सीतापुर टर्निंग प्वाइंट पर नौ माह में पांच डिरेलमेंट

Shahjahanpur Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
रेलवे लाइन पर बैलास्ट का न होना भी डिरेलमेंट का कारण
- रेलपथ अनुभाग भी डिरेलमेंटों को जिम्मेदार
- सजा न मिल पाने से बच जाते है दोषी कर्मी
राजेश वाजपेयी
रोजा। रेलवे कर्मियों की लापरवाही से अधिकतर सीतापुर टर्निंग प्वाइंट पर रेल डिरेलमेंट होते हैं, जिसके लिए रेलवे की व्यवस्था काफी हद तक जिम्मेदार है। दूसरा तथ्य यह भी सामने आया है कि रेलवे लाइन के किनारे पड़ने वाला बैलास्ट तीन बरस बीतने के बाद भी नहीं डाला गया है। यह बैलास्ट रेलवे ग्राउंड पर आज भी पड़े हैं।
पिछले नौ माह में रोजा के समीप सीतापुर टर्निंग प्वाइंट पर पांच डिरेलमेंट हुए हैं, जिनके लिए बैठी जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में अधिकतर दो ही बिंदुओं को दुर्घटना का कारण माना है। पहला यह कि रेलवे ट्रैक दोषपूर्ण था। दूसरा बैगनों की मेंटीनेंस न होना। कुछ मामलों में तो रेलचालक की ओवर स्पीड भी दुर्घटना की वजह होती है, लेकिन ऐसा कम ही पाया गया है।
एक जिम्मेदार रेल अधिकारी ने बताया की रेलवे के पास बैगनों को चेक करने अथवा उनका फिटनेस देने का वर्कशाप लखनऊ में है, लेकिन एक लाख किलोमीटर चलने के बाद भी बैगनों के व्हील, स्प्रिंग और अन्य तकनीकी चीजों की चेकिंग नहीं होती है। अधिकतर बैगन बिना फिटनेस के ही लाइनों पर दौड़ाए जाते हैं, जो अक्सर डिरेल हो जाते हैं।
एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु यह भी है कि दोषी पाए जाने पर रेलकर्मियों को ही मोहरा बनाकर पर्यवेक्षक अपने को बचा ले जाते हैं तथा अधिकतर अपील में जाते-जाते रेलकर्मियों के दंड को भी माफ कर दिया जाता है, जिससे हादसों के बाद भी कोई रेलकर्मी सबक लेने को तैयार नहीं है।


बैलास्ट जकड़े रहते हैं
जमीन और लाइन को
रेलवे लाइन के दोनों तरफ 51एमएम साइज के पत्थर रूपी बैलास्ट होने चाहिए, लेकिन सीतापुर टर्निंग प्वाइंट की रेलवे लाइन पूरी तरह खोखली है। तकनीकी रूप से यह बैलास्ट जमीन और लाइन को एक दूसरे से जकड़े रहते है, जिससे रेल फ्रैक्चर होने की दशा में गाड़ियों के बेपटरी होने की संभावना कम होती है।


‘रोजा के सीतापुर टर्निंग प्वाइंट पर घुमाव ज्यादा होने के कारण लाइन कुछ ऊंची-नीची मालूम पड़ती है तथा हर समय इंजन के बेपटरी होने का एहसास होता रहता है। इसकी शिकायत रेलपथ अनुभाग से की गई तथा मेंटीनेंस बुक में कई बार लिखा गया, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।’
- एसके मिश्रा, चालक रोजा


‘अधिकतर बैगन आउट डेटेड हो चुके हैं, जिनकी फिटनेस तक नहीं होती है। बावजूद इसके उनको बिना किसी रोकटोक के चलाया जा रहा हैै। उत्तर रेलवे में लखनऊ के अलावा कहीं भी सी एंड डब्लू कारखाना न होने से इसकी किसी को परवाह नहीं है, जो अक्सर हादसों का कारण बनते हैं।’
- आरपी सिंह, रेलपथ अभियंता


‘नियमानुसार रेलवे लाइन के दोनों ओर पत्थरों का बैलास्ट होना चाहिए, लेकिन सीतापुर टर्निंग प्वाइंट पर रेलवे लाइन पूरी तरह सूनी पड़ी है, जिससे आए दिन हादसे होते हैं। जांच कमेटी का भी ध्यान इस ओर नहीं जाता है।’
- सुरेंद्र पाल, सीएलआई,रोजा

‘अधिकतर रेल डिरेलमेंट के पीछे रेलपथ का दोषपूर्ण होना पाया गया है, लेकिन रेलपथ अधिकारी इसे मानने को तैयार नहीं होते हैं अैार दंड की लंबी प्रक्रिया के चलते रेल कर्मी अपने को बचा लेते हैं। यही कारण है कि डिरेलमेंट्स पर प्रशासनिक रवैया भी नरम है।’
-भुसेली, संकेत अभियंता उत्तर रेलवे


सीतापुर टर्निंग प्वाइंट के खास-खास डिरेलमेंट
3 दिसंबर 2011- आईओसी स्पेशल के छह बैगन बेपटरी हो पलटे।
10 नवंबर 2011- आर्मी स्पेशल के दो बैगन पटरी से उतरे, जिसमें सेना के जवान सफर कर रहे थे।
17 जून 2012- सीतापुर जाते समय मालगाड़ी के दो बैगन डिरेल।
4 अप्रैल-2012 साइडिंग को जाते समय इंजन डिरेल।

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