शराब का पैग मिला तो सब कुछ भूल गया बिंद्रा

Shahjahanpur Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
मंदिर में खाई थी कसम कभी अपराध न करने की
0 गजरौला में चोरी के दौरान मिली मौत
0 घरवाले बोले, हंसा ने मरवा डाला
हरिओम त्रिवेदी
पुवायां। मंदिर में अपराध नहीं करने की कसम तोड़ने की कीमत बिंद्रा को जान देकर चुकानी पड़ी। चोरी के दौरान घिर जाने पर उसने युवक को गोली मारकर घायल किया, तो लोगों ने पीट-पीटकर उसकी जान ले ली।
आज सुबह गांव लक्ष्मनपुर गौटियां में रोज की तरह लोग अपने काम में व्यस्त थे। जब यह संवाददाता बिंद्रा के घर पहुंचा तो उसकी पत्नी मोहिनी अपने इंदिरा आवास के बाहर लगी टटिया की लिसाई कर रही थी। बिंद्रा के बारे में पूछने पर उसने बताया कि शाम को दारू पीने की बात कहकर घर से निकला था, तब से नहीं आया है। कहीं पीकर पड़ा होगा।
संवाददाता के गजरौला थाना क्षेत्र (पीलीभीत) में हुए घटनाक्रम की जानकारी देने पर पत्नी के अलावा भाई खड़ग सिंह और बच्चों को विश्वास नहीं हुआ। बोले, लगभग छह माह पूर्व जेल से छूटकर आने पर बिंद्रा ने मंदिर में कसम खाई थी कि आगे कोई अपराध नहीं करेगा। सिर्फ मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करेगा। दिन में भी वह मजदूरी पर गया था।
पत्नी के अनुसार बिंद्रा ने शाम को उससे कहा था कि पंजाब चलकर मजदूरी करेंगे और वहीं रहेंगे। उसके विरोध करने पर वह नाराज हो गया और दारू पीने चला गया। उसके बाद से उसका पता नहीं चला। पकड़े गए गांव के ही हंसराज के बारे में बताने पर उन लोगों ने कहा कि हंसराज ही उसे बुलाकर ले गया होगा।
घर के मुखिया की मौत की जानकारी के बाद भी उसके परिजनों के एक आंसू तक नहीं निकला। बिंद्रा के सात पुत्र-पुत्रियां, योगराज, नूरा, लाड़ली, रजनी, लवेदी, गंजा और गुड्डू, हैं। वह रजनी की शादी की तैयारियां कर रहा था। परिजनों का फोटो लेने की कोशिश पर सभी भड़क उठे और विरोध करते हुए घर के अंदर चले गए।


घर में नहीं घुसने दिया जाता था हंसा को
ढाई हजार का ईनामी भी रह चुका है आरोपी
अमर उजाला नेटवर्क
पुवायां। हंसराज उर्फ हंसा घर से बदर था। मतलब घर के लोग उसकी आपराधिक प्रवृत्ति से तंग थे और उसे घर नहीं आने देते थे।
हंसा काफी समय से आपराधिक घटनाओं में लिप्त था। दूसरे जनपदों की पुलिस अक्सर उसकी तलाश में छापा मारती रहती थी। पत्नी प्रेमवती ने उससे सुधरने को कहा, लेकिन रवैया नहीं बदलने पर उसने हंसा के घर आने पर पाबंदी लगा दी। हंसा का बड़ा पुत्र गुरमीत शादीशुदा है और परिवार सहित अलग रहता है। पत्नी चार छोटे पुत्र और एक पुत्री के साथ रहती है। प्रेमवती ने मजदूरी कर बच्चों की परवरिश करना शुरू कर दिया। तमाम परेशानियों के बाद भी उसने हंसा का सहारा नहीं लिया। कुछ दिन पूर्व उसने छोटी पुत्री की शादी गांव में ही तय कर दी। जानकारी मिलने पर हंसा घर पहुंचा और पत्नी से शादी में मदद की बात कही, लेकिन उसने हंसा को तुरंत घर से भगा दिया। हंसा ढाई हजार का ईनामी भी रह चुका है। उसे एनडीपीएस के एक मामले में छह माह की सजा और जुर्माना भी हो चुका है।



हंसराज ने बिंद्रा को उकसाया था
देवकली-बंडा। बीवी से विवाद होने के बाद बिंद्रा कच्ची शराब की जुगाड़ में गांव में ही एक घर में जा पहुंचा। वहीं गांव का हंसराज उर्फ हंसा कुछ अन्य लोगों के साथ शराब पी रहा था। हंसा ने बिंद्रा से मुफलिसी दूर करने की बात कहते हुए चोरी में शामिल होने को कहा। कसम खाने की बात कहने पर हंसा ने उसे लताड़ना शुरू कर दिया। मर्दानगी को ललकारे जाने पर बिंद्रा ताव खा गया और उसने चोरी के लिए हामी भर दी। हंसा ने ही उसे एक तमंचा मुहैया कराया और बाद में दोनों घटना को अंजाम देने चल दिए।

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