दो घंटे तक कराहती रही प्रसव पीड़ित

Sant kabir nagar Updated Wed, 27 Nov 2013 05:41 AM IST
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हैंसर। प्रदेश सरकार के चिकित्सा स्वाथ्य राज्य मंत्री शंखलाल मांझी के गृह क्षेत्र में स्थित सीएचसी मलौली की चिकित्सा व्यवस्था का बुरा हाल है। दो घंटे तक अस्पताल परिसर में प्रसव पीड़ित महिला दर्द से कराहती रही। डॉक्टर ने उसे जैसे ही देखा, वैसे ही खलीलाबाद अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। फार्मासिस्ट की जगह अनुचर दवा घर से मरीजों को दवाएं वितरित कर रहा था। दो माह से बुखार से पीड़ित मरीज अस्पताल पहुंच कर दवा काम नहीं करने की शिकायत करते फिर रहे थे। प्रस्तुत है अमर उजाला की एक आंखों देखी रिपोर्ट।
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सुबह 10:30 बजे
अस्पताल के मुख्य द्वार पर एक महिला अचेत हालत में पड़ी थी। उसके बगल में बैठी एक महिला उसे ढांढस बंधा रही थी। बगल में खड़ा पीड़ित महिला का भाई शादिक अली ने बताया कि उसकी बहन शकिना खातून रात से प्रसव पीड़ा से परेशान है। सुबह आठ बजे अस्पताल लेकर आए हैं। दो घंटे तक इंतजार के बाद 10 बजे महिला डॉक्टर ने सही ढंग से देखा भी नही और तुरंत सदर अस्पताल खलीलाबाद के लिए रेफर कर दिया। शादिक अस्पताल गेट पर पीड़ा से तड़प रही बहन को लेकर 108 नबंर गाड़ी का इंतजार कर रहा था।
दिन के 11:00 बजे
डॉक्टर नूर आलम आते हैं और ओपीडी में जाकर बैठ जाते है। 11:15 बजे बस्ती जिले के कुदरहा की रहने वाली शिवकुमारी अस्पताल पर पहुंची। वह बताती है कि दो माह से बुखार से पीड़ित है। वह पर्ची लेकर डॉक्टर नूर आलम के पास जाकर दवा लिखाने के बाद दवा के लिए लाइन में खड़ी हो जाती है। दवा घर से फर्मासिस्ट रामसुंदर नहीं थे। उनके स्थान पर बैठकर अनुचर रणजीत यादव मरीजाें से पर्ची लेकर दवा दे रहा था।
दोपहर 12:00 बजे
अब तक कुल 111 मरीज पंजीकृत हो चुके थे। धीरे धीरे मरीजों की संख्या बढ़ रही थी। 12.20 बजे भैसाखुट गंाव की प्रमिला और मेनका पर्ची लेकर डॉक्टर शैलेन्द्र चौधरी के कक्ष में पहुंचती है और शिकायती लहजे में कहती है कि कौन सी दवा दे रहे हैं, दो महीने से बुखार नही छोड़ रहा है। डॉक्टर उन्हें समझाते हैं। इसके बाद पर्ची पर दवा लिख देते हैं।
दोपहर 12.50 बजे
एक्स-रे कक्ष बंद था। गागरगाड़ गांव के रामप्रीत का एक्स-रे कराने के लिए उनके परिजन सुबाष लेकर आए थे। एक्स-रे कक्ष बंद रहने पर पूछते हैं तो अस्पताल का एक कर्मचारी बताता है कि बाबू साहब धनघटा गए हैं।
दोपहर 01. 25 बजे
190 मरीजाें का पंजीकरण हो चुका था। डॉक्टराें के चैंबर में मरीजाें की भीड़ जुट गई थी। सुशीला, पार्वती, राजदेव, बनारसी, प्रमोद आदि मरीजाें का कहना था कि सर्दी, जुखाम, पेटदर्द से परेशान है अस्पताल पर आने पर सरकारी दवा मिलती है, जो काम ही नही कर रही है।
दोपहर 01.45 बजे
इस समय तक अधीक्षक अस्पताल नहीं थे। पूछने पर पता चला कि अधीक्षक बीएन चतुर्वेदी बस्ती गए हैं और डॉक्टर अनिल छुट्टी पर है। कंपाउंडर की जगह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दवा वितरित कर रहा है। प्रसव पीड़ित महिला को सही से देखने के बजाए रेफर कर दिया गया। वहां मौजूद चिकित्सक ने प्रभारी चिकित्साधिकारी से बात करने की बात कह टाल दिया।
इनसेट
प्रसव पीड़ित महिला को सही तरीके से टेकअप न करने की बात गंभीर है। यदि फार्मासिस्ट गायब थे और अनुचर दवाएं वितरित कर रहा था तो भी ठीक नहीं है। अस्पताल में जो भी गड़बड़ी है उसे दूर कराया जाएगा। प्रकरण की जांच कराएंगे, जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-डॉक्टर बद्री विशाल सीएमओ।

मरीजों के इलाज में लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मरीजाें का इलाज करने और उन्हें सरकारी दवा देने में आनाकानी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यदि प्रसव पीड़ा से पीड़ित महिला सहित किसी भी मरीज का ईलाज करने में लापरवाही बरती गई है तो मामला बेहद गंभीर है। इसकी जांच कराए जाने का निर्देश सीएमओ को देंगे और जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
शंखलाल मांझी, चिकित्सा परिवार एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री।
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