामला गरमा गया था, लेकिन स्थानीय लोगों के समझाने पर शांत हो गया था। कांग्रेस के संतोष गुप्ता, नगर पंचायत चेयरमैन अजय गुप्ता ने तब भी ज्ञापन रेल मंत्रालय और केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद को देकर काम को पूरा कराने की मांग की थी।


सबसे बड़ी बाधा ओएचई वायरिंग
शनिवार दोपहर पुल के विस्तारीकरण योजना में आ रही बाधा का जायजा लेने के लिये मुरादाबाद से मंडल यांत्रिक अभिंयता पावर बीएस सिद्दीकी, सहायक मंडल अभियंता सीताराम, एआरटी प्रभारी रवि कुमार के साथ मौके पर गये तथा बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पुल के निर्माण में कितना समय लगेगा इसकी रिपोर्ट निर्माण अभियंता को बनाकर मंडल मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए हैं। बाद में श्री सिद्दीकी ने पत्रकारों को बताया कि रिपोर्ट मिलने के बाद यदि समय की मांग चार घंटे की होती है तो डीआरएम स्तर से ही ब्लाक की अनुमति मिल जायेगी। यदि चार घंटे से ज्यादा समय की मांग की गयी तो जीएम या सीआरएस स्तर से अनुमति मिलने के बाद ही काम पूरा कर दिया जायेगा।

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