बाढ़ विभीषिका झेलना बाशिंदों की नियति

Shahjahanpur Updated Tue, 17 Jul 2012 12:00 PM IST
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सुरक्षा के लिए बने करोड़ों के प्रोजेक्ट अंजाम तक नहीं पहुंचे
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- जलालाबाद के भैंसार बांध पर ठोकरों का काम पूरा, पिचिंग वर्क जारी
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। जिले में हर साल आने वाली बाढ़ विभीषिका झेलने की यहां के बाशिदों की नियति सी बन गई है। बाढ़ के बाद शासन-प्रशासन तरह-तरह की परियोजनाएं बनाने का कार्य तो करता है, लेकिन यह परियोजनाएं अपने अंजाम तक नहीं पहुंच पातीं और पुन: बाढ़ का खतरा सिर पर मंडाराने लगता है।
पिछले साल गंगा, रामगंगा, गर्रा, बहुगल और खन्नौत नदियों ने तबाही मचाई थी। सैकड़ों गांव जलमग्न हो गए थे और हजारों परिवार बाढ़ की चपेट में आकर घर से बेघर हो गए थे। बाढ़ की इस तबाही से निपटने केलिए सिंचाई विभाग ने कई परियोजनाएं बनाईं, लेकिन उन परियोजनाओं को आज तक अंतिम रूप नहीं मिल सका। अगर बनाई गई परियोजनाओं पर समय रहते कार्य कराया जाता तो इस बार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को खासी राहत मिल सकती थी।

भैंसार बांध पर नहीं हो
सका ठोकरों का निर्माण
10.56 करोड़ का बजट मिला था शासन से
अमर उजाला नेटवर्क
जलालाबाद क्षेत्र के करीब तीन सौ गांव हर साल गंगा नदी की बाढ़ के निशाने पर रहते हैं। इन गांवों के बचाने के लिए भैंसार बांध पर ठोकरों आदि के निर्माण का कार्य शुरू कराया गया। पिछले साल यहां सात ठोकरों को बनाने की परियोजना सिंचाई विभाग ने तैयार की और उसके लिए शासन से करीब 10.56 करोड़ का बजट भी दिया गया, लेकिन एक साल गुजरने के बाद भी उक्त बांध पर ठोकरें के निर्माण का कार्य अभी पूरा नहीं हो सका है। विभाग का दावा है कि वहां पर ठोकरों का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अब पिचिंग का कार्य शेष है, जिसे तेजी से निबटाया जा रहा है।


58 करोड़ की संयुक्त
बाढ़ परियोजना फंसी
गर्रा नदी की बाढ़ से दर्जनों गांवों को बचाने के लिए अजीजगंज बांध परियोजना के अलावा अन्य परियोजनाएं बनाई गईं। अजीजगंज परियोजना 2.92 लाख मंजूर हुई थी, जिसके लिए बजट भी मिल गया, लेकिन इस बांध का कार्य अभी भी जारी है। इस बांध के बनने से शहर से सटे कई इलाकों की सुरक्षा जुड़ी है। गर्रा नदी में बाढ़ आने से शहर की आबादी का अधिकांश हिस्सा प्रभावित होता है। इसके अलावा धन्योरा, कोहनी, राईखेड़ा, रुद्रपुर, भरगवां, गुर्रा भमौली आदि गांवों की बाढ़ से सुरक्षा के लिए संयुक्त बाढ़ परियोजना तैयार की गई। करीब 58 करोड़ की यह परियोजना विभाग की तकनीकी कमेटी के पास जाकर ठहर गई। अभी तक इसको मंजूरी नहीं मिल सकी है।


रामगंगा की दो परियोजनाएं फाइलों में कैद
रामगंगा की बाढ़ से बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने कीलापुर, कुंडरिया आदि दर्जनों गांवों को बचाने के लिए करीब 25 करोड़ की परियोजना तैयार कर मंजूरी के लिए शासन को भेजी थीं, लेकिन उक्त परियोजना अभी तक विभागीय फाइलों में कैद है।



जलालाबाद क्षेत्र में रामगंगा की बाढ़ से निपटने और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए जरियनपुर से कोलाघाट पुल तक ठोकरों के निर्माण की योजना तैयार की थी। इसके लिए शासन स्तर से आई तकनीकी टीम ने सर्वे भी कर लिया। करीब सौ करोड़ की यह परियोजना विधानसभा चुनाव घोषित होने के कारण अधर में अटक गई। अब सरकार बदलने से इस पर आगे कार्य होना मुश्किल लग रहा है।
- नीरज मौर्य, विधायक जलालाबाद
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