मदद मिले तो सुतली उद्योग में आए रौनक

Sant kabir nagar Updated Sun, 23 Dec 2012 05:30 AM IST
धनघटा। कभी घरों में रंग-बिरंगी चारपाइयां आंगन की शोभा हुआ करती थीं। शादी-ब्याह में इनको लेकर एक विशेष प्रकार उत्साह हुआ करता था। मगर समय ने उत्साह का रंग-रूप बदल दिया। जिसके चलते संतकबीरनगर जनपद के दक्षिणांचल में स्थित द्वाबा क्षेत्र के बंडा बाजार के सुतली ने अपनी पहचान खो दी। किसान, कारीगर और उद्योग को चलाने वाले इस धंधे को छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर गए। ताकि रोजी-रोटी चला सकें। बंडा का सुतली उद्योग गोरखपुर और बस्ती मंडल में गृह उद्योग के रूप में प्रथम स्थान पर माना जाता था।
तहसील मुख्यालय धनघटा के उत्तर धनघटा खलीलाबाद मार्ग पर बंडा बाजार को ग्राम पंचायत व न्याय पंचायत का दर्जा मिल चुका है। व्यापारियों की सुविधा के लिए कोआपरेटिव बैंक की सुविधा सरकार ने दी थी। परन्तु अब बाजार में सुतली की मांग नहीं रही। जिससे इस व्यवसाय की रौनक फीकी हो गई। धनघटा क्षेत्र के बंडा बाजार में प्रत्येक रविवार और बृहस्पतिवार को एक दिन पूर्व ही गोरखपुर, बस्ती, महराजगंज, अयोध्या, फैजाबाद, आजमगढ़, मऊ, अंबेडकर नगर की सीमा वाले छोटे-बड़े बाजारों और शहरों से व्यापारी सुतली खरीदने आते थे। पूरी रात सुतली की खरीददारी कर वाहन से ले जाते थे। किसानों को उनके उपज का सही नकद मूल्य व कारीगरों को उनकी सुतली बनाने की मजदूरी तुरंत मिल जाती थी। जिससे वह भी कामों के प्रति रुचि रख कर खुशहाल जीवन बिताते थे। सुतली को रंग-बिरंगा रूप देकर शादी-ब्याह में चारपाई व पलंग बनाकर दहेज या घर के उपयोग में लाते थे। रंग-बिरंगी सुतली की चारपाई लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र रहती थी।
मगर, इधर एक दशक से प्लास्टिक के उपयोग व उसके बढ़ते प्रचलन के कारण सुतली के भाव पर ग्रहण लग गया। सुतली की पूछ कम होने लगी। कुछ ही समय में बाजार भाव इतना गिर गया कि मजदूरी के लाले पड़ने लगे। कारीगर कारोबार को छोड़कर शहरों की तरफ पलायन कर गए। अब कुछ ही लोग मजबूरी में इस काम में लगे हैं। पेशे में लगे बंडा बाजार के राम चन्द्र चौधरी, महबूब, रामआसरे चौधरी, सेराज, विश्वनाथ चौधरी, बनवारी लाल, शफीक अहमद आदि ने बताया कि इस कार्य को पैतृक धंधा मान कर करने लगे थे। परंतु मेहनत और मजदूरी के हिसाब से कमाई नहीं रह गई। रोटी खाना भी मुश्किल हो गया है। मजबूरी में इसको कर रहे हैं। सरकार उद्योग को बढ़ावा नहीं दे रही। जिसके कारण पैतृक रोजगार बंद सा हो गया है। उप जिलाधिकारी विजय शंकर चौधरी का कहना है कि मांग कम होने के कारण सुतली व्यवसाय पर असर पड़ा हैं। फिर भी अगर पहल किया गया तो अच्छा परिणाम निकल सकता है।

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