जनता टेक्सटाइल्स की बैंक ने तोड़ी कमर

Sant kabir nagar Updated Thu, 06 Dec 2012 05:30 AM IST
संतकबीरनगर। कभी लुंगी, धोती, चादर व अंगोछा के लिए पूरे प्रदेश में धाक जमाने वाली जनता टेक्सटाइल्स कंपनी की शाखा बंद हो गई। हालांकि इस कंपनी के पुनरुद्धार के लिए कोर्ट, प्रशासन और जिला उद्योग केंद्र ने काफी प्रयास किया लेकिन एसबीआई से कोई मदद नहीं मिली। नतीजतन कंपनी अब जीर्णशीर्ण हो चुकी है और इसके भविष्य में भी संवरने की अब कोई आस नहीं दिख रही है। 994 में ही बंद हो चुकी इस फैक्ट्री में उस दौरान दो सौ लोग कार्यरत थे। बैंक का कहना है कि वह इस मामले से बिल्कुल अनजान है।
जिले में जनता टेक्सटाइल्स की स्थापना वर्ष 1986-87 में हुई थी। उत्पादन का काम वर्ष 1988 में शुरू किया गया लेकिन 16 दिसंबर 1994 को इकाई को बीमार घोषित कर दिया गया। कंपनी को चलाने ने के लिए जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी) ने पांच लाख रुपये मार्जिन मनी लोन इकाई को यूपीएफसी और एसबीआई के स्तर से दिए गए पुनर्वासन पैकेज के लिए दिया। परंतु एसबीआई ने कार्यशील पूंजी नहीं दिया। हालांकि फिर डीआईसी एवं यूपीएफसी ने बैंक से पुनर्वासन के लिए प्रयास किया। वस्तुत: बैंक ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।
इसी बीच इकाई के प्रोपराइटर सिंहासन यादव ने एक याचिका न्यायालय सिविल जज सीनियर डिविजन गोरखपुर में एसबीआई बनाम जनता टेक्सटाइल के नाम से दाखिल किया। इस पर कोर्ट ने भी बैंकों को निर्देश देते हुए सुविधा उपलब्ध कराने को कहा। बैंक ने कोर्ट के आदेश की भी अनदेखी कर दी। ऐसे में वर्ष 1994 से ही यह इकाई पूर्णत: बंद हो गई। तब से आज तक यह इकाई बंद ही चल रही है।
मुझे जानकारी नहीं: मैनेजर
एसबीआई खलीलाबाद के मुख्य शाखा प्रबंधक संतोष कुमार जाटव का कहना है कि मैंने अभी हाल ही में यहां का चार्ज लिया है। मुझे इस कंपनी के ऋण की डिमांड के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। अलबत्ता, कुछ दिन पहले डीएम कार्यालय से एक बैठक में शामिल होने का आदेश मिला था। किंतु वह आदेश बैठक के शुरू होने से आधा घंटा पहले मिला था। इसलिए उसमें भी शामिल नहीं हो सका। जहां तक कंपनी को ऋण देेने की बात है तो उच्चाधिकारियों से उचित परामर्श मांगा जाएगा।
कोट
महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र के प्रयास एवं जिलाधिकारी के निर्देशन में इस कंपनी को चलाने के लिए मामला उद्योग बंधु ने उचित निर्णय के लिए प्रस्तुत किया गया लेकिन बैंक ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। ऐसे में अब कंपनी पूरी तरह जीर्णशीर्ण हो चुकी है।
एससी उपाध्याय, उप महाप्रबंधक, डीआईसी
कोट
उत्पादन को बढ़ाने के लिए 25 लाख रुपये का बैंक से ऋ ण मांगा गया लेकिन ऋण नहीं मिला। लिहाजा, कंपनी को बंद करना पड़ा। उन्होंने बताया कि कंपनी में करीब दो सौ लोग कार्यरत थे। जिनकी रोजी-रोटी इसी से चलती थी।
सिंहासन यादव, प्रोपराइटर जनता टेक्सटाइल्स

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