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श्रमिकों की दिहाड़ी से कम मिल रहा मानदेय

Shahjahanpur Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
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समस्याओं में उलझे हैं ग्राम रोजगार सेवक
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- जिले की सभी 922 ग्राम पंचायतों में होनी थी नियुुक्ति
- 125 ग्राम पंचायतों में पद रिक्त होने से बढ़ा कार्य बोझ
- भावलखेड़ा ब्लाक में सेवकों की शत प्रतिशत नियुक्ति
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। जिले के सैकड़ों ग्राम रोजगार सेवक तमाम समस्याओं के मकड़जाल में उलझे हैं। यह भी एक विडंबना है कि मनरेगा के जॉब कार्ड धारकों के काम की निगरानी का दायित्व संभाले रोजगार सेवक उनकी दिहाड़ी से कम मानदेय में गुजारा कर रहे हैं और भुगतान पाने में भी प्रधानों से लेकर अफसरों तक की मनमानी का उन्हें सामना करना पड़ रहा है।
रोजगार सेवकों को दो हजार रुपये मासिक मानदेय पर एक अप्रैल 2008 को नियुक्त किया गया था। सरकार की मंशा थी कि रोजगार सेवकों से गांव स्तर पर संचालित होने वाली रोजगारोन्मुखी योजनाओं की निगहबानी कराई जाए, जिससे कि भ्रष्टाचार की शिकायतें थमें और योजनाओं का प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन हो। नियमत: जिले की सभी 922 ग्राम पंचायतों में रोजगार सेवक नियुक्त होने थे, लेकिन विभिन्न कारणों से 125 पद तीन साल बाद भी रिक्त हैं।
अपवाद के तौर पर केवल भावलखेड़ा ब्लाक में रोजगार सेवकों की शत प्रतिशत नियुक्ति हो पाई। शेष प्रत्येक ब्लाक में दस से 12 पद रिक्त हैं, क्योंकि उन पर चयन नहीं हो पाया। उदाहरणार्थ, कांट ब्लाक में 54 रोजगार सेवक होने चाहिए, लेकिन नियुक्तियां केवल 44 हो सकीं। रोजगार सेवकों की मानें तो प्रधानों की अड़ंगेबाजी के कारण रिक्त पदों पर चयन का काम अटका है। इधर, जब से मनरेगा की मॉनीटरिंग का जिम्मा मिला है, रोजगार सेवक काफी कुंठित हो रहे हैं।
दरअसल, सरकार मनरेगा के जॉब कार्ड धारकों को 125 रुपये दिहाड़ी दे रही है, जबकि उनसे काम लेने वाले रोजगार सेवकों को मानदेय केवल एक सौ रुपये प्रतिदिन मिल रहा है। भुगतान पाने में भी रोजगार सेवकों को प्रधानों की कृपा दृष्टि पर निर्भर करना पड़ रहा है। मानदेय रोके जाने संबंधी कलान और कांट के कई प्रकरण रोजगार सेवक अफसरों के संज्ञान में ला चुके हैं, लेकिन उन पर कार्यवाही अभी तक नहीं हुई।


‘मुख्यमंत्री ने गत 14 अप्रैल को मानदेय बढ़ाने की घोषणा की, लेकिन उसका शासनादेश अभी तक नहीं आया है। मानदेय रोके जाने संबंधी प्रकरण अफसरोें के संज्ञान में लाए जा चुके हैं। मनरेगा से प्रधानों का वर्चस्व घटाने के लिए कई बार ज्ञापन देकर रोजगार सेवकों को वित्तीय अधिकार दिए जाने और मानदेय का भुगतान व्यक्तिगत खातों के माध्यम से कराने की मांग की जा चुकी है, लेकिन किसी स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई।’
-पिन्टू यादव, जिलाध्यक्ष, ग्राम रोजगार सेवक एसोसिएशन

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