आजादी के जश्न में नहीं दीखता जोश

Shahjahanpur Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
- नए साल के हुड़दंग वाला जुनून केवल स्कूली बच्चों तक है सीमित
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। नए साल के जश्न में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने वाली युवा पीढ़ी के पास आजादी का जश्न मनाने की फुर्सत नहीं है। नए साल पर होने वाले जश्नों को छोड़ दे तो होली-दीवाली, ईद, दशहरा जैसे प्रमुख सामाजिक पर्वों पर युवा रुचि नहीं लेते। मुल्क की आजादी का जश्न केवल स्कूली बच्चों तक ही सिमटता जा रहा है। अपने देश और क्रांतिवीरों के बारे में क्या सोेेेचता है युवा वर्ग आइए देखते हैं।



युवाओं में नहीं है जागरूकता: मंजू
जीएफ कॉलेज में एमएससी में प्रवेश लेने आईं मंजू वर्मा कहती हैं कि युवाओं को आजादी का जश्न जोशोखरोश से मनाना चाहिए, लेकिन आज देश की ओर देखने की फुर्सत ही किसे है। युवाओं में देश के प्रति जागरूकता की कमी है। इसलिए उन्हें जागरूक करने की जरूरत है।



युवाओं में देशभक्ति की कमी: अजय
बीएससी द्वितीय वर्ष के छात्र अजय सुुंदर मिश्रा का मानना है कि लोगों में देशभक्ति की कमी होती जा रही है। भागमभाग जिंदगी में देश के बारे में सोचता ही कौन है? आज के युवा को अपने भविष्य के बारे में सोचने की फुर्सत नहीं है, ऐसे में देश की आजादी का इतिहास कौन जानना चाहता है।



सभी मनाएं राष्ट्रीय पर्व: प्राची
प्राची मिश्रा कहती हैं कि राष्ट्रीय पर्व तो सभी को पूरे जोश ओर उल्लास के साथ मनाना चाहिए। इतना ही नहीं देश को आजाद कराने में अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों के बारे में भी पूरी जानकारी रखनी चाहिए। आखिर उनके प्रति हमारा भी तो कुछ कर्तव्य बनता है।



हुड़दंग नहीं आजादी का जश्न: तितीक्षा
तक्षशिला पब्लिक स्कूल की इंटर की छात्रा तितीक्षा शर्मा का कहना है कि आजादी का जश्न सभी मनाते हैं, लेकिन अन्य त्योहारों के मुकाबले इसमें अंतर होता है। आजादी का जश्न हुड़दंग नहीं बन सकता। इसे सभी गरिमा के साथ मनाते हैं। राष्ट्रीय पर्व अमर शहीदों की याद दिलाते हैं।




हर कोई नहीं जानता
आजादी की कीमत
आजादी की कीमत का अंदाजा हर कोई नहीं लगा सकता। कंप्यूटर युग में इतिहास के पन्ने पलटने की जरूरत ही कोई नहीं समझता। जो थोड़ा-बहुत जानकार हैं वे जागरूक नहीं। तिरंगे के नीचे खड़े होकर केवल संकल्प लेना ही काफी नहीं है। राष्ट्रीय पर्व तो पूरे शान-ओ-शौकत से मनाया जाना चाहिए।
- डॉ. जीए कादरी, प्रवक्ता, जीएफ कॉलेज


सबसे बड़े हैं आजादी के पर्व
आज हर कोई व्यक्तिगत समस्याओं में इतना उलझा हुआ है कि उसे देश के बारे में जानने और सोचने की फुर्सत रह ही नहीं गई है। राष्ट्रीय पर्वाें से बड़ा और कोई त्योहार नहीं हो सकता, लेकिन इस बारे में जागरूकता फैलाने की जरूरत है। युवा वर्ग अपने आप कुछ नहीं सोचता, यह भी एक बिडंबना है।
- डॉ. सुधा त्रिपाठी, प्रवक्ता, आर्य महिला महाविद्यालय कॉलेज

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