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एक सीट और दावेदार तीन

Shahjahanpur Updated Sun, 10 Jun 2012 12:00 PM IST
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19000 से अधिक छात्रों को मिल सकती है निराशा
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- इंटर में उत्तीर्ण हुए 27,752 छात्र-छात्राएं, महाविद्यालयों में सीटें मात्र 8,220
अजय अवस्थी
शाहजहांपुर। इंटर में मिली सफलता से हंसते-खिलखिलाते चेहरे मुरझाने में अब बहुत समय नहीं। कारण, स्नातक कक्षाओं में प्रवेश के लिए एक अनार सौ बीमार वाली स्थिति है। जिस हिसाब से जिले का परीक्षाफल रहा है, उससे महाविद्यालयों पर बोझ बढ़ना स्वाभाविक है।
बता दें कि इस बार अकेले यूपी बोर्ड की इंटर परीक्षा में 29,710 परीक्षार्थी शामिल हुए थे, जिसमें 27,752 परीक्षार्थी उत्तीर्ण घोषित किए गए। इस तरह जिले का उत्तीर्ण प्रतिशत 93.41 रहा, जबकि जिले में संचालित 10 महाविद्यालयों में सभी प्रकार के स्नातक वर्ग के छात्रों के लिए लगभग 8220 ही सीटें हैं। ऐसी स्थिति में एक सीट के लिए कम से कम तीन छात्र दावेदार होंगे। किसी न किसी प्रकार से जोड़तोड़ करके प्रवेश लेने वाले तो महाविद्यालयों में पठन-पाठन करते नजर आएंगे, शेष को व्यक्तिगत रूप से फार्म भरने होंगे।

जिले के महाविद्यालयों में स्नातक कक्षाओं में प्रवेश के लिए सीटों की स्थिति

एसएस कॉलेज, शाहजहांपुर
बीकॉम- 240 सीटें
बीएससी- 240 सीटें
बीए- 700 सीटें
बीबीए- 60 सीटें
बीसीए- 160 सीटें
लॉ- 160 सीटें


जीएफ कॉलेेेेज, शाहजहांपुर
बीकॉम- 80 सीटें
बीएससी-720 सीटें
बीए- 600 सीटें


आर्य महिला महाविद्यालय, शाहजहांपुर
बीकॉम- 160 सीटें
बीएससी-160 सीटें
बीए-560 सीटें
सेल्फ फाइनेंस-120 सीटें

गन्ना किसान डिग्री कॉलेज, पुवायां
बीए-480 सीटें

स्वामी विवेकानंद डिग्री कॉलेज, पुवायां
बीकॉम-160 सीटें
बीएससी-120 सीटें
बीए-800 सीटें
बीबीए-60 सीटें


प्रेम किशन खन्ना राजकीय डिग्री कॉलेज, जलालाबाद
बीए-320

धर्मजीत सिंह डिग्री कॉलेज, मिर्जापुर
बीएससी-120 सीटें
बीए-600 सीटें

श्री रामचंद्र सिंह डिग्री कॉलेज, मिर्जापुर
बीएससी-240 सीटें
बीए-640 सीटें


पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय डिग्री कॉलेज, तिलहर
बीकॉम- 80 सीटें
बीए-480 सीटें



‘कुछ छात्र तकनीकी शिक्षा आदि के लिए बड़े शहरों में चले जाएंगे, फिर भी गैप बहुत रहेगा। सरकार को चाहिए कि वह नियमित कक्षाओं में प्रवेश के लिए सीटें बढ़ाए और सांध्यकालीन कक्षाओं की अनुमति दे। तभी समस्या का समाधान हो सकता है।’
- डॉ. अकील अहमद, प्राचार्य जीएफ कॉलेज


‘यह सच है कि कुछ छात्र सुविधानुसार गैर जनपदों में पढ़ने के लिए चले जाएंगे। उनकी शिक्षा सुचारू चलती रहे और उच्च शिक्षा से वे जुड़े रहें, ऐसे में महाविद्यालय तो बढ़ाए नहीं जा सकते। हां, जो महाविद्यालय हैं उनमें कक्षाएं बढ़ाई जा सकती हैं।
- डॉ. अवनीश कुमार मिश्रा, प्राचार्य एसएस कालेेेेेेेेेेज

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