खाद्य वस्तुओं सैंपलिंग महज रस्म अदायगी

Shahjahanpur Updated Fri, 18 May 2012 12:00 PM IST
सिर्फ त्योहारों और खास मौकों पर ही लिए जाते हैं नमूने
- साल के बाकी दिनों बेखौफ चलता है मिलावट का खेल
- नवरात्र के बाद कभी नहीं भरे गए कूटू आटे के सैंपल
- सर्कुलर मिलने पर अधिकारी सात मई को हुए सक्रिय
अनूप वाजपेयी
शाहजहांपुर। खाद्य पदार्थों में मिलावट और अपमिश्रण का खेल पूरे साल जारी रहने के बावजूद इसे रोकने को जिम्मेदार खाद्य सुरक्षा विभाग त्योहारों के अलावा कुछ खास मौकों पर तभी सक्रिय होता है जब शासन से कोई आदेश मिलता है। इस बार भी महकमे के अधिकारी सात मई को तब सक्रिय हुए जब खाद्य सुरक्षा आयुक्त से खान-पान की चीजों के नमूने लेने और सड़े-गले फल नष्ट कराने का सर्कुलर मिला।
दूध में मिलावट हो अथवा सिंथेटिक अखाद्य वस्तुओं से तैयार मावा की बिक्री का धंधा, यह सारे काम पूरे साल होते हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को केरूगंज की खोया मंडी सिर्फ होली के दौरान नजर आती है। इन दिनों सहालगी डिमांड केे चलते खोया की मांग बढ़ी और उसमें मिलावट का खेल भी जारी है, लेकिन अफसरों को इसकी कोई परवाह नहीं। इसी तरह नवरात्र केदिनों मेें कूटू आटा की धरपकड़ के बाद खामोशी ओढ़ ली जाती है, जबकि व्रत के अन्य मौकों पर भी कूटू की खूब खपत होती है।
खास मौकों पर खाद्य वस्तुओं की धरपकड़ और फलों को नष्ट कराने का नतीजा यह होता है कि त्योहारी डिमांड के दौरान वही चीजें आम आदमी को दुर्लभ हो जाती हैं या फिर कई गुना बढ़े दामों पर मिलती हैं। ऐसे में जनसामान्य की ओर से महकमे को सराहना मिलने के बजाय उसके प्रति आक्रोश ही बढ़ता है। यही इस बार भी हो रहा है। फूड सेफ्टी कमिश्नर के आदेश केपरिपालन में शुरू हुआ सैंपलिंग अभियान सिर्फ रस्म अदायगी माना जा रहा है क्योंकि नमूनेबाजी का यह खेल सिर्फ 21 मई तक चालू रखने के निर्देश आए हैं।
गर्मियों के सीजन में दूषित और अपमिश्रित खाद्य पदार्थों से फूड प्वॉयजनिंग की आशंका जून-जुलाई तक बनी रहती है। इन दिनों सैक्रीन डालकर बर्फ के गोले परोसने वाली रेहड़ियां और बेल जूस के नाम पर घातक रसायनों का घोल बेचने वाले अपने ठेले सजाए यत्र-तत्र दिख रहे हैं, लेकिन विभागीय अफसरों को नजर नहीं आ रहे। कलक्ट्रेट गेट पर प्रशासन की नाक की नीचे ऐसी चीजों की दुकानदारी गरमाई हुई है, लेकिन जिम्मेदार लोग उधर से आंखें फेरे हैं।
अधिकारियों तर्क है कि शरबत और जूस के नाम पर बेचे जा रहे पेय पदार्थों का नमूना व्यवहारिक तौर पर लेना संभव नहीं है। उनका मानना है कि अपमिश्रण के संदेह में खुले बिक रहे दूषित पेय पदार्थों को नष्ट कराया जा सकता है, लेकिन सवाल है कि उन्हें ऐसा करने से रोक कौन रहा है?


‘जनवरी से अब तक विभिन्न वस्तुओं के 35 से अधिक नमूने लिए गए। राजकीय जनविश्लेषक प्रयोगशाला में जांच के बाद 26 नमूनों की रिपोर्ट मिली और उनमें 13 अपमिश्रित पाए गए। इसके विरुद्घ दो वाद दायर हो चुके हैं और पांच अन्य मामलों मेें मुकदमे दर्ज कराने की अनुमति ली जा रही है। जल्द ही पेय पदार्थों के ठेले और खोया मंडी चेक की जाएगी।’
- मनोज कुमार तोमर, प्रभारी मुख्य खाद्य निरीक्षक

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