पौराणिक महत्ता लिए हैं क्षेत्र के कई शिवालय

Shahjahanpur Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
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सावन का दूसरा सोमवार आज
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- सावन के महीने में दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु
- गोमती के किनारे बने मंदिरों पर जुटती है भीड़
अमर उजाला नेटवर्क
पुवायां। वैसे तो पूरे सावन शिव मंदिरों पर भक्तों की भारी भीड़ रहती है, लेकिन सोमवार को पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है। सावन माह का दूसरा सोमवार कल है। तहसील क्षेत्र में पौराणिक महत्ता के अनेक शिव मंदिर हैं, जहां इस दिन के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की जाती हैं। गोमती नदी के तटों के किनारे बने मंदिरों की बहुत ही मान्यता है। बताया जाता है कि गौतम ऋषि के श्राप से परेशान भगवान इंद्र ने नदी के किनारे 101 शिवलिंग स्थापित कर श्राप से मुक्ति पाई थी।


पुवायां के प्रसिद्ध शिव मंदिर
0 गांव आयूं में टेढ़ेनाथ के नाम से शंकर जी का मंदिर है। बताया जाता है कि यहां किसी समय शिवलिंग को हाथी आदि से उखड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन शिवलिंग नहीं उखड़ा। इस दौरान शिवलिंग टेढ़ा पड़ने के कारण स्थान को टेढ़ेनाथ बाबा कहा जाने लगा।
0 नगर में देवस्थान मंदिर पर भी सावन में विशेष पूजा होती है। यहां शंकर जी के अलावा अन्य देवी देवताओं की भी भव्य प्रतिमाएं हैं।
0 नगर में ही हरेराम मंदिर का भी काफी महत्व है। यहां मंदिर के पास ही एक सरोवर भी बना हुआ है। जहां हमेशा ही धार्मिक आयोजन चलते रहते हैं।
0 गांव नाहिल में शंकर जी का प्रसिद्ध भूमिसेन बाबा मंदिर है। यहीं स्वामी आत्मानंद जी के आश्रम पर शिव मंदिर और लगभग पांच सौ वर्ष पुराना बरगद का पेड़ हैं। बाबा तुरंतनाथ का प्राचीन मंदिर यहीं स्थित है। गांव मुड़िया बनिगवां में मढ़ियानाथ बाबा का स्थान भी विशेष फल देने वाला है।

बंडा में भी हैं कई शिव मंदिर
0 बंडा से खुटार रोड पर थोड़ी दूर चलने के बाद सुनासिर नाथ स्थान तक रास्ता जाता है। स्वामी गौरीशंकर जी की तपस्थली और भगवान इंद्र को श्राप से मुक्ति दिलाने वाला यह स्थान शिव पूजा पर विशेष फलदाई माना जाता है। यहां कद्दू चढ़ाने का रिवाज है।
0 पुरानी सुनासिर के नाम से मशहूर शिव जी के स्थान के बारे में किवदंती है यहां रुहेलों ने प्रतिबंधित पशु काट दिया था, जिससे यह स्थान स्वयं ही खिसककर गोमती नदी के तट की ओर चला गया।
0 इकोत्तरनाथ के नाम से प्रसिद्ध शिव बाबा का मंदिर जंगल में गोमती नदी के किनारे हैं। कई लोगों ने रात में उठकर पहले पूजा करने का प्रयास किया, लेकिन मंदिर जाने पर उन्हें पहले से ही शिवलिंग पर फूल आदि चढ़े मिले। यहां मान्यता पूरी होने पर नल लगवाए जाते हैं।
0 मझरिया घाट, भंजई घाट, मंशाराम बाबा आदि शिव मंदिरों पर भी सावन में काफी भीड़ होती है।

खुटार के शिव मंदिरों की महिमा
0 नगर के गोला मार्ग पर बाबा गुलरहानाथ के नाम से प्रसिद्ध शिव मंदिर है। यहां श्रद्धालु रोजाना सुबह आकर सरोवर में पली मछलियाें को ब्रेड, लईया आदि खिलाते हैं।
0 नगर का बाबा बगियानाथ मंदिर भी काफी प्रसिद्ध है। इस स्थान पर सिद्ध पुरूषों के दर्शन की तमाम किवंदती सुनने को मिलती हैं। श्रद्धालुओं ने मंदिर को भव्य स्वरूप प्रदान करने के साथ ही धर्मशाला आदि का भी निर्माण कराया है।
0 गांव सिल्हुआ में बावन गंगा के नाम से शंकर जी मंदिर है। यहां शिवलिंग के नीचे से निकलकर जल अपने आप शिवलिंग पर चढ़ता रहता है।
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