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छह घंटे की कटौती से शहरी हुए बेहाल

Shahjahanpur Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
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-सिस्टम कंट्रोल से दिन में सिर्फ चार घंटे पॉवर कट लागू
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-सुबह दस बजे गई बत्ती शाम चार बजे आई, बाद में ट्रिपिंग
-इमर्जेंसी रोस्टरिंग के नाम पर मनमानी से परेशान हैं लोग
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। बिजली की आपात कटौती के नाम पर पॉवर कारपोरेशन के अफसरों की मनमानी से शहर के लोग परेशान हैं। लखनऊ स्थित सिस्टम कंट्रोल ने दिन में चार घंटे का पॉवर कट लागू कर रखा है, लेकिन शहरी क्षेत्र में रविवार को सुबह से शाम तक छह घंटे लगातार कटौती की गई। बिजली संकट केचलते शहर के लोग गर्मी और उमस से बुरी तरह बेहाल हो गए। यही नहीं, बाजारों में कारोबार पर इसका विपरीत असर पड़ा।
विभागीय नियंत्रण कक्ष ने इसी माह जारी कटौती के नए रोस्टर में रात 12 से दो बजे तक और सुबह पांच से छह बजे तक के अलावा दिन में दोपहर 12 से शाम चार बजे तक शहर केसभी फीडर बंद रखने का निर्देश दिया गया है, लेकिन इसका उल्लंघन पहले दिन से होने लगा। रात और सुबह तयशुदा अवधि में बिजली कट रही है, लेकिन दिन में दस से दोपहर दो बजे तक पॉवर कट होने लगा।

लोगों ने मध्याह्न के बजाय सुबह दस बजे से होने वाले पॉवर कट को इसलिए स्वीकार कर लिया क्योंकि कटौती अवधि चार घंटे तक सीमित रही, लेकिन अब दिन की कटौती में इजाफा होने लगा है। दो दिन पहले सुबह दस से अपराह्न तीन बजे तक पांच घंटे की कटौती की गई, लेकिन इसके बदले अगले चरण की रोस्टरिंग में कोई राहत नहीं मिली। दिन की कटौती ने आज पुराना रिकार्ड ध्वस्त कर दिया जब सुबह दस बजे गुल हुई बत्ती शाम चार बजे आई और बाद में ट्रिपिंग शुरू हो गई।
छह घंटे तक लगातार बत्ती गुल रहने से शहरी जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। दिन में धूप खिलने के कारण बारिश से उपजी नमी ने गर्मी के साथ उमस बढ़ा दी। लंब समय तक बिजली संकट बना रहने से घरों में पानी का संकट पैदा हो गया और बाजारों में भी लोगों के कम पहुंचने से चहल-पहल कम रहने के साथ कारोबार पर भी बुरा असर पड़ा।

‘लखनऊ के सिस्टम कंट्रोल से इमरजेंसी रोस्टरिंग का मैसेज मुरादाबाद के थ्रू मिलता है। बिजली की आपात कटौती बहुधा उसी स्थिति में की जाती है, जब ताप बिजली इकाइयों में किन्हीं कारणों से पॉवर जेनरेशन कम होेता है। अचानक कटौती के बदले प्रभावित क्षेत्रों को अगले चरण में होने वाली घोषित कटौती में रियायत देने की कोशिश की जाती है, लेकिन यह प्रयास भी तभी सफल होते हैं जब बिजली की मांग और आपूर्ति में ज्यादा अंतर नहीं होता।’
- आरएन सिंह, अधिशासी अभियंता (शहर), पॉवर कारपोरेशन

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