गहराता जा रहा बिजली का संकट, सपाई खामोश

Shahjahanpur Updated Sat, 05 May 2012 12:00 PM IST
सत्ता में आने पर भूल बैठे हैं 24 घंटे सप्लाई की बात
- पिछले साल मई तक रोजा पॉवर प्रोजेक्ट की केवल तीन यूनिटें थीं कार्यरत
- सप्लाई के लिहाज से पिछले साल के हालात मौजूदा दौर से बेहतर थे
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। बिजली का संकट कम होने के बजाय लगातार गहराता जा रहा है। पॉवर कारपोरेशन के सिस्टम कंट्रोल से घोषित दो चरणों में छह घंटे की रोस्टरिंग के अलावा कभी लाइन फाल्ट, तो कभी सब स्टेशनों को ओवरलोडिंग से बचाने के बहाने शहर की बिजली घंटों गुल रहना आम बात हो गई है, लेकिन सूबे की सत्ता मिलने के बाद सपा से जुड़े सारे नेता और कार्यकर्ता बिजली संकट को लेकर खामोशी ओढ़े बैठे हैं। पिछले साल इन्हीं दिनों रोजा पॉवर प्रोजेक्ट से 24 घंटे बिजली सप्लाई की डिमांड को लेकर आए दिन धरना-प्रदर्शन करने वाले सपाई अब सत्ता पक्ष की मर्यादाओें का हवाला देकर तमाशबीन बने हुए हैं।
खास यह है कि पिछले साल मई तक रोजा पॉवर प्रोजेक्ट की केवल तीन यूनिटों से 900 मेगावाट का उत्पादन हो रहा था। उन दिनों पॉवर कारपोरेशन का ट्रांसमिशन विंग इस लायक नहीं हो पाया था कि रोजा परियोजना की सारी बिजली नार्थ ग्रिड को सप्लाई हो सके। नतीजे में पारेषण खंड के पास तापीय परियोजना की जो बिजली शेष बचती थी, वह वितरण खंड के शहरी नेटवर्क पर डाली जाती थी।
यही वजह थी कि उन दिनों शहर को रोजाना 18 से 20 घंटे सप्लाई मिल रही थी। पॉवर कारपोरेशन के तत्कालीन डीजीएम जियालाल जैन ने ट्रांसमिशन विंग की कमजोरी को छिपाने की गरज से यह कहने में भी कोई संकोच नहीं किया कि सिस्टम कंट्रोल ने शहर को कटौती मुक्त घोषित कर दिया है, जबकि ऐसे कोई आदेश तब नहीं आए थे। तात्पर्य यह कि बिजली सप्लाई के लिहाज से पिछले साल के हालात मौजूदा दौर से बेहतर थे।
इसके बावजूद उन दिनों विरोधी दल में शुमार सपा नेताओं ने तमाम कार्यकर्ताओं के साथ 24 घंटे बिजली की मांग को लेकर कई बार प्रदर्शन किए। ऐसे भी मौके आए जब सपा केप्रांतीय नेतृत्व ने महंगाई को मुद्दा बनाया, लेकिन स्थानीय इकाई ने उसे 24 घंटे बिजली की डिमांड में बदलकर विभागीय अभियंताओं की नाक में दम कर दिया। अब बिजली सप्लाई दयनीय हालत में है, लेकिन सपा खेमा खामोशी तोड़ने को तैयार नहीं है। अपवाद के तौर पर सिर्फ बयानबाजी हो रही है और वह भी केवल अफसरों को अपनी मानसिकता बदलने की चेतावनी देने तक सीमित है।

जो पहले तेवर थे, वही अब हैं
‘बिजली संकट पर सपा के लोग जनता के साथ हैं। इस मुद्दे पर जो तेवर पहले थे, वही आज भी हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि तब अपोजीशन में था और अब सत्ता की मर्यादाओं का ध्यान रखना पड़ रहा है। कटौती समाप्त कराने को मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। दरअसल, निजाम बदलने के बावजूद कुछ अधिकारी अपनी मानसिकता नहीं बदल रहे। ऐसे अफसरों की लखनऊ जाकर शिकायत करूंगा।’
-तनवीर खां, नगर अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी


ट्रांसमिशन विंग के फाल्ट बाधक
‘रोजा पॉवर प्रोजेक्ट से शहर को बिजली सप्लाई देने के बारे में अंतिम निर्णय लेने में ऊर्जा मंत्रालय ही सक्षम है। अक्सर ट्रांसमिशन विंग के फाल्ट भी सप्लाई में बाधक बन रहे हैं। आज पैना के 220 केवी सब स्टेशन पर 160 एमवीए के ट्रांसफार्मर में हुआ ब्रेक डाउन इसका उदाहरण है जिसकी वजह से दिन में करीब दो-तीन घंटे सप्लाई बाधित हुई।’
-आरएन सिंह, अधिशासी अभियंता (शहर), पॉवर कारपोरेशन

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