चुनाव में किए वादे पर नहीं हुआ अमल

Sant kabir nagar Updated Sun, 09 Dec 2012 05:30 AM IST
संतकबीरनगर। चालू पेराई सत्र के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री ने गन्ने के राज्य परामर्शी मूल्य की घोषणा की। जिसके तहत 40 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। इस मूल्य वृद्धि पर अधिकांश किसानों का कहना है कि सपा ने चुनावी वादे के मुताबिक गन्ने का मूल्य नहीं बढ़ाया। अलबत्ता, विगत तीन सालों में यहां खाद, बीज, सिंचाई के मूल्य में लगातार बढ़ोतरी हुई हैं। वहीं जुताई और मजदूरी भी तेज हो गई है। कम से कम 100 रुपये की वृद्धि होनी चाहिए थी। प्रस्तुत है किसानों से बातचीत के प्रमुख अंश-

कोई खास फायदा नहीं
खलीलाबाद ब्लाक के गरथवलिया निवासी राजाराम चौधरी का कहना है कि सरकार ने पेराई सत्र शुरू होने के दो महीने बाद गन्ना मूल्य घोषित कर किसानों के करोड़ों रुपये का नुकसान कर दिया है। समय से एसएपी घोषित न होने से जरूरतमंद किसानों ने औने-पौने पर दामों में गन्ना कोल्हू और क्रेशर मिलों को बेच दिया। ऐसे में किसानों की भरपाई नहीं हो पाएगी। वैसे भी सरकार के 40 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य बढ़ाकर देने से किसानों को कोई खास फायदा नहीं होगा। लागत के मुताबिक नए रेट पर भी किसानोें को 50 प्रतिशत का भी लाभ नहीं मिलेगा।

380 रुपये प्रति क्विंटल पर होती भरपाई
बस्तीदेवां निवासी योगेंद्र चौधरी का कहना है कि सरकार का यह फैसला न तो ज्यादा खुशी देने वाला है और न ही गम। सरकार गन्ने का कम से कम 380 रुपये प्रति क्विंटल का दर निर्धारित करे, तब जाकर किसानों की भरपाई हो पाएगी। उन्होंने बताया कि खाद, डीजल, मजदूरी, छिड़काव वाली दवाओं और जुताई के दाम इतने अधिक हैं कि उस दाम के हिसाब से यह नाकाफी है। मगर, 240 रुपये प्रति क्विंटल से तो थोड़ा बेहतर है।

50 प्रतिशत का भी नहीं मिलेगा लाभ
रीवाखोर निवासी राजेंद्र प्रसाद चौरसिया ने बताया कि गन्ने को तत्कालिक लाभ की फसल माना जाता है। इससे मिले धन से ही घर के बड़े काम-काज किसान पूरे करते हैं। इसलिए सरकार को गन्ना मूल्य कम से कम 350 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करे। उन्होंने कहा कि एक मानक के मुताबिक यदि गन्ने की बुआई एक एकड़ में की जाती है तो उस पर लागत कम से कम 30,000 से 35,000 पड़ जाता है। जबकि कुल उत्पादन 180 क्विंटल ही होता है। ऐसे में 280 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से किसानों को 50 से 51 हजार रुपये ही मिलेगा। यह 50 प्रतिशत के भी बराबर नहीं है।

महंगाई के हिसाब से निर्धारित हो गन्ने का मूल्य
मथुरापुर निवासी उमाशंकर चौधरी और गरथवलिया निवासी दिनेश कुमार चौधरी ने संयुक्त रुप से कहा कि यूपी सरकार ने कम से कम प्रति क्विंटल गन्ने के पीछे 350 रुपये दिलाने का भरोसा दिया था लेकिन महज 40 रुपये की ही वृद्धि की। जबकि महंगाई, तेल के दाम और खाद-बीज व मजदूरी काफी दूना है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार गन्ना किसानों को 350 रुपये प्रति क्विंटल दें, तब इसकी भरपाई हो पाएगी। इनायतपुर निवासी वीरेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि हम सरकार के फैसले से 25 प्रतिशत सहमत हैं। उन्होंने कहा कि कम से कम सरकार इसी हिसाब से महंगाई का भी दर घटा दें। ताकि किसानों को इसका फायदा हो सके।

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