बदमाश पकड़ने निकले सिपाही की मौत

Shahjahanpur Updated Mon, 24 Sep 2012 12:00 PM IST
फर्रुखाबाद मार्ग पर टैंकर ने बाइक को मार दी टक्कर
- इनामी बदमाश को पकड़ने साथियों के साथ निकले थे शोकेंद्र
- पुलिस लाइंस में दी गई सिपाही को अंतिम सलामी
अमर उजाला नेटवर्क
शाहजहांपुर/ जलालाबाद। सीओ के आदेश पर इनामी बदमाश पकड़ने निकले सिपाही की बाइक को टैंकर ने टक्कर मार दी। जिससे बाइक क्षतिग्रस्त हो गई और सिपाही की मौके पर ही मौत हो गई। सिपाही की मौत से महकमे में शोक की लहर दौड़ गई। पोस्टमार्टम के बाद सिपाही को अंतिम सलामी दी गई। इसके बाद सिपाही का शव घरवाले अपने गृहजनपद ले गए।
शनिवार की रात सीओ जलालाबाद ने पुलिस को इनामी बदमाश पकड़ने के आदेश दिए थे। जलालाबाद थाने में तैनात सिपाही परवेज आलम, सुरेंद्र यादव और शोकेंद्र कुमार की टीम इनामी बदमाश को पकड़ने निकली थी। एक बाइक पर परवेज आलम और सुरेंद्र यादव थे, जबकि दूसरी बाइक पर सिपाही शोकेंद्र कुमार (21) पुत्र पवन सिंह निवासी गांव बलुआ जनपद शामली अकेले गश्त पर थे। रात करीब 10:50 बजे सिपाही शोकेंद्र कुमार जैसे ही कटरा-फर्रुखाबाद स्टेट हाइवे पर गांव माल्दूपुर के सामने स्थित फिलिंग स्टेशन के पास पहुंचे तो कटरा की ओर से तेज गति से आ रहे टैंकर, नंबर एचआर-38-एच-8700, ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। सिपाही की मौके पर ही मौत हो गई। टैंकर चालक मौका पाकर फरार हो गया। सिपाही परवेज की ओर अज्ञात चालक पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। सिपाही के शव को पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइंस ले जाया गया, जहां उसे एएसपी सिटी डॉ. एसएन भारद्वाज, सीओ सिटी राजेश्वर सिंह के अलावा पुलिस जवानों ने अंतिम सलामी दी। इसके बाद परिजन सिपाही का शव गृह जनपद ले गए।


बुझ गया पवन के घर
का इकलौता चिराग
- पिछले साल ही पुलिस में भर्ती हुआ था शोकेंद्र
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। सिपाही शोकेंद्र अपने मां-बाप का इकलौता बेटा था। उसकी मौत के बाद घरवालों पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। मां-बाप को बुढ़ापे के सहारे से काफी उम्मीदें बंधी थीं, लेकिन शनिवार को दुर्घटना में उसकी मौत होने के बाद सब खत्म हो गईं।
मूल रूप से जनपद शामली (मुजफ्परनगर) के गांव बलुआ निवासी पवन सिंह की एक बेटी पूनम और एक बेटा शोकेंद्र था। पवन सिंह ने बेटी पूनम की शादी कर दी, जबकि शोकेंद्र का पिछले साल पुलिस महकमे में सिपाही पद पर चयन हो गया। भर्ती होने के बाद उसे पहली पोस्टिंग जलालाबाद थाने में मिली थी। इसके बाद बेटे से पिता पवन सिंह और मां ओमवती के दिल में बंधी उम्मीदें जाग उठीं। मां-बाप तमाम प्रकार के सपन संजोने लगे। शनिवार की रात दुर्घटना में शोकेंद्र की मौत होने के बाद उनके सपने चकनाचूर हो गए। इकलौता चिराग बुझने के बाद मां-बाप पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

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