किसानों को जानलेवा बना कीटनाशकों का छिड़काव

Shahjahanpur Updated Mon, 20 Aug 2012 12:00 PM IST
सुरक्षा सावधानियों के प्रति जागरूकता के अभाव का नतीजा
- किसानों को चक्कर आने या फिर गश खाकर उनके बेहोश होने की घटनाएं बढ़ीं
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। फसलें चाहे रबी सीजन की हों, खरीफ की या फिर जायद की, बुवाई से लेकर सिंचाई होने तक उन्हें कीट-रोगों से बचाने को जहरीले रासायनिक कीटनाशकों का छिड़काव किया जाना जरूरी होता है, लेकिन फसलों की हिफाजत करने वाले यही पेस्टीसाइड्स जागरूकता के अभाव में किसानों के लिए जानलेवा साबित होते हैं। कृषि विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों का मानना है कि कीटनाशकों का स्प्रे करते समय सुरक्षा संबंधी निर्देशों और अपेक्षित सावधानियां नहीं अपनाए जाने से किसानों को चक्कर आने या फिर गश खाकर उनके बेहोश होने की घटनाएं हो रही हैं।
चूंकि, फसलों की बुवाई के बाद अंकुरण शुरू होने या फिर धान की रोपाई के बाद खेतों में भरा पानी सूखने पर कीटनाशकों के छिड़काव का दौर शुरू हो जाता है। इसलिए इन दिनों धान में पेस्टीसाइड का छिड़काव करते किसानों पर बेहोशी छाने या फिर उनकी सांसें थमने की घटनाएं प्रकाश में ज्यादा आ रही हैं। पिछले साल रबी सीजन में खुटार और बंडा क्षेत्र में कई किसान कीटनाशकों की विषाक्तता का शिकार बने। इस बार धान के सीजन में ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
दो दिन पहले कीटनाशक छिड़कते बेहोश हुए सुरतियापुर (पसगवां) क्षेत्र के वृद्घ को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इससे पहले सेहरामऊ दक्षिणी क्षेत्र के ढकिया परवेजपुर गांव में सगे भाई देवेश और अमरेश की हालत बिगड़ चुकी है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार कीटनाशकों का छिड़काव करते वक्त उनसे उत्सर्जित होने वाली जहरीली गंध से बचाव को कुछ सावधानियां अपना ली जाएं तो पेस्टीसाइड के घातक लक्षणों से बचा जा सकता है।


कीटनाशकों के जहर से इस तरह करें बचाव
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0 कृषि रक्षा रसायनों का इस्तेमाल हमेशा सुबह-शाम ठंडे मौसम में करें।
0 स्प्रे करते वक्त चेहरे पर मास्क लगाएं और हाथों में दस्ताने पहनें।
0 आंखों को पूरी तरह ढकने वाला शीशे का सादा चश्मा लगाकर पेस्टीसाइड छिड़कें।
0 पैरों में टखनों तक ढका जूता पहनकर ही उन खेतों में घुसें जिनमें कीटनाशक डाला गया हो।
0 शरीर का कोई कटा-फटा अथवा जला अंग कीटनाशक के संपर्क में नहीं आए।
0 जिधर हवा चल रही हो, उसके विपरीत दिशा में खड़े होकर छिड़काव नहीं करें।
(जैसा कि कृषि विज्ञान केंद्र के शस्य वैज्ञानिक डॉ. केएम सिंह ने बताया)

‘किसानों को गोष्ठियों के माध्यम से पेस्टीसाइड का उपयोग करते समय बरती जाने वाली सावधानियों से लगातार जागरूक किया जाता है, लेकिन इस अभियान में किसानों की अशिक्षा बाधक बन रही है। कम जोत वाले छोटे किसानों की संख्या 50 फीसदी से ज्यादा है और इसी वर्ग के अधिसंख्य किसान अशिक्षित या फिर अल्प शिक्षित होने के कारण कीटनाशकों के इस्तेमाल में लापरवाही बरतत पाए जा रहे हैं।’
-शैलेंद्र कुमार, जिला कृषि रक्षा अधिकारी

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