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हाजी इकरार को परिंदों से प्यार एक जुनून

Shahjahanpur Updated Tue, 22 May 2012 12:00 PM IST
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आंगन में गूंजती हैं सैकड़ों पक्षियों की चहचहाहट
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- मौसम के हिसाब से चिड़ियों को उपलब्ध कराते हैं हर सुविधा
- पक्षियों की देखरेख में उनके दोनों भाई भी किया करते हैं सहयोग
उमेश शर्मा
शाहजहांपुर। पक्षियों से प्यार इतना.., इसे हाजी इकरार मोहम्मद का जुनून ही कहेंगे। जहां पक्षियों की प्रजातियां धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं, वहीं इकरार के घर में भोर होते ही सैकड़ों चिड़ियों की चहचहाहट सुनाई देती है। दो बड़े-बड़े पिंजरों में इनके दाने-पानी से लेकर रहने की पूरी व्यवस्था है। मौसम के हिसाब से इन चिड़ियों को हर सुविधा उपलब्ध कराते हैं। इनका कलरव ही उनके आनंद की सबसे बड़ी अनुभूति होती है। उन्होंने इस अनूठे प्रेम की शुरूआत करीब 28 साल पहले की। अब उनके भाई मोहम्मद अखलाक और नवाब हसन इन पक्षियों की पूरी देखरेख कर रहे हैं।
मोहल्ला अलीजई में पिंजरों के सामने बड़ा लॉन भी है। इकरार मोहम्मद को प्रकृति की बनाई हर चीज से प्यार है। कभी बचपन में दिल्ली के चिड़िया घर गए थे। रंग-बिरंगी चिड़ियों को देखकर तभी से ठान लिया कि अपने घर में भी एक दिन चिड़ियाघर बनाएंगे। लगभग 20 साल की उम्र में जालीनुमा छोटा सा पिंजरा बनाया। उस समय घर छोटा था। कुछ चिड़ियां शाहजहांपुर से तो कुछ लखनऊ से खरीद कर लाए। इनको सुरक्षित कैसे रखा जाए। यह जानकारी भी हासिल की। धीरे-धीरे चिड़ियों की संख्या बढ़ती चली गई। अब दो बड़े पिंजरे बनवा लिए हैं। इनमें लव बर्ड (मल्टी कलर में) लगभग 150 के करीब हैं। इसके अलावा बजरी तोते (मल्टी कलर), काकाटील (ग्रे, ब्लैक, सफेद, यलो), हाल ही में आस्ट्रेलियन फाख्ता के दो जोड़े पहाड़ से मंगवाए हैं। इन्होंने अभी अंडे नहीं दिए हैं। सबसे छोटी चिड़िया जावा है। यह फुदकती है।
इनके खाने के लिए कुकनी (ककून) बाजरे की बराबर दाना होता है। यह चिड़ियों की खास गिजा है। तरबूज और पालक भी खिलाते हैं। इनकी परवरिश के लिए घड़ों में छेद कर रखे हैं। प्लाइबुड के बॉक्स हैं। पेड़ का एक मोटा तना भी है। इन्हीं में अंडे देते हैं। बच्चे होते हैं। गर्मियों में इन पक्षियोें के लिए खासतौर से सावर लगा देते हैं। इससे ये पानी में नहाते रहते हैं। खस के पर्दे भी डाल देते हैं। जाड़ों में पिंजरों के बाहर प्लास्टिक के पर्दे डाल देते हैं। इसके अलावा इन्हें सुरक्षित रखने के लिए रूम हीटर भी लगाते हैं। किसी भी पक्षी के बीमार हो जाने पर उसे अलग सिफ्ट कर देते हैं। ताकि और पक्षी बीमार ना हो जाएं। इनके इलाज के लिए बाकायदा दवाइयां रखते हैं।

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