‘इस दौर में तो मेजर ध्यानचंद भी हो जाते फेल’

Shahjahanpur Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
शाहजहांपुर। राष्ट्रीय खेल मानी जाने वाली हॉकी की दुर्दशा जगजाहिर है। कोई इसके लिए क्रिकेट को दोषी मानता है तो कोई मीडिया के सिर पर ठींकरा फोड़ रहा है। विज्ञापन देने वाली तमाम कंपनियों ने भी क्रिकेट को आसमान पर टांग रखा है, लेकिन हॉकी के गिरते स्तर के लिए वास्तव में दोषी कौन है, इसकी दुर्दशा के पीछे कौन से हाथ हैं, कैसे पाया जा सकता है खोया हुआ गौरव आदि सवालों पर हॉकी कोच ने खुलकर अपनी बात रखी। टाउनहाल क्लब में चल रहे आल इंडिया गोल्ड कप हॉकी टूर्नामेंट में अपनी टीम के साथ आए कोच से ‘अमर उजाला’ ने बात की। प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश

एस्टोटर्फ ने छीनी हॉकी की कलात्मकता: पांडेय
जिंदल स्टील प्लांट उड़ीसा के कोच केसी पांडेय का कहना है कि आज के दौर में किसी को उठाना और गिराना काफी हद तक मीडिया पर निर्भर करता है। आज 10-20 रन बनाने वाले खिलाड़ियों की वैल्यू अधिक है, गोल करने वाले खिलाड़ियों को कोई नहीं जानता।
एक जमाना था जब विश्व में भारत की हॉकी का जादू चला करता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। एस्टोटर्फ ने खेल का पैटर्न बदला है। एक सवाल के जवाब में श्री पांडेय ने कहा: प्राकृतिक मैदान में हॉकी अधिक कलात्मक देखने को मिलती है और इन मैदानों में मेहनत भी कम करनी पड़ती है। टर्फ पर खिलाड़ी को अधिक मेहनत करनी होती है और कलात्मकता भी छोड़नी पड़ती है। श्री पांडेय का मानना है कि यदि आज के दौर में मेजर ध्यानचंद होते तो वह भी फेल हो गए होते।
टर्फ अच्छा है या बुरा के सवाल पर उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि हमने इसे स्वीकार किया। एक टर्फ बिछाने में करीब छह करोड़ की लागत आती है, जबकि इससे खेल की गुणवत्ता प्रभावित होती है। श्री पांडेय का मानना है कि भारतीय हॉकी को पुनर्जीवित करने के लिए खेल के हर विभाग का कोच अलग होना चाहिए, वह भी देश के ही वरिष्ठ खिलाड़ी हों। बाहरी कोच स्वीकार नहीं करने चाहिए। इसके अलावा सरकार को भी सहयोग करना चाहिए। खेलों को राजनीति से अलग किया जाना हितकर होगा।
टीम चयन में भेदभाव उचित नहीं: बलविंदर
16-सिखलाई नागालैंड एवं फतेहगढ़ के कोच बलविंदर सिंह का मानना है कि एस्टोटर्फ और प्राकृतिक मैदान में सबसे बड़ा अंतर स्पीड का है। टर्फ पर खेलने वाले खिलाड़ी को ताकत अधिक लगानी पड़ती है। इस मैदान पर केवल पासिंग का खेल होकर रह गई है हॉकी। जबकि घसियाले मैदान पर अभी भी कलात्मक खेल देखने को मिलता है। जो मैदान घसियाले नहीं हैं उन पर खेलने से हॉकी को काफी नुकसान हो रहा है।
श्री सिंह ने कहा कि टर्फ पर बाल के साथ ही बराबर की स्पीड से खिलाड़ी को दौड़ना पड़ता है, जबकि हरे-भरे प्राकृतिक मैदान पर आराम से खेला जा सकता है। असली हॉकी तो इन्हीं मैदानों पर ही दिखाई देती है। हॉकी दुर्दशा पर नागालैंड के कोच का कहना है कि टीम के चयन में भेदभाव बंद किया जाना चाहिए और जो खिलाड़ी वास्तव में पात्र हैं, उनका चयन होना चाहिए। इससे देश का मान-सम्मान भी बचेगा और अच्छे खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।
अभी हुए ओलंपिक खेलों में भारतीय टीम के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए बलविंदर सिंह ने कहा कि टीम इंडिया में कई ऐसे खिलाड़ी थे, जिन्हें इतनी जल्दी ओलंपिक का टिकट नहीं दिया जाना चाहिए था। हॉकी बचाने के लिए अच्छे खिलाड़ियों को नजरअंदाज किया जाना अच्छा संकेत नहीं है।

Spotlight

Most Read

Dehradun

देहरादून: 24 जनवरी को कक्षा 1 से 12 तक बंद रहेंगे सभी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र

मौसम विभाग की ओर से प्रदेश में बारिश की चेतावनी के चलते डीएम ने स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद करने के निर्देश जारी किए हैं।

23 जनवरी 2018

Related Videos

प्रेम में बदनामी के डर से नाबालिग ने खुद को फूंका

शाहजहांपुर में एक नाबालिग लड़की ने बदनामी के डर से आग लगाकर जान दे दी। लड़की के प्रेमी ने लड़की के घर फोन करके दोनों के प्रेम प्रसंग की बात कही। जिसके बाद लड़की ने बदनामी से बचने के लिए ये कदम उठाया।

22 जनवरी 2018

आज का मुद्दा
View more polls
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper