जांच में खाद्य वस्तुओं के 13 नमूने हुए फेल

Shahjahanpur Updated Fri, 13 Jul 2012 12:00 PM IST
राजकीय जन विश्लेषक ने प्रमाणित की मिलावटखोरी
- मानकों की कसौटी पर खरे उतर सके सिर्फ 11 सैंपल
- अधोमानक नमूनों वाले विक्रेताओं पर दर्ज होंगे मुकदमे
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के कड़े प्रावधानों और अफसरों की तमाम चेतावनियों के बावजूद खाने योग्य वस्तुओं में अखाद्य पदार्थों की मिलावट का धंधा थमने का नाम नहीं ले रहा है। लखनऊ स्थित राजकीय जन विश्लेषक प्रयोगशाला से प्राप्त नमूनों की हालिया जांच रिपोर्ट से यही साबित हुआ है कि दैनिक खान-पान में इस्तेमाल होने वाली 50 फीसदी से अधिक चीजों में जीवन और स्वास्थ्य के लिए हानिकर चीजों का धड़ल्ले से घालमेल किया जा रहा है। फिलहाल, लैब रिपोर्ट में जो नमूने खारिज हुए, उनसे संबंधित विक्रेताओं के विरुद्घ अभियोजन की कार्यवाही शुरू की जा रही है।
बता दें कि गर्मियों का सीजन शुरू होने पर फूड प्वॉजनिंग की शिकायतें रोकने को शासन ने खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग का अभियान छेड़ने के निर्देश दिए थे। इसके अनुपालन में डीएम के निर्देश पर खाद्य विभाग के अफसरों ने खान-पान की विभिन्न वस्तुओं के 26 नमूने सील किए थे। इनमें से 24 नमूनों की रिपोर्ट राजकीय जन विश्लेषक से मिल गई है, जिनमें से 13 नमूने अपमिश्रित पाए गए।
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार जो नमूने फेल हुए उनमें सरसों तेल के पांच, सोयाबीन रिफाइंड के तीन और ड्रिंकिंग वाटर, दही, क्रीम तथा सोहन पपड़ी का एक-एक नमूना शामिल है। तेल के कई सैंपलों में हानिकारक बटर यलो कलर मिला पाया गया और क्रीम में फैट कम मिला। अन्य नमूनों में इस्तेमाल खाद्य वस्तुएं भी स्टैंडर्ड के अनुरूप नहीं पाई गईं। फेल हुए नमूनों में अधिकांश स्टेशन रोड के होटलों-रेस्टोरेंट से लिए गए थे।


फेल नमूनों के 31 वाद हुए दायर
‘इस वर्ष जनवरी से अब तक जो नमूने लिए गए, उनमें से 31 राजकीय जन विश्लेषक प्रयोगशाला की जांच में फेल हो गए। इन नमूनों से संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ खाद्य अपमिश्रण अधिनियम की धाराओं के तहत विभिन्न न्यायालयों में मुकदमे दर्ज कराए जा चुके हैं। इनके अतिरिक्त पुराने सात मामलों में अदालत से विक्रेताओं को जुर्माना और सजाएं सुनाई जा चुकी हैं। लैब की ताजा रिपोर्ट में फेल हुए नमूनों से संबंधित वाद दायर करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है।’
-मनोज तोमर, प्रभारी मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी


नमक के दो नमूने
भी जांच को सील
शाहजहांपुर। प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे घेंघा रोग पर नियंत्रण पाने को शासन ने 20 अगस्त तक आयोडाइज्ड नमक के नमूने लेने का आदेश दिया है। खाद्य निदेशालय से इस आशय का सर्कुलर मिलने के बाद महकमे के अफसरों ने गुरुवार को नमक के दो नमूने जांच का सील किए। एक नमूना हमजापुर निवासी सुधीर गुप्ता की निगोही स्थित किराना शॉप से और दूसरा खुदागंज में किराना मर्चेंट किशन लाल राठौर की दुकान से लिया गया। अधिकारियों के अनुसार नॉन आयोडाइज्ड नमक के इस्तेमाल से पनपने वाला घेंघा रोग गर्दन और गला खराब कर देता है। साथ ही बच्चों का मानसिक विकास भी अवरुद्ध हो जाता है।

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