जिला अस्पताल में मिली लावारिस पड़ी दवाएं

Sant kabir nagar Updated Mon, 08 Oct 2012 12:00 PM IST
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल परिसर में स्थित गैराज में डीएम को काफी संख्या में एक्सपायरी डेट की दवाएं मिलीं। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने प्रकरण की जांच कराए जाने की बात कही है।
जिला अस्पताल परिसर में स्थित ब्लड बैंक में रविवार को आयोजित रक्तदान शिविर का उद्घाटन करने डीएम राजेश कुमार गए हुए थे। शिविर के उद्घाटन के बाद वह इंसेफेलाइटिस पीड़ितों के मरीजों के लिए बनाए गए आईसीयू वार्ड का निरीक्षण करने लगे। उसी दौरान किसी ने डीएम को सूचित कर दिया कि अस्पताल परिसर में स्थित गैराज के अंदर काफी संख्या में दवाएं फेंकी गईं हैं। डीएम ने सूचना को गंभीरता से लेते हुए गैराज में पहुंचकर जांच की। जांच के दौरान एक्सपायरी तिथि की काफी संख्या में दवाएं एक जगह रखी मिली। इतनी संख्या में दवाओं को देखकर डीएम भी चकित रह गए और मामले को गंभीरता से लिया। मौजूद डाक्टर वाईपी सिंह से इस बारे में पूछताछ की। संतोषजनक जवाब न मिलने पर प्रकरण की जांच कराने की बात कही। डीएम ने सूचना देकर तहसीलदार को मौके पर बुला लिया और बरामद दवाओं को सीज करा दिया।

कमेंट
मामला सीएचसी खलीलाबाद का है। दवा फेंके जाने की कोई जानकारी नहीं है। मैं बाहर हूूं। प्रकरण की जांच होगी। जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
डाक्टर बद्री विशाल, सीएमओ

सख्त कार्रवाई की मांग
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के जिलाध्यक्ष अमित जैन का कहना है कि अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही का सूचक है गैरेज में लावारिस दवाओं का मिलना। सबसे बड़ी बात यह है कि सीएमओ के आवास के बगल में ही गैराज में दवाइयां फेंकी गई थी और सीएमओ को पता तक नहीं था। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करा कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

सीएमओ से मांगेगे जवाब : डीएम
डीएम राजेश कुमार ने बताया कि गैराज में दवाओं का फेंका जाना बेहद गंभीर है। इस मामले की जांच टीम गठित कर कराई जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले चिकित्साकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस बारे में सीएमओ से भी जवाब-तलब किया जाएगा।

पूर्व में मगहर में मिली थीं दवाइयां
लावारिस हालात में दवाइयों के मिलने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इसके पूर्व में मगहर पुलिस चौकी के पास भारी मात्रा में दवाएं फेंकी मिली थी। प्रकरण की जांच हुई तो उसमें दो बाबू और सीएमओ परिवार कल्याण दोषी पाए गए थे। दोनों बाबुओं को उस पटल से हटा दिया गया था। जबकि सीएमओ परिवार कल्याण के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। सवाल यह है कि यदि ऐसे प्रकरणों को गंभीरता से लिया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो तो शायद ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो।


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