पाठ्यक्रम तो बदला, पर किताबों का ढर्रा नहीं

Shahjahanpur Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
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माध्यमिक कक्षाओं की सरकारी किताबें अभी भी छात्रों के बस्तों से दूर
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- विभिन्न प्रकाशकों की प्राइवेट पुस्तकों से भरी पड़ी हैं दुकानें
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश इलाहाबाद के अधीन संचालित स्कूल-कॉलेजों के लिए सरकारी किताबें अभी तक बाजार में उपलब्ध नहीं हो सकी हैं, जबकि प्राइवेट किताबों से दुकानें भरी पड़ी हैं। दुकानदारों ने इसकी वजह शासन के सिर मढ़ी है। किताबें समय से उपलब्ध न होने के कारण छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
शिक्षा के नवीन सत्र में कक्षा नौ और दस का पाठ्यक्रम बदल गया है। बदले पाठ्यक्रम की समस्त विषयों की सरकारी किताबें बाजार में अभी तक उपलब्ध नहीं होने से किताबों की दुकानों पर वह गहमा-गहमी शुरू नहीं हो सकी है, जो जुलाई में होनी चाहिए। केवल कांवेंट स्कूलों की जूनियर तक की किताबें ही खरीदने वाले अभिभावकों को स्टेशनरी की दुकानों पर चक्कर काटते देखा जा सकता है।
इस बार कक्षा नौ और दस के अलावा कक्षा 12 का हिंदी और अंग्रेजी के पाठ्यक्रम में कुछ बदलाव किया गया है। बाजार में कक्षा नौ और दस की सामाजिक विज्ञान, गणित और विज्ञान की सरकारी किताबें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं, जिस कारण छात्रों और अभिभावकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इस हफ्ता मिल जाएंगी सभी किताबें: सचिन
जिला किताब एवं स्टेशनरी व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष एवं सचिन ट्रेडर्स के स्वामी सचिन बाथम ने बताया कि नवीन पाठ्यक्रम की पुस्तकों का मूल्य निर्धारण शासन स्तर ने समय से नहीं हो सका, जिस कारण किताबों का प्रकाशन समय से नहीं हो सका है। उम्मीद जताई जा रही है कि सरकारी किताबें इसी सप्ताह उपलब्ध हो जाएंगीं।


सरकारी किताबों का अभाव है: सतीश
किताब एवं स्टेशनरी व्यापार मंडल के जिला महामंत्री एवं जसवंत पुस्तक भंडार के स्वामी सतीश कुमार का कहना है कि कक्षा 11 की सरकारी किताबें तो उपलब्ध हैं, लेकिन नौ एवं दस की पुस्तकें आने में अभी दो-चार दिन लग सकते हैं। स्कूलों में सरकारी किताबों के प्रकाशन वाली पुस्तकों की सूची भेजी जा रही है। इस संबंध में डीआईओएस को ज्ञापन भी दिया जा चुका है।


इन प्रकाशकों की चलेंगी सरकारी किताबें
चालू सत्र में कक्षा नौ से 12 तक हिंदी, अंग्रेजी, गणित और प्रारंभिक गणित, सामाजिक विषय, विज्ञान और संस्कृत विषयों की सरकारी किताबों के लिए विद्या भारती, कैला देवी, राजलक्ष्मी (चित्रा प्रकाशन), रवि ऑफसेट (मनोहर रे और हर स्वरूप शर्मा) आदि प्रकाशकों की किताबें स्वीकृत की गई हैं। इनके अलावा अन्य विषयों की पुस्तकें प्राइवेट रहेंगी, ये किताबें शिक्षक अपने हिसाब से अलग-अलग लेखकों को तवज्जो देकर चलाते हैं।
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