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जाम से खाली नहीं कोई चौराहा

Shahjahanpur Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
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शाहजहांपुर। एक तो यातायात का तेजी से बढ़ता दबाव और ऊपर से असमय विचरण करते पशुओं के झुंड। अतिक्रमण ने सड़क को और संकरा कर दिया है। नतीजा यह है कि अपने शहर में किसी चौराहे से गुजरना आसान नहीं है। जिधर जाइये जाम से दो चार होना पड़ेगा। यह रोज दो रोज की बात नहीं अक्सर यह नजारा नजर आता है।
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शहर के उत्तरी सिरे को दक्षिणी छोर से जोड़ने वाले दो मार्ग हैं। इनमें से जेल रोड पर दो दशक पीछे तक यातायात बिल्कुल नगण्य था। रोडवेज की बसें भी टाउन हाल के पुराने रेलवे पुल से घंटाघर होकर गुजर जाती थीं। कुछ समय बाद जेल रोड को हॉट मिक्स से तैयार किया गया तो उस पर वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। अब इन दोनों रास्तों को जाने दें, शहर को बाईपास कर निकले ईदगाह-कनौजिया अस्पताल रोड पर इतने वाहन बढ़ गए कि पैदल चलना कठिन हो गया है।
सुबह स्कूल-कालेज और आफिस कचहरी के वक्त और दोपहर बाद स्कूल छूटने के समय कचहरी चौराहे, अंजान चौकी चौराहा, मालखाना मोड़, कच्चा कटरा तिराहा, अंटा चौराहा आदि कई प्वाइंटों पर जाम लगना आम हो चुका है। लाल इमली चौराहा के पास रोड एरिया चौड़ा होने के बावजूद अवैध कब्जों से वहां रोज वाहनों का रेला जमा होता है। बाकी चौराहों का भी यही हाल है, लेकिन ट्रैफिक के जवान रोड के किनारे फुटपाथ खड़े बतियाते या फिर भीड़ के बीच यूं ही डंडा घुमाते दिखते हैं।
दरअसल, भीड़ में शामिल हर किसी में जल्दी आगे निकलने की होड़ के चलते उन्हें एक जवान नियंत्रित नहीं कर पाता। रही बची कसर डेयरियों को आने-जाने वाली भैंसों के झुंड या अन्य आवारा पशु पूरी कर देते हैं। उनके निकलने का समय तय होने के बाद भी डेयरी संचालक उसका अनुपालन नहीं करते, लेकिन होता कुछ नहीं। कई जगह अवैध कब्जे हटा पाने में अफसर भी खुद को लाचार साबित करने में कोई संकोच नहीं करते। फिर जाम की समस्या से छुटकारा आखिर कैसे मिले?
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कछुआ चाल से बन रहे डिवाइडर
शाहजहांपुर। जाम के स्थायी बन चुके ठिकानों से अतिक्रमण हटाने में तीन-चार माह पहले पुलिस ने जितनी सख्ती दिखाई, लेकिन बाद में उस ओर से आंखें फेर लीं। बहादुरगंज चौराहे और गल्ला मंडी रोड के सामने खाली कराई गई जगह को स्लाइडिंग बैरियर लगाकर घेरा गया, लेकिन अगले दिन उन्हें समेटकर पीछे करके आगे ठेले-खोंचे सज गए। जाम से निपटने को सदर चौराहे, कचहरी के पीडब्लूडी तिराहा पर बनाए गए डिवाइडर बेहतर नतीजे दे रहे हैं। यही प्रयोग अंजान चौकी चौराहा पर किया गया, लेकिन वहां डिवाइडर का निर्माण कार्य कछुआ चाल से हो रहा है।
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फोटो 3 में।
‘लाल इमली चौराहा पर ऐसा अतिक्रमण है कि उसे हटाना संभव नहीं, इसलिए वहां भी डिवाइडर बनाने पर विचार हो रहा है। शहर में 15 ऐसे चौराहे हैं जहां दो शिफ्टों के लिए एक-एक सिपाही की जरूरत है, लेकिन ट्रैफिक में कुल 12-13 लोग हैं। रोड पर असमय घूमने वाले जानवरों के लिए कांजी हाउस रहे नहीं...उनके मालिकों पर सख्ती की जा रही है।’
-राजेश्वर सिंह, सीओ (सिटी/ट्रैफिक)
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