फर्जी मृत्यु प्रपत्र लगाकर सेनानी की हड़पी जमीन

Shahjahanpur Updated Tue, 27 Nov 2012 12:00 PM IST
पंजाब से आए बेटे ने डीएम से की न्याय की गुहार
- आरोपी ने फर्जीबाड़ा में अन्य भ्रामक प्रपत्रों का सहारा लेकर सेनानी को नि:संतान और स्वयं को उनका भतीजा बताया
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। पंजाब में रह रहे स्वतंत्रता सेनानी के फर्जी मृत्यु प्रपत्र के सहारे उनकी खुटार क्षेत्र में स्थित करीब 50 बीघा कृषि भूमि पर गांव के ही एक व्यक्ति ने राजस्व विभाग से साठगांठ करके कब्जा कर लिया। यही नहीं, जालसाजी के आरोपी ने फर्जीबाड़ा में अन्य भ्रामक प्रपत्रों का सहारा लेकर सेनानी को नि:संतान और स्वयं को उनका भतीजा बताया। इस प्रकरण में पुवायां के तहसीलदार से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने पर सेनानी के बेटे ने सोमवार को सिटी मजिस्ट्रेट गौरव वर्मा से भेंट की और उन्हें डीएम के नाम पत्र देकर जांचोपरांत कार्यवाही करने की गुहार की।
बता दें कि आजादी के बाद विभाजन में भड़की हिंसा से बचने को पंजाब (अब पाकिस्तान) से परिवार सहित विस्थापित होकर यहां आए उमराव सिंह स्वतंत्रता सेनानी थे और इंडियन नेशनल आर्मी को उन्होंने अपनी सेवाएं दी थीं। यहां खुटार क्षेत्र के गांव के चठिया बलरामपुर में कुछ जमीन ली और खेती करने लगे। कई दशक तक यहां रहने के दौरान उन्होंने गांव में दो गाटा नंबरों पर 8.280 हेक्टेयर कृषि भूमि जुटा ली।
फार्मिंग का काम पटरी पर आने के बाद वह बच्चों को पढ़ाने को गुरुदासपुर (पंजाब) जाकर रहने लगे और खेती की देखभाल यहां रह रहे कुछ रिश्तेदारों को सौंप दी। वहां की बटाला तहसील के गांव मन्नन स्थित बेटे हरवंश सिंह के घर उनका निधन होने पर पंजाब सरकार से उन्हें अंत्येष्टि में राजकीय सम्मान भी मिला, लेकिन इसी बीच चठिया बलरामपुर के ही एक युवक ने भावलखेड़ा गांव से सेनानी की मृत्यु का फर्जी प्रमाण पत्र हासिल कर लिया।
यही नहीं, उसने खुद को सेनानी का भतीजा और वारिस बताते हुए राजस्व न्यायालय में वाद दायर करके एलआरओ एक्ट की धारा 34 के तहत जमीन अपने नाम करा ली। इसकी भनक लगने पर सेनानी के बेटे हरवंश ने तहसील में पत्रावली का मुआयना कराया। धोखाधड़ी प्रमाणित होने पर उन्होंने पुवायां के तत्कालीन तहसीलदार को प्रतिवेदन सहित साक्ष्य उपलब्ध कराए, लेकिन उन्होंने प्रार्थना पत्र निरस्त करके फर्जी विरासत की पुष्टि कर दी।
तब से लगातार दौड़-भाग करने का कोई नतीजा हासिल नहीं होने पर सेनानी के बेटे ने सोमवार को मुख्यालय पर आकर सिटी मजिस्ट्रेट गौरव वर्मा से भेंट की और उन्हें डीएम के नाम पत्र देकर बताया: पत्रावली पर उपलब्ध गवाह मंगल सिंह पुत्र गुरुमुख व अमरीक सिंह पुत्र संता सिंह ने शपथ देकर कहा कि उन्होंने कोई गवाही नहीं दी और उनके फर्जी हस्ताक्षर बनाए। पुत्र होने के प्रमाण स्वरूप अपना पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस समेत पिता की मौत के समय मिले राजकीय सम्मान की पंजाब के जगमणी, दि ट्रिब्यून अखबारों में प्रमुखता से छपीं खबरें भी दिखाईं।
हरवंश के अनुसार ठोस साक्ष्य देने के बावजूद तहसीलदार ने उन्हें अनदेखा किया और ऐसे व्यक्ति के नाम विरासत सही ठहरा दी जिसका उनके पिता से कोई रिश्ता और किसी तरह का लेना-देना नहीं रहा। सिटी मजिस्ट्रेट ने आश्वस्त किया कि इस प्रकरण की जांच कर उचित कार्यवाही कराई जाएगी।

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