सूड़ी ने मिटाए गन्ना किसानों के अरमान

Shahjahanpur Updated Fri, 13 Jul 2012 12:00 PM IST
तहसील में बड़े क्षेत्रफल में लगा गन्ना सूखने के कगार पर
- वैज्ञानिकों ने बताए गन्ने को बचाने के उपाय
आशुतोष शुक्ला
पुवायां। तहसील क्षेत्र में गन्ने की फसल पीली पड़ने के बाद सूख रही है। इससे गन्ना किसान काफी परेशान हैं। गन्ने की जड़ के पास सफेद सूड़ी फसल को तबाह करने पर लगी हुई है। पुवायां, बंडा, सिधौंली और खुटार क्षेत्र में बड़े भूभाग पर गन्ना सूखने की कगार पर पहुंच गया है।
किसानों ने बताया कि उन लोगों ने समय पर गन्ने में खाद, कीटनाशक का प्रयोग करने के साथ ही सिंचाई और गुड़ाई भी कराई। कुछ समय पहले तक फसल भी बेहद बढ़िया थी, लेकिन बाद में फसल पीली पड़ने लगी। इसके साथ ही गन्ना नीचे से सड़ने भी लगा। गन्ने की जड़ में सफेद रंग और लाल रंग के सिर वाली सूड़ी सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है। कुछ स्थानों पर गन्ने में चेपा रोग भी लग गया है। इसमें गन्ने की पत्ती पर सफेद रंग की फफूंदी टाइप सूड़ी लग जाती है। इससे गन्ने की पत्ती काली पड़ने लगती है और गन्ना खराब हो जाता है। गन्ने की नीचे की हिस्से की पोई काली पड़कर सड़ने लगती है। यह रोग गन्ने की 64 नंबर किस्म में पेड़ी में लग रहा है।
भारी लागत के बाद फसल खराब होने से किसान बेहद परेशान हैं। उन्होंने बताया कि कीटनाशक दवांए भी कुछ समय तक ही असर करती हैं। इसके बाद फिर से कीड़े का प्रकोप शुरू हो जाता है।
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‘सबसे पहले गन्ने में लगे रोग को जानना चाहिए। इसके लिए किसान गन्ने को स्थानीय कृषि रक्षा इकाई पर ले जाकर जांच करा सकते हैं। रेतीली जगह पर गन्ने की फसल में दीमक लग जाने की संभावना रहती है। इसके अलावा सफेद सूड़ी भी ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। जड़ के पास लाल धारी दिखे तो यह उघटा रोग के लक्षण हैं। किसान गन्ने में ट्राइकोडर्मा इस तरह डाले कि वह पानी के साथ गन्ने की जड़ तक पहुंच जाए। इसके अलावा बेवीरिया बैसियाना का प्रयोग भी लाभकारी रहेगा।’
- अखिलानंद पांडे, जिला कृषि रक्षा अधिकारी





वैज्ञानिकों ने देखी गन्ने की फसल
मकसूदापुर-बंडा। गन्ना शोध परिषद के वैज्ञानिक अरुण कुमार सिंह, सुनील कुमार विश्वकर्मा, ब्रीडर मनीष मोहनदास ने गांव समुलिया, मिलकिया, मझिगवां, सुआपुर, जेबां, तिंदुआ नगरिया, कुइयां महोलिया, मुड़िया कुर्मियात समेत आदि में भ्रमण कर गन्ने के खेतों में लगे कीटों का निरीक्षण किया। उन्होंने किसानों को बताया कि मिलीबग कीट का प्रकोप होने से गन्ने की पत्तियां पीली हो जाती है। साथ ही गन्ने की बढ़वार भी प्रभावित होती है। बारिश होने से काफी हद तक इस कीट पर नियंत्रण हो चुका है।
वैज्ञानिकों ने कीट से बचाव को दवाओं के बारे में भी जानकारी दी। साथ ही किसानों से फसल चक्र अपनाने की भी अपील की। इस दौरान बजाज चीनी मिल के जीएम केन बब्बन सिंह, संजीव पाठक, कुलवीर सिंह, एसके पाल, प्रभुदयाल आदि मौजूद रहे।

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