समय के साथ निखरा है रामलीला का मंचन

Shahjahanpur Updated Wed, 10 Oct 2012 12:00 PM IST
शाहजहांपुर। एक जमाने में नगर रामलीला बाहरी मंडली किया करती थी, लेकिन पिछले 17 वर्षों से स्थानीय कलाकारों ने मोर्चा संभाल रखा है। समय के साथ लीला मंचन में परिवर्तन भी किए गए। अब खिरनी बाग जीआईसी मैदान में होने वाली नगर रामलीला में काफी सुधार हो चुका है, इसीलिए यहां लीला का आनंद लेने वालों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है।
नगर रामलीला का जिम्मा नगर विधायक सुरेश कुमार खन्ना समेत प्रमुख लोगों के कंधों पर है। लीला मंचन के लिए कई महीने पहले से बैठकें शुरू हो जाती हैं, जिसमें कुछ न कुछ सुधार किए जाने की रणनीति बनाई जाती है। यहां महिलाओं और पुरुषों के बैठने की व्यवस्था भी अलग-अलग की जाती है। कड़ी सुरक्षा के बीच दर्शक लीला का आनंद लेेते हैं। चूंकि ओसीएफ रामलीला में मेला प्रदर्शनी हावी होती जा रही है, इसलिए यहां लीला देखने वालों की संख्या में गिरावट हो रही है। शुरू के दिनों में ओसीएफ रामलीला में दर्शकों के बैठने की भी व्यवस्था नहीं होती, लिहाजा दर्शक नगर रामलीला की ओर भागते हैं।
नगर रामलीला में मेला भले ही कम हो, लेकिन सीमित संसाधनों के बीच लीला मंचन में कोई समझौता नहीं किया जाता। इस रामलीला की खासियत पहले दिन श्री गणेश स्थापना शोभायात्रा और समापन पर राजगद्दी शोभायात्रा है, जिसे देखने के लिए इस कदर भीड़ बढ़ती है कि सड़कें पट जाती हैं। नगर का रामलीला या यूं कहें कि रावण दहन हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार ही उचित मुहूर्त में ही किया जाता है। इसमें किसी प्रकार का समझौता नहीं होता।

‘महेश श्रीवास्तव बताते हैं कि वर्ष 1979 और 1985 में नवरंग ड्रामेटिक क्लब के कलाकारों ने लीला का दायित्व निभाया था। बाहरी मंडली को लोगों ने पसंद नहीं किया, इस कारण नव चेतना कला परिषद ने इसकी जिम्मेदारी ली और पिछले 17 वर्षों से इससे जुड़े कलाकार दर्शकों को लुभा रहे हैं।’
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‘नव चेतना कला परिषद के संस्थापक और निर्देशक कृष्ण मोहन शर्मा कहते हैं कि रामलीला का मंचन कराना बड़ी चुनौती थी, उन्होंने इसे स्वीकार किया और आज सफलता पूर्वक मंचन करा रहे हैं। लोग राम लीला का आनंद लेने खिरनीबाग आते हैं। लोगों में धार्मिकता बढ़ी है, इसलिए भीड़ बढ़ना स्वाभाविक है।’
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‘इस बार नगर रामलीला में कुंभकरण का किरदार निभाने वाले अमित श्रीवास्तव पहली बार मंच पर उतरने के लिए काफी लालायित हैं। भगवान राम को आदर्श मानने वाले अमित टाटा मोटर्स में एजीएम पद पर कार्यरत हैं। उन्हें मंच पर हाहाकार मचाना अच्छा लगता है, इसलिए कुंभकरण का किरदार उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया।’
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‘संदीप कुमार राठौर वैसे तो चार पहले रामलीला से जुड़ गए थे, लेकिन लक्ष्मण जैसा अहम रोल उन्हें अब मिल सका है, इससे वह काफी उत्साहित हैं। अमित भरत के जीवन से काफी प्रभावित हैं। बोले: शुरू में काफी नर्वस थे, लेकिन अब सभी के सहयोग से आत्मविश्वास आ गया है।’
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‘दीप्ति कपूर कक्षा 11 की छात्रा हैं। उनका रामलीला में काम करने का बहुत मन था, सो उन्हें इस बार नगर रामलीला मंच पर लक्ष्मण की मां यानी उर्मिला के रूप में देखा जा सकेगा। दीप्ति उर्मिला के त्याग को सर्वोपरि मानती हैं। उनकी इच्छा भविष्य में जानकी का किरदार निभाने की भी है।’

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