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परविंदर के हौसले में ऊंची उड़ान का दम

Shahjahanpur Updated Fri, 15 Jun 2012 12:00 PM IST
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मूक-बधिर होने के बावजूद हाईस्कूल परीक्षा में पाए 80 फीसदी अंक
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0 सिलाई, डांस, किड्स शो, मॉडलिंग में जीत चुकी है कई पुरस्कार
0 सांसद मेनका गांधी ने दिखाई थी नई राह
हरिओम त्रिवेदी
पुवायां। किसी कवि ने लिखा है कि उड़ान के लिए पंख नहीं हौसलों में जान होनी चाहिए। यह साबित कर दिखाया है मूक-बधिक परविंदर कौर ने। उसने हाईस्कूल परीक्षा में 80 प्रतिशत अंक हासिल कर परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
गांव बिलसिया दौलतपुर निवासी सर्वजीत सिंह और लखविंदर कौर की बड़ी पुत्री परविंदर कौर पैदा होने के एक वर्ष बाद भी जब बोल नहीं सकी तो उसे डॉक्टरों को दिखाया गया। पता चला कि वह मूक-बधिर है। बालिका की इस विकलांगता से माता-पिता को गहरा धक्का लगा। 1998 में गांव गंगसरा में समाजसेवी सोनू सराय ने सांसद मेनका गांधी के प्रतिनिधि अमर सिंह को सारा वाकया बताते हुए मदद मांगी। उनका पत्र लेकर सर्वजीत बालिका को लेकर श्रीमती गांधी ने मिले तो उन्होंने लखनऊ के एनसी चतुर्वेदी बधिर स्कूल को फोन कर बालिका का एडमीशन करने को कहा।
सर्वजीत दंपति ने बेटी को लखनऊ ले जाकर स्कूल के हास्टल में भर्ती करा दिया। उसके बाद उसने क्षेत्र के गांव गदाईसांडा के गुरुनानक इंटर कॉलेज में हाईस्कूल परीक्षा दी और अच्छे नंबरों से पास भी हुई। उसने ड्राइंग में 90 अंक प्राप्त किए हैं। शेष विषयों में भी अच्छे अंक आए हैं।

जीत चुकी है कई पुरस्कार
परविंदर पढ़ाई के अलावा माडलिंग आदि क्षेत्रों में भी कई पुरस्कार जीत चुकी है। फाउंडेशन फार सोशियल केयर लखनऊ की ओर से एड्स पर आयोजित आर्ट कंपटीशन में प्रथम पुरस्कार, राज्य संग्रहालय लखनऊ की ओर से आयोजित क्ले माडलिंग प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार, सोसायटी फार ह्यूमन नेचर डेवलपमेंट रिसर्च दिल्ली की ओर से आयोजित जीके सहित अन्य प्रतियोगिता में वह वर्ष 04 से छह तक तीन वर्ष लगातार विजेता रही। लखनऊ में हुए स्पेशल किड्स शो के ग्रुप डांस में पुरस्कार के साथ ही सिलाई प्रतियोगिता में भी वह विजेता रही है।


मानसी संस्था करेगी मदद
मानसी संस्था के जिलाध्यक्ष सोनू सराय और तहसील अध्यक्ष कुलदीप सिंह ने बताया कि परविंदर के बारे में संस्था की अध्यक्ष साधना श्रीवास्तव को जानकारी दी गई है। उन्होंने किशोरी को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है।


अरकुलनिसा ठीक करते हैं सर्वजीत
परविंदर के पिता सर्वजीत सिंह खेतों में सब्जी उगाने का काम करते हैं। क्षेत्र में वह सब्जी वाले के नाम से मशहूर हैं। वह साइटिका (अरकुलनिसा) को ठीक करने के मास्टर हैं।

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