हिंदी एकांकी के जनक थे भुवनेश्वर

Shahjahanpur Updated Wed, 20 Jun 2012 12:00 PM IST
जन्म शती पर विशेष
- विश्व के रहे हैं पहले असंगत नाटककार
- सर्वाधिक चर्चित कहानी रही है भेड़िए
उमेश शर्मा
शाहजहांपुर। शहर निवासी भुवनेश्वर का नाम हिंदी साहित्य में शीर्ष पर है। वह हिंदी एकांकी के जनक हैं। इसके साथ ही विश्व के पहले असंगत नाटककार हैं। यहां दो जून 1991 को भुवनेश्वर प्रसाद शोध संस्थान की स्थापना हुई। कल 20 जून 2012 को उनकी जन्म शती मनाई जा रही है। डॉ. वीरेन डंगवाल के निर्देशन में भुवनेश्वर पर पीएचडी करने वाले संस्थान के संस्थापक महासचिव डॉ. राजकुमार शर्मा पहले व्यक्ति हैं। भुवनेश्वर का जन्म 20 जून 1912 को हुआ था।
डॉ. शर्मा का कहना है कि भुवनेश्वर 1933 में लखनऊ और कानपुर अपने मित्रों के साथ पढ़ने चले गए। इस बीच वह शाहजहांपुर आते-जाते रहे। नाटकों के अलावा उन्होंने और भी बहुत कुछ लिखा। भेड़िये उनकी सर्वाधिक चर्चित कहानी रही है। यहां चौक में उनका मकान रहा है। दरअसल डॉ. शर्मा को भुवनेश्वर प्रसाद शोध संस्थान स्थापना की प्रेरणा कथाकार गोपाल उपाध्याय से मिली। जिनसे उनकी मुलाकात 1988 में लखनऊ में हुई थी, तभी से डॉ. शर्मा ने भुवनेश्वर पर पूरी खोजबीन शुरू कर दी। भुवनेेश्वर प्रसाद शोध संस्थान साहित्य, रंगमंच, कला और संस्कृति के उत्थान, सर्वेक्षण, प्रलेखन, अध्ययन और अनुसंधान के लिए स्थापित किया गया है।
जहां तक उपलब्धियाें का सवाल है तो 1991 से पहले भुवनेश्वर पर बहुत अधिक सामग्री नहीं थी। उनके विषय में पूरी जानकारी तक उपलब्ध नहीं थी। इसलिए उनके विषय में अनेक भ्रांतियां थीं। शोध संस्थान की भारी मशक्कत के बाद उन पर चार कृतियां आईं। भुवनेश्वर: व्यक्त्वि और कृतित्व, भुवनेश्वर साहित्य, नई कहानी की पहली कृति, भेड़िये, भुवनेश्वर के नाटक: चिंतन और स्वरूप। डॉ. शर्मा का कहना है कि भुवनेश्वर के संबंध में आगामी योजना शाहजहांपुर में नाटक और रंगमंच का एक ऐसा अद्भुत संग्रहालय स्थापित करना है जहां रंग कलाओं से संबंधित सभी जानकारियां सुलभ हों। क्योंकि यहां चित्रा मोहन, उर्मिल कुमार थपलियाल और चंद्रमोहन महेंद्रू जैसे प्रसिद्ध रंग निर्देशक 30 दिवसीय प्रस्तुतिपरक कार्यशालाओं का आयोजन किया जा चुका है। इसे विडंबना ही कहेंगे कि नवंबर के अंतिम सप्ताह में भुवनेश्वर की बनारस में श्री कृष्ण धर्मशाला के पास मृत्यु हुई तो वह विक्षिप्त हो चुके थे।


साहित्यकारों की नजर में भुवनेश्वर
डॉ. राजकुमार शर्मा ने बताया कि 15 मई को साहित्य अकादमी नई दिल्ली ने भुवनेश्वर जन्मशती समारोह मनाया, जिसमें प्रख्यात साहित्यकार प्रभाकर श्रोतिय, डॉ. नंद किशोर आचार्य, डॉ. देवेंद्र राज अंकुर, भानु भारती आदि ने अपने तार्किक उद्बोधन में यह बात साबित की कि भुवनेश्वर प्रसाद ही पहले असंगत नाटककार हैं।

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