भगवान नाम के स्मरण से होगा उद्धार

Sant kabir nagar Updated Thu, 08 Nov 2012 12:00 PM IST
संतकबीरनगर। श्रीमद्भागवत भगवान का विग्रह है, जिसके अध्ययन, श्रवण, मनन और चिंतन से लोक-परलोक दोनों सुधरते हैं। कथा का सार यह है कि इस कलिकाल में जीव का उद्धार भगवान के नाम का स्मरण करने से होगा। यह विचार श्रीमद्भागवत सप्ताह महायज्ञ के अंतिम दिन वृंदावन के संत कथा व्यास देवकी नंदन ठाकुर ने व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बिना दक्षिणा यज्ञ पूरा नहीं होता हमें भी भागवत कथा की दो संकल्प दक्षिणा चाहिए पहली दक्षिणा -आज से किसी की बुराई न करना और दूसरी-अपने देश, धर्म के लिए जान भी देनी पडे़ तो तैयार रहेंगे।
कथा व्यास ने कहा कि तीनों तापों का नाश करने वालेे विश्व की उत्पत्ति के कारण सच्च्दिानंद स्वरूप परमात्मा का नमन करते हुए कथा का समापन करते हैं। भागवत के 12 स्कंध, 335 अध्याय, 18 हजार श्लोकों में व्यास जी ने भागवत पुरुषों के आख्यान औरभगवान के सभी अवतारों का वर्णन किया है। शुकदेव जी महाराज ने श्रीकृष्ण के विवाह की कथा सुनाते हुए बताया कि योगेश्वर कृष्ण कामजित हैं, उन्होंने 16108 विवाह किए। पर ये वे कन्याएं थीं जिन्हें एक राजा ने कैद कर रखा था।श्रीकृष्ण ने उन्हें छुड़ाया तो वे रो पड़ीं। हमें अपनाएगा कौन? हमारे लिए तो आत्महत्या ही एक मात्र विकल्प है। भगवन ने उन्हें पत्नी का दर्जा देकर उनकी जीवन रक्षा का उद्धार किया। कथा व्यास ठाकुर जी ने महादानी नृग की कथा सुनाई। जिसने दान की गई अपनी एक गाय दुबारा दान कर दी, जिससे वह गिरगिट बन गया था। भगवान ने उसका स्पर्श कर उद्धार किया। कृष्ण -सुदामा की कथा सुनाते हुए ठाकुर जी ने कहा कि बचपन में श्रीकृष्ण का हिस्सा चना खाने से सुदामा दरिद्र हो गए, परंतु जब कृष्ण तो दो मुट्ठी तंदुल जाकर खिलाया तो फिर संपन्न हो गए। जीवन में सुख चाहने वाले को किसी का हिस्सा नहीं लेना चाहिए। ठाकुर जी ने जूठा भोजन न करने, आहार की शुद्धि से विचार की शुद्धि और सबसे निश्छल और पवित्र व्यवहार करने की प्रेरणा दी। संत ठाकुर जी ने कहा कि राजा को अपनी प्रजा को अपने कुटुंब केसमान समझना चाहिए। जब हम वोट के बदले नोट और शराब लेंगे तो सही जनप्रतिनिधि कैसे पाएंगे? अत: भ्रष्टाचार मिटाने की इच्छा हो तो अपने में सुधार करें। कथा व्यास ने कहा कि बाद में जब यदुवंशियाें ने साधुसंताें का अपमान किया तो उन्हें भी दंड भोगना पड़ा। श्रीकृष्ण के परम धाम जाने के बाद बलराम जी भी अपने धाम में चले गए। अंत में कथा व्यास को लोगों के प्रति आभार जताया। कथा के दौरान अनेक बार कीर्तन भजन के साथ ही उत्साही भक्त तालियां बजाते हुए नृत्य करने लगे। इस अवसर पर उपेंद्र त्रिपाठी, राजलक्ष्मी त्रिपाठी, राधेश्याम पांडेय, जयराम पांडेय, आशीष छापड़िया, जगन्नाथ छापड़िया, कुंज बिहारी रुंगटा, शरद पोद्दार, गोपाल रुंगटा निरंजन लोहिया समेत अन्य उपस्थित रहे।
इनसेट
कथा व्यास के अनमोल वचन
सुख चाहते हो तो मता-पिता गुरु और बड़ाें का सम्मान करें।
साधु-संतोें की परीक्षा और उनसे अनुचित व्यवहार ने करें।
देश और धर्म रक्षा के लिए प्राण भी न्यौछावर हो, तो यह धर्म है।
आहार शुद्धि से मन और विचारों की शुद्धि होती है।
राजा को प्रजा का पालन पुत्रवत करना चाहिए।

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