खुटार के मोहनपुर गांव में एक और मौत

Shahjahanpur Updated Wed, 28 Nov 2012 12:00 PM IST
खुटार। मोहनपुर गांव के एक परिवार के एक और युवक ने मंगलवार को फांसी लगाकर जान दे दी। इससे पहले इस परिवार में चार लोग आत्महत्या कर चुके हैं, जबकि बीमारी के चलते इलाज के अभाव में दो लोगों की जान जा चुकी है। परिवार के सातवें व्यक्ति की जान जाने से गांव के लोग हतप्रभ हैं। लोग सुसाइड की घटनाओं के पीछे बेकारी, गरीबी और शराब को मुख्य वजह मान रहे हैं।
मोहनपुर निवासी 30 वर्षीय ब्रजमोहन ने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल सका है। पुलिस ने बताया कि इस संबंध में कोई तहरीर आदि मिलती है तो पोस्टमार्टम कराया जाएगा। मृतक की माता ने भी कई बरस पहले फांसी लगाकर जान दी थी। मृतक की दो पत्नी आग लगाकर जान दे चुकी हैं। उसके भाई की पत्नी की भी आग से जलकर मौत हुई थी।
अतीत में जाएं तो मोहनपुर के देव शर्मा का परिवार कभी काफी समृद्ध था। धीरे-धीरे जमीन आदि बिक जाने से परिवार गरीबी और भुखमरी का शिकार हो गया। सबसे पहले देव शर्मा की पत्नी ने फंासी लगाकर जान दे दी। उसके बाद उनके पुत्र विनोद की पत्नी ने आग लगाकर सुसाइड कर लिया। दूसरे पुत्र ब्रजमोहन की पत्नी ने तीन वर्ष पूर्व आग लगाकर जान दे दी। उसकी दूसरी शादी हुई। वर्ष 11 में ब्रजमोहन की दूसरी पत्नी ने भी आग लगाकर जान दे दी। आज ब्रजमोहन ने घर में फांसी लगाकर जीवन लीला समाप्त कर ली। देव शर्मा के पुत्र आजाद के पैर में चोट लग गई थी। बाद में पैर में सड़न पैदा हो गई। गांव के लोगों ने चंदा आदि कर इलाज में मदद की लेकिन वह नाकाफी रही जिससे आजाद की मौत हो गई। उसकी पत्नी की भी बीमारी से मौत हो गई थी।
एक और परिवार के चार लोग कर चुके हैं आत्महत्या
खुटार। मोहनपुर गांव में एक और परिवार है जिसके चार लोग फांसी लगाकर जान दे चुके हैं। इस परिवार के गृहस्वामी ने वर्ष 2010 में फांसी लगाकर जान दे दी थी। इसी वर्ष उनके भाई ने भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वर्ष में 11 में गृहस्वामी के एक पुत्र और लगभग डेढ़ माह पूर्व दूसरे पुत्र ने फांसी लगाकर जान दे दी। लगातार हो रही आत्महत्याओं की घटनाओं से गांव के लोग हतप्रभ हैं। लोगों का कहना है कि आत्महत्याओं के पीछे बड़ी वजह कच्ची शराब है। गांव के पास ही खुलेआम कच्ची का धंधा किया जाता है। लोग शराब पीने के लिए सब कुछ बेच देते हैं और बाद में बेकारी और गरीबी के चलते सुसाइड कर लेते हैं।
एक माह में सात लोग खा चुके हैं जहर
गांव के आधा दर्जन से अधिक लोग पिछले एक माह में जहर खा चुके हैं। समय से जानकारी मिलने के बाद उनका इलाज कराया गया। जिस कारण उनकी जान बच गई।
देवशर्मा का परिवार पहले काफी संपन्न था। बाद में गरीबी के चलते परिवार के लोग परेशान रहते हैं। घर के सदस्यों के जाबकार्ड आदि बने हुए हैं, लेकिन वह लोग काम पर नहीं जाते हैं। आत्महत्या के पीछे तमाम कारण हो सकते हैं।
रामू बाजपेयी प्रधान पति गांव मोहनपुर
आत्महत्याओं के कारण सुर्खियों में रहा मोहनपुर
खुटार। गांव मोहनपुर इससे पूर्व भी आत्महत्याओं के लिए चर्चित रह चुका है। कुछ वर्ष पूर्व गांव के कई लोगों ने अलग-अलग समय सुसाइड कर लिया था। उस समय भी अमर उजाला ने मामले को मुख्य प्रष्ठ पर प्रकाशित किया था। उसके बाद तमाम अधिकारियों ने गांव में डेरा डाल कर लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाया था।
फरवरी 2005 में गांव मोहनपुर में हो रही आत्महत्याओं के मामले को अमर उजाला ने अपनी मेन खबर बनाया था। खबर छपते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया था। डीएम सहित तमाम अधिकारी सुबह होते ही गांव आ पहुंचे थे। सुसाइड के कारणों की गहन छानबीन की गई थी। उस समय भी गांव के लोगों आत्म हत्याओं के पीछे ने कच्ची शराब, कर्ज सहित तमाम कारण गिनाए थे। प्रशासन ने गांव में दूसरे दिन से शिविर लगवाकर वृद्धावस्था, विकलांग और विधवा पेंशन के फार्म भरवाकर मौके पर ही उनका सत्यापन कर स्वीकृत कराया था। तत्कालीन सांसद मेनका गांधी भी गांव पहुंची थी और अधिकारियों से मामले की जानकारी लेकर गांव में विकास कार्य कराने के निर्देश दिए थे।
तब से गांव में तमाम विकास कार्य हो चुके हैं। गांव के तमाम लोग बेहद शिक्षित भी हैं। राजनीतिक स्तर पर भी गांव के लोगों का खासा दखल है। ब्लाक प्रमुख मनोज त्रिवेदी भी इसी गांव के रहने वाले हैं।

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