परंपरागत खेती को अलविदा

Shahjahanpur Updated Tue, 28 Aug 2012 12:00 PM IST
किसान दे रहे हैं अब फायदे वाली फसलों पर जोर
- दलहनी फसलों की खेती नहीं करते किसान
- हर वर्ष ही बाजार में आ जाते हैं नए कृषि यंत्र
अमर उजाला नेटवर्क
पुवायां। खेती के मामले में प्रदेश भर में अलग पहचान रखने वाले पुवायां तहसील के किसान फसलों के मामले में नया नजरिया अपनाने लगे हैं। अब ज्यादा जोर उन फसलों पर है जिनकी नगद बिक्री और ज्यादा लाभ हो सके।
कुछ वर्ष पूर्व क्षेत्र में गन्ना, धान और गेहूं की खेती की जाती थी। कुछ स्थानों पर लोग दलहनी फसलें भी उगाते थे, लेकिन आधुनिक ढंग से खेती होने के बाद अब तमाम नई फसलों को भी पैदा किया जाने लगा है। तमाम बड़े किसानों ने आलू, खीरा, ककड़ी, खरबूजा, मक्का आदि फसलों की खेती बड़े पैमाने पर शुरू की तो तमाम लोगों ने औषधीय खेती को भी अपनाना शुरू कर दिया है। नरमा, तुलसी, मेंथा, शतावर आदि की फसलों को पहले प्रयेाग के तौर पर बोया गया। लाभ के बाद उनकी खेती का क्षेत्रफल काफी बढ़ा दिया गया है।
दरअसल क्षेत्र में खेती का काम करने वालों में भारी संख्या पंजाब से आए सिक्ख फार्मरों की है। पंजाब की खेती में जो प्रयोग होते हैं, वह कुछ ही दिन बाद पुवायां क्षेत्र में भी शुरू हो जाते हैं। तमाम किसान वर्ष भर में तीन और चार तक फसलें उगाने लगे हैं।


खेती को भारी नुकसान
ज्यादा पैदावार के फेर में खेती को भारी नुकसान पहुंच रहा है। हालत यह है कि खेत कभी भी खाली नहीं रहते हैं। कृषि मामलों के जानकार राजेश मिश्रा के अनुसार इससे खेती के ऊसर होने का खतरा बढ़ रहा है। उर्वरा शक्ति बेहद कम हो चुकी है। लगातार फसल किए जाने से खेतों में रसायनिक खादों को भारी मात्रा में प्रयोग किया जाता है। हरी खाद तो अब कोई बोना ही नहीं चाहता इससे भी बड़ा नुकसान हो रहा है। क्राप रोटेशन भी बेहद जरूरी है, लेकिन ज्यादा लाभ के फेर में इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।



आवश्यकता के अनुसार ही मंगाते हैं कृषि यंत्र
सालों से कृषि यंत्रों के निर्माण में लगे नंदा ब्रादर्स के स्वामी धीरज शर्मा का कहना है कि किसानों की मांग के अनुसार कृषि यंत्रों का निर्माण कराया जाता है। रोटावेटर, धरतीफाड़, आलू खुदाई की मशीन आदि क्षेत्र में हो रही खेती को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।

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