बिजली किल्लत से उद्योगों की टूटी रीढ़

Shahjahanpur Updated Tue, 05 Jun 2012 12:00 PM IST
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जिले में 900 से अधिक छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां
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- बमुश्किल 55 फीसदी उद्यमियों के पास हैं अपने जेनरेटर
- सरकारी अस्पतालों में मरीज गर्मी से तड़पने को मजबूर
अनूप वाजपेयी
शाहजहांपुर। बड़े पैमाने पर हो रही बिजली कटौती से न केवल सामान्य जनजीवन, बल्कि औद्योगिक इकाइयां और आवश्यक सेवाओं में शुमार सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाएं भी बदहाली के मुहाने पर आ गई हैं। अस्पतालों में पर्याप्त क्षमता के जेनरेटर नहीं होने से भर्ती मरीज वार्डों में गर्मी से तड़प रहे हैं।
जिले में छोटी-बड़ी कुल मिलाकर 900 से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं। इनमें से बमुश्किल 55 फीसदी उद्यमियों के पास अपने जेनरेटर हैं, बाकी पॉवर कारपोरेशन पर निर्भर हैं। कनेक्शन लेकर बिजली उपभोग करने वाली इंडस्ट्रीज मालिकों के अनुसार उद्योगों को 24 घंटे बिजली देने के आदेश मौजूदा पॉवर कट से बेमानी हो गए हैं। पिछले सालों इन्हीं दिनों में आजकल जैसा बिजली संकट नहीं हुआ।
उद्यमियों के अनुसार मुख्यालय के जमौर औद्योगिक फीडर से कई शहरी क्षेत्र जोड़ दिए जाने से इंडस्ट्री सेक्टर को बेहिसाब बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है। हालांकि, सहालगी डिमांड कम होने से कई फैक्ट्रियों में प्रोडक्शन घटा दिया गया है। बावजूद इसके तमाम ऐसे उत्पाद हैं जिनकी मांग होने के बावजूद बिजली की कमी से उत्पादन नहीं हो पा रहा है। मसलन, आटा की खपत में बढ़ोत्तरी के बावजूद फ्लोर मिलें पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहीं।
यही हाल, ग्रामीण अंचल के सरकारी अस्पतालों का है, जहां पर्याप्त क्षमता के जेनरेटर नहीं होने से एक्सरे, आप्रेशन जैसी जीवनरक्षक सेवाएं बाधित हो रही हैं। कई जगह इनवर्टर-बैटरी से वार्डों में सिर्फ रोशनी की जा रही है। तुलनात्मक दृष्टि से जिला अस्पताल में बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था कुछ हद बेहतर है, लेकिन उसे देने की भी सीमाएं हैं क्योंकि वहां मैन पॉवर और संसाधनों की कमी आड़े आ रही है। कहने को जिला अस्पताल में 25, 50 और 125 केवीए के तीन जेनरेटर हैं, लेकिन डीजल का बजट एक साल से नहीं आया।
बड़ा जेनरेटर एक्सरे अनुभाग और आप्रेशन थियेटर के लिए चलाया जाता है। लंबे पॉवर कट से जेनरेटर गर्म होने पर छोटे जेनरेटर इस्तेमाल किए जाते हैं। पुरुष समेत महिला अस्पताल के जेनरेटर समेत वाटर सप्लाई के लिए मोटर चलाने, कालोनी के आवासों की लाइट सुधारने और क्वार्टर-सीवेज मेंटीनेंस के सारे काम इकलौते इलेक्ट्रीशियन अशोक शुक्ला को सौंप दिए जाने से उनकी हालत चकरघिन्नी जैसी हो गई है।



‘अस्पताल में इलेक्ट्रिकल कामों की देखरेख में मैन पॉवर की कमी से प्रशासन को लगातार अवगत कराया जा रहा है। डीएम को भी उनके निरीक्षण के दौरान बताया कि एक ही आदमी से 24 घंटे काम लिया जा रहा है। डीजल मद में कई पेट्रोल पंपों का उधार हो चुका है।’
-डॉ. डीके सोनकर, सीएमएस, जिला संयुक्त अस्पताल


‘पॉवर कारपोरेशन के स्थानीय अफसरों से बेहतर बिजली के लिए बात करना बेकार है। उद्योग बंधु की बैठक में प्रशासनिक अफसरों से इंडस्ट्री सेक्टर पर बात हो सकती है, लेकिन उस पर निकाय चुनाव आचार संहिता की बंदिश लग चुकी है। यहां से बिजली का फीड बैक आईआईए को भेजा जा रहा है।’
-अशोक अग्रवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष, आईआईए
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