विद्यार्थी ने बनाया शहर को कर्जदार

Shahjahanpur Updated Tue, 29 May 2012 12:00 PM IST
‘शहर के भीतर शहर’ का हुआ लोकार्पण
- वक्ताओं ने सराहे पुस्तक में संजोए साहित्य के विविध रूप
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। क्रांतिकारी आंदोलन के ऐतिहासिक पक्ष पर काम कर रहे साहित्यकार सुधीर विद्यार्थी की नवीनतम कृति ‘शहर के भीतर शहर’ का सोमवार की शाम आर्य महिला डिग्री कॉलेज के सभागार में लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर उपस्थित अनेक साहित्यकारों ने इतिहास को संजोए साहित्य के विभिन्न रूपों वाली इस कृति की मुक्तकंठ से सराहना की। बोले, विद्यार्थी ने शहर का कर्ज उतार दिया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रख्यात कथा लेखिका राजी सेठ ने कहा कि ‘शहर के भीतर शहर’ के माध्यम से लेखक ने स्मृतियों को वर्तमान में लाने का सार्थक प्रयास किया। वस्तुत: श्री विद्यार्थी ने विस्मृत हो रहे मुद्दों को जीवित रखने और उनमें नैतिक बल भरने का दुष्कर कार्य कर दिखाया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार रामकुमार कृषक (दिल्ली) ने कहा कि साहित्येत्तर लेखन साहित्य से ज्यादा मूल्यवान हो जाता है क्योंकि आमतौर पर साहित्य को कल्पना प्रसूत माना जाता है।
इससे पूर्व अन्य वक्ताओं ने भी श्री विद्यार्थी की कृति पर नजरिया दिया। प्रकाशन संस्था प्रतिमान के श्याम किशोर सेठ ने कहा कि श्री विद्यार्थी ने इस पुस्तक के माध्यम से भले ही शहर का कर्ज उतारा हो, शहर को अपना कर्जदार बना दिया। यह पुस्तक सुधीर की अन्य कृतियों की तरह अतीत से खींचकर वर्तमान तक लाती है। नाटककार राजेश कुमार बोले: संवेदना के स्तर पर बड़ी ईमानदारी के साथ श्री विद्यार्थी ने शहर को देखने का अनूठा नजरिया प्रस्तुत किया है।
लखनऊ से आए कृष्णकांत, डॉ. वीरेन डंगवाल (बरेली), केशव तिवारी (बांदा), इतिहासकार डॉ. नानक चंद्र मेहरोत्रा, नित्यानंद मुद्ग्ल, शैलेय (रुद्रपुर), कल्लोल चक्रवर्ती (नोएडा), चंद्रमोहन दिनेश, सेनानी बसंतलाल खन्ना आदि ने भी श्री विद्यार्थी के नवसृजन को सराहा। प्रारंभ में संचालन करते हुए मूलचंद्र गौतम ने पुस्तक का संदर्भ लेते हुए विषय की स्थापना की। इस बीच आत्म कथ्य में श्री विद्यार्थी ने कहा कि जब सबकुछ ग्लोबल हो रहा हो, ऐसे दौर में कोई अपनी जमीन देखे, तो यह उसका पागलपन कहा जाएगा, लेकिन यह शहर उनकी सांसों में है और सीने में प्रेमिका की उस तस्वीर की तरह जिसे दूर रहकर भी अपने अंदर झांककर बार-बार देखने का मन करता है। कार्यक्रम में डॉ. विमल प्रकाश टंडन, आचार्य भिक्खु मोगलायन, दिनेश रस्तोगी, अशफाक उल्ला खां आदि उपस्थित रहे।

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