पॉवर स्टेशनों की मेंटीनेंस अफसरों के रहम पर

Shahjahanpur Updated Wed, 30 May 2012 12:00 PM IST
चेयरमैन पर निर्भर करता है बजट राशि के लिए एप्रूवल
- पॉवर कारपोरेशन की डिस्ट्रीब्यूशन विंग में डैमेजेज ज्यादा
- स्टोर से सामान नहीं मिलने पर थमती है बिजली सप्लाई
अनूप वाजपेयी
शाहजहांपुर। बिजली संकट के मौजूदा दौर में जिले के तमाम संगठन पॉवर सब स्टेशनों की मशीनों के रखरखाव को मिलने वाली धनराशि के दुरुपयोग का मुद्दा प्रमुखता से उठा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि बिजली नेटवर्क को काम लायक बनाए रखने के लिए शासन से निश्चित बजट तय नहीं है। सच कहें तो पॉवर स्टेशनों का मेंटीनेंस वर्क ऊर्जा मंत्रालय और विभागीय उच्चाधिकारियों के रहमोकरम पर है।
पॉवर कारपोरेशन के सिस्टम कंट्रोल से निर्धारित रोजाना छह घंटे की कटौती के अलावा कभी लाइन फाल्ट और ट्रिपिंग तो कभी फीडर वार लोकल रोस्टरिंग के बहाने घंटों बत्ती गुल रखी जा रही है। इससे विभिन्न संगठनों को यह कहने का मौका मिल गया कि पॉवर सिस्टम के रखरखाव में बरती जा लापरवाही से यह दिन देखने पड़ रहे हैं। चूंकि, बिजली वितरण खंड से जुड़े शहर समेत जिले के सभी सब स्टेशनों को पैना स्थित ट्रांसमिशन विंग के 220 केवी स्टेशन से बत्ती मिलती है। इसलिए मशीनों की देखभाल में उदासीनता की तोहमत भी वहीं के अफसरों को झेलनी पड़ रही है।
यहां बता दें कि अन्य विभागों मेें विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन को सालाना बजट राशि तय होती है, लेकिन राजस्व से सरकार का खजाना भरने में अग्रणी बिजली महकमे को ऐसी कोई सुविधा नहीं है। ऐसा भी नहीं है कि पैना पॉवर स्टेशन पर खर्च नहीं होता। हर साल मेंटीनेंस वर्क पर 15 से 20 रुपये मशीनों के बदलाव और रिपेयरिंग की भेंट चढ़ते हैं, लेकिन यह बजट कैश के बजाय स्टोर से सामान के तौर पर मिलता है।
स्पेशल बजट भी तब मिलता है, जब पानी सिर से ऊपर चढ़ता है। मसलन, कोई बड़ा ब्रेकडाउन होने पर ही चेयरमैन से विशेष धनराशि स्वीकृत होती है और वह भी स्टोर से सामान नहीं मिलने की दशा मेें। पिछले साल यही हुआ। पैना की ट्रांसमिशन लाइन के चार टॉवर आंधी-पानी में गिरने के बाद अफसरों को 30 लाख का स्पेशल बजट पास कराने में कई बार लखनऊ मुख्यालय तक दौड़ लगानी पड़ी और इस बीच तमाम गांवों की बत्ती कई दिन गुल रही।

‘उपलब्ध संसाधनों से पॉवर स्टेशन की मशीनों और लाइनों का रखरखाव लगातार कराया जाता है। हां, स्पेशल बजट की स्वीकृति इस पर निर्भर करती है कि डिमांड कितनी है। आम जनता को बिजली देने वाले डिस्ट्रीब्यूशन सेक्शन में डैमेजेज ज्यादा होते हैं।’
-एके अरोरा, प्रभारी अधिशासी अभियंता, पैना पॉवर स्टेशन

‘यह सही है कि वितरण शाखा का नेटवर्क ज्यादा देखभाल मांगता है क्योंकि शहर समेत गांवों का बिजली लोड हमारी लाइनों पर ही पड़ता है। ट्रांसफार्मर, तार, पोल, इंसुलेटर आदि सामान स्टोर से मिलता है। बड़ा ब्रेक डाउन होने की दशा में विभागीय वर्क आर्डर जारी कर भुगतान बाद में कराया जाता है।’
-प्रदीप सोनकर, उपखंड अभियंता (शहर), पॉवर कारपोरेशन

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