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डीपीआरओ ने जांच से मना किया, कमिश्नर के पास पहुंची शिकायत

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 20 Nov 2019 12:12 AM IST
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डीपीआरओ ने जांच से मना किया, कमिश्नर के पास पहुंची शिकायत
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मंडलायुक्त के निर्देश पर डीएम ने सीडीओ को सौंपी जांच
बगैर कार्य कराए ही प्रधान,सचिव पर भुगतान कराने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। सेमरियावां ब्लॉक के मुसरद गांव में फर्जी तरीके से बगैर कार्य कराए ही भुगतान किए जाने का आरोप लगाते हुए कमिश्नर से शिकायत की है। मंडलायुक्त के निर्देश पर डीएम ने सीडीओ को मामले की जांच का निर्देश दिया है। शिकायत का आरोप है गांव के एक शख्स ने इस संबंध में जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत की थी। जिससे डीपीआरओ ने खारिज कर दिया। कमिश्नर ने जांच कराकर कार्रवाई के लिए 15 दिन का समय दिया है।
मुसरद गांव निवासी हरिशंकर पटेल का आरोप है कि उनकी ग्राम पंचायत में प्रधान, सचिव और एडीओ पंचायत द्वारा चौदहवें वित्त एवं राज्य वित्त से प्राप्त धनराशि का फर्जी तरीके से निकासी करके बंदरबांट कर ली गई। ग्राम पंचायत में कहीं पुराने कार्य को दिखाकर भुगतान करा लिया गया है। इसके साथ कहीं-कहीं थोड़ा मरम्मत कार्य करवा कर नव निर्माण कार्य दिखाकर रकम निकाल ली गई है। इसकी शिकायत की गई थी, लेकिन डीपीआरओ जांच करने से कतरा गए।

गांव के ही अमित चौधरी ने भी शपथ पत्र के साथ जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत की थी। डीपीआरओ ने यह कह कर शिकायत को खारिज कर दिया कि कि शपथ पत्र संलग्न नहीं है। आरोप है कि त्रिभुवन के घर से पेडरहिया गडही तक नाली मरम्मत कार्य, आंगनबाड़ी केंद्र के कुर्सी, मेज पर भुगतान समेत सड़क/नाली की मरम्मत, निर्माण, पथ प्रकाश कार्य, शिवमंदिर के चारों तरफ खड़ंजा निर्माण की उच्च स्तरीय तकनीकी टीम गठित कर जांच की जाए। मंडलायुक्त बस्ती ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच कराए जाने का डीएम को निर्देश दिया है। सीडीओ बब्बन उपाध्याय ने बताया कि शिकायत गंभीर है। इसकी जांच कमेटी गठित की जाएगी। जांच में यदि शिकायत सही मिलेगी तो कार्रवाई होगी।
जो काम हुआ, उसी का भुगतान हुआ : प्रधान
मुसरद गांव के प्रधान चंद्रशेखर शर्मा ने बताया कि जो काम हुआ है, उसी का भुगतान हुआ है। शिकायत कर्ता हरिशंकर पटेल के चचेरे भाई अमित चौधरी ने प्रधान पद का चुनाव लड़ा था और हार गए थे। उसी रंजिश में लोग फर्जी शिकायत कर रहे हैं। यदि जांच होगी तो सच्चाई सामने आ जाएगी।
आरोप बेबुनियाद : डीपीआरओ
डीपीआरओ आलोक कुमार प्रियदर्शी ने बताया कि यह प्रकरण संज्ञान में नहीं है। यदि कोई शपथ पत्र के साथ शिकायत करें तो उसकी जांच अवश्य होगी। उनके ऊपर लगाए गए आरोप बेबुनियाद है।
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