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मानव धर्म ही श्रेष्ठ: गनवानी

Shahjahanpur Updated Tue, 19 Jun 2012 12:00 PM IST
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0 संत निरंकारी मिशन के ज्ञान प्रचारक से बातचीत
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शाहजहांपुर। संत निरंकारी मंडल के ज्ञान प्रचारक राम कुमार गनवानी का कहना है कि विज्ञान और तकनीक के सहारे व्यक्ति सुखी चाहे जितना हो ले, लेकिन दुखों का अंत अध्यात्म के बिना नहीं हो सकता।
मध्य प्रदेश रतनाम से आए ज्ञान प्रचारक श्री गनवानी ने कहा कि जीवन को अनुशासित रखने के लिए संतों का संग बहुत जरूरी है। अध्यात्म का महत्व कल भी था और आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा कि सद्गुरु की दृष्टि व्यापक होती है, उसकी दृष्टि में सभी के सुखी जीवन का संदेश समाया होता है। बिना गुरु के ब्रह्म की अनुभूति संभव ही नहीं है। सत्संग के महत्व पर गनवानी ने कहा कि सत्संग जीवन में आ जाए तो और संसार में बचता ही क्या है। सत्संग से ही अहंकार दूर होता है और अहंकार दूर होते ही व्यक्ति का जीवन सार्थक होने लगता है।
कहा: मानव धर्म ही सबसे श्रेष्ठ है, इसलिए हमें मानवता की सेवा से विमुख नहीं होना चाहिए। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों के ब्रह्मज्ञान की रोशनी में जीवन व्यतीत करने की शिक्षा दें, क्योंकि सभ्य और अनुशासित बनकर ही देश का अच्छा नागरिक बना जा सकता है, इससे समाज और राष्ट्र प्रगति करेगा। दिव्य जीवन जीना ही मानव धर्म है। कहा: मिशन का मुख्य उद्देश्य प्रेम और भाईचारे का संदेश देना है।
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