वैभव हत्याकांड: डीआईजी ने फिर शुरू कराई जांच

Shahjahanpur Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
सीओ सिटी के नेतृत्व में बनाई तीन सदस्यीय टीम
- पीपल घाट के किनारे पड़ा मिला था मासूम का शव
- पोस्टमार्टम में मौत का कारण बताया गया था डूबना
- पुलिस ने एफआर लगाकर रोकी थी केस इन्क्वायरी
- फोरेंसिक जांच दल ने व्यक्त की हत्या की आशंका
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। शहर के बहुचर्चित वैभव हत्याकांड के कई रहस्यों पर पड़ा पर्दा जल्दी हटने की उम्मीद है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार पुलिस की इस मामले में लीपा-पोती को डीआईजी एलवी एंटनी देवकुमार ने दरकिनार करके फोरेंसिक जांच दल की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए इस प्रकरण की नए सिरे से जांच को सीओ सिटी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की है। इसी के साथ विशेष जांच शाखा ने घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल शुरू कर दी है।
कटिया टोला निवासी पत्रकार शैलेंद्र वाजपेयी का 12 वर्षीय इकलौता बेटा वैभव 26 जुलाई 2010 की शाम स्कूल से घर लौटने के बाद अपनी मां से यह कहकर घर से निकला था कि होमवर्क को दोस्त से कॉपी लेने जा रहा है, लेकिन रात में वह घर नहीं लौटा। परिजनों की अथक तलाश के बाद अगले दिन सुबह खन्नौत के बियाबान पीपल घाट के किनारे उसका शव औंधे मुंह नग्नावस्था में पड़ा पाया गया था, लेकिन उसकी साइकिल मौके पर नहीं मिली।
हालांकि, पीएम रिपोर्ट में वैभव की मौत का कारण डूबना बताया गया था। इसी आधार पर सदर पुलिस ने भी केस को हल्केपन से लिया। पुलिस को श्री वाजपेयी ने मकान विवाद की रंजिश का हवाला देते हुए घर के दूसरे हिस्से में रहने वालों पर शक जताया था। पुलिस ने उनसे पूछताछ की औपचारिकता भी निभाई, लेकिन पीएम रिपोर्ट का बेस लेते हुए गत वर्ष 11 जनवरी को एफआर लगा दी, जबकि घटनास्थल पर मासूम की हत्या करने के कई साक्ष्य मिले।
मसलन, वैभव की नाक से खून निकलता मिला और साइकिल के अलावा घटनास्थल से उसके कपड़े भी नहीं मिले। पुलिस निष्कर्ष से असहमति जताते हुए मृतक के पिता ने डीजीपी और गृह विभाग के उच्चाधिकारियों से संपर्क साधा। उनके प्रयास रंग लाए और विशेष अपराध अन्वेषण शाखा के एसआई ने जांच में पाया कि वैभव की हत्या किए जाने की आशंका है। इसकी पुष्टि विधि विज्ञान प्रयोगशाला की फोरेंसिक टीम ने भी की। जांच में शामिल रहे प्रयोगशाला के उप निदेशक सुरेश चंद्रा ने भी गत 17 अप्रैल को वैभव की हत्या होने का संदेह व्यक्त किया।
चूंकि, तब से पुलिस इस केस को भुलाए थी। लिहाजा वैभव के पापा एक बार फिर डीआईजी से मिले और उनसे अपने स्तर से जांच कराने का आग्रह किया। उनके अनुरोध को स्वीकार करके डीआईजी ने सीओ सिटी राजेश्वर सिंह के नेतृत्व में जो टीम गठित की उसमें सदर इंस्पेक्टर सूबेदार सिंह यादव और एसआईएस के उप निरीक्षक पंकज श्रीवास्तव शामिल किए गए हैं। डीआईजी ने मामले की जांच की साप्ताहिक समीक्षा करने का भी निर्णय किया है।


‘डीआईजी के निर्देश पर वैभव की मौत के खुलासे को गठित तीन सदस्यीय टीम ने नए सिरे से घटना के सभी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है। प्रथम चरण में एसआईएस को जांच-पड़ताल में जुटाया गया है। जांच का सुपरविजन कर रहा हूं और जो भी तथ्य हासिल होंगे, उनसे उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।’
-राजेश्वर सिंह, सीओ (सिटी)/जांच टीम के मुखिया

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