बेटे और बेटी के साथ दुष्कर्म के आरोप में पूर्व बीडीसी सदस्य गिरफ्तार

Sant kabir nagar Updated Sat, 06 Oct 2012 12:00 PM IST
हैंसर/संतकबीरनगर। धनघटा थाना क्षेत्र के बरांव गांव निवासी एक पूर्व बीडीसी सदस्य ने अपने ही बेटे और बेटी के साथ दुष्कर्म किया। उसकी पत्नी ने बृहस्पतिवार को पुलिस उच्चाधिकारियों से इस बारे में शिकायत की। जांच में मामला सही पाए जाने पर शुक्रवार को पुलिस ने पूर्व बीडीसी को गिरफ्तार कर लिया।
बरांव गांव निवासी एक पूर्व बीडीसी सदस्य की पत्नी ने आरोप लगाया है कि उसका पति हिस्ट्रीशीटर है और नशे का आदी है। उसका पति उसे पिछले कई वर्षों से प्रताड़ित कर रहा है। आरोप है कि उसके पति का आचरण भी ठीक नहीं है। असलहे के बल पर अपने ही सगे 16 वर्षीय बेटे और 13 वर्षीया बेटी के साथ पिछले डेढ़ साल से दुष्कर्म करता चला आ रहा है। विरोध करने पर मारता-पीटता है और जानमाल की धमकी देता है। लोक लाज के डर से उसने मामले को दबाने का प्रयास किया। बेटे और बेटी को जान से मारने की धमकी देकर रात में कमरे में बुलाकर पति गलत काम करता है। प्रताड़ना से तंग आकर महिला ने बृहस्पतिवार को एएसपी को तहरीर दी। एएसपी कृपाशंकर ने एसओ को तत्काल मामले की जांच करके कार्रवाई का निर्देश दिया। एएसपी के निर्देश पर एसओ ने मौके पर जाकर मामले की तहकीकात की। एसओ वीके पांडेय ने बताया कि जांच में मामला सही पाया गया। सगे बेटे और बेटी के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी पिता के खिलाफ दुष्कर्म, अप्राकृतिक दुष्कर्म और जानमाल की धमकी का मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। पीड़ित किशोरी और किशोर का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा। एसओ ने बताया कि आरोपी को जेल भेजा जाएगा।

दास्तान सुनकर पुलिस वालों के रोंगटे खड़े हो गए
हैंसर/संतकबीरनगर। मानवता को कलंकित कर देने वाली इस घटना को सुनकर पुलिस वालों के भी रोंगटे खड़े हो गए। उसकी पत्नी, बेटा और बेटी शर्म से मरी जा रहीं थीं। इसी लाज को बचाए रखने के लिए लंबे समय से पूर्व बीडीसी सदस्य की गंदी हरकतों को बर्दाश्त कर रहे थे।
धनघटा थाना क्षेत्र के बरांव गांव निवासी पूर्व बीडीसी सदस्य की पत्नी ने अपने पति पर मानवता को शर्मसार कर देने वाला आरोप लगाया है। पति की क्रूरता की कहानी सुनाते वक्त उसकी आंखें भर आईं। रोते हुए कह रही थी कि उसका पति डेढ़ साल से बेटे के साथ गलत काम कर रहा था। बेटे ने जब मां से आपबीती सुनाई तो उसने पति को समझाने और डराने का काफी प्रयास किया। आदत में सुधार लाने की बजाए वह उसकी भी पिटाई करने लगा। इसके साथ ही बेटी के साथ भी दुष्कर्म करना शुरू कर दिया। लोक लाज के डर से वह बार-बार खुद को कार्रवाई करने से रोकती रही, लेकिन पति की आदत में सुधार नहीं आया। 16 वर्षीय पीड़ित बेटे और 13 वर्षीया बेटी के चेहरे पर शर्म और पीड़ा देखकर कोई भी उनके दुख का अंदाजा लगा सकता था। रोते हुए भाई-बहनों ने कहा कि उनके पिता असलहे के बल पर उनके साथ गलत काम करते थे। विरोध करने पर मारते-पीटते थे। पढ़ाई-लिखाई बंद करा देने और कपड़ा, भोजन न देने की धमकी देते थे। बेेटा-बेटी ने पिता की कारगुजारी सुनाई तो पुलिस वालों के भी रोंगटे खडे़ हो गए। पूर्व बीडीसी सदस्य की पत्नी ने कहा कि जब सहने की शक्ति खत्म हो गई तो मामले को पुलिस तक पहुंचाया। अब आरोपी सलाखों के पीछे है। धनघटा क्षेत्र में भी शुक्रवार को कुकर्मी पिता की थू-थू हो रही थी।

गलत लत कुकृत्य की ओर धकेलती है
संतकबीरनगर। मनोवैज्ञानिक डॉक्टर रामानंद शुक्ल ने कहा कि मनुष्य जब पारिवारिक और सामाजिक स्तर पर असंतुष्ट रहता है तो उसके मन में कुविचार जागृत होते हैं। धनघटा क्षेत्र की घटना वाकई शर्मसार करने वाली है। गलत लत भी कुकृत्य की तरफ मनुष्य को धकेलती है। इसीलिए लोग नशे और गलत संगत से दूर रहने को कहते हैं। अगर अंदर की मर्यादा खत्म हो जाती है तो ऐसे लोग अमानवीय व्यवहार करते हैं। अच्छे संस्कार पैदा करने से ही अच्छे विचार पैदा होंगे। इसलिए हमेशा संगत अच्छी रखनी चाहिए।

अपराध से राजनीति का तय किया सफर
संतकबीरनगर। बरांव गांव निवासी पूर्व बीडीसी सदस्य ने बचपन में छोटी-मोटी चोरी और फिर दूसरे जनपदों के अपराधियों के संपर्क में आकर अपराध की दुनिया में पहचान बनाने के बाद राजनीति में कदम रखा। अपनों के साथ ही गलत व्यवहार के कारण अब वह सलाखों के पीछे है।
धनघटा थाना क्षेत्र के बरांव गांव में जन्मे पूर्व बीडीसी सदस्य ने कक्षा 8 तक की पढ़ाई की है। बचपन में छोटी-मोटी चोरी शुरू की और फिर दूसरे जनपदों के अपराधियों से तालमेल जोड़ लिया। वहीं से उसकी सोहबत खराब हुई। वर्ष 1985 में गोरखपुर जिले के सिकरीगंज थाना क्षेत्र में उसकी शादी हुई। शादी के बाद भी उसने अपराध जगत से नाता नहीं तोड़ा। वर्ष 1996 में गांव के ही एक व्यक्ति की झोपड़ी फूंकने के आरोप में पुलिस ने उसे जेल भेजा। चोरी, रहजनी, गुंडा एक्ट के मामले में पुलिस ने उसके खिलाफ अभियोग दर्ज किया। वर्ष 1997 में उसकी अपराधिक गतिविधियों को देखते हुए धनघटा पुलिस ने उसकी हिस्ट्रीशीट खोली। थाने का ए श्रेणी का वह हिस्ट्रीशीटर है। वर्ष 2000 में पुलिस ने उसे बम के साथ पकड़ा और जेल भेजा था। जेल से छूटने के बाद कुछ समय तक तो वह घर छुपकर आता-जाता था। वर्ष 2005 में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में क्षेत्र पंचायत सदस्य पद पर चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की। वर्ष 2010 में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में वह प्रधान पद का भी दावेदार रहा और मामूली मतों से हार गया।

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