राष्ट्रीयकृत बैंक न होने से बढ़ी मुश्किलें

Sant kabir nagar Updated Mon, 17 Sep 2012 12:00 PM IST
धर्मसिंहवा। राष्ट्रीयकृत बैंक न होने से धर्मसिंहवा के व्यवसायी और नौकरी-पेशा वालों को काफी मुश्किलाें का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को इसके लिए 15 से 20 किमी. की दूरी तय करना पड़ता है। ऐसे में कसबे के लोगों ने एक बार फिर राष्ट्रीयकृत बैंक खोले जाने की मांग की है। ग्रामीणों के मुताबिक एक राष्ट्रीयकृत बैंक बिना धर्मसिंहवा कस्बा अधूरा है।
सांथा विकास खंड का धर्मसिंहवा बाजार एक लंबे अरसे से उत्तरी कछारवासियों और व्यापारिक दृष्टि से केन्द्र बिंदु रहा है। यहां पर सिद्धार्थनगर व गोरखपुर जनपद के ग्रामीण बाजार करने के लिए आते हैं। ऐसे में व्यवसाइयों को बड़े लेन-देन की आवश्यकता पड़ती है। क्षेत्र में तमाम सरकारी व गैर सरकारी प्रतिष्ठान हैं। वेतन व अन्य प्रकार के लेन-देन के लिए लोगों को सांथा व मेंहदावल तक की दूरी तय करनी पड़ती है। क्षेत्र के रामचन्द्र शुक्ल, राजेश वर्मा, राकेश, सुरेश मोदनवाल, अफजल खान आदि का कहना है कि एक ग्रामीण बैक क्षेत्र के लिए काफी नहीं है। यहां जल्द से जल्द एक राष्ट्रीयकृत बैंक खोलने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि कसबे में एक ग्रामीण बैंक है, जिसके सहारे लोग अब तक लेन-देन करते आ रहें हैं। ऐसे में यहां राष्ट्रीयकृत बैंक खोलना बहुत ही जरूरी है।

Spotlight

Most Read

Lucknow

राहुल गांधी के काफिले का विरोध करने पर बवाल, भाजपाइयों को कांग्रेसियों ने पीटा

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का विरोध जताने पहुंचे भाजपाइयों की कांग्रेसियों से भिड़ंत हो गई। जिसमें कांग्रेसियों ने भाजपाइयों की पिटाई कर दी।

15 जनवरी 2018

Related Videos

नए साल पर सीएम आदित्यनाथ ने वनटांगिया समुदाय को दिया ये तोहफा

नए साल पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने महराजगंज जनपद के पनियरा ब्लाक में वनटांगिया समुदाय को सौगात दी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को वनटांगिया समुदाय के 3779 लोगों को आवासीय भूमि का पट्टा प्रदान किया।

2 जनवरी 2018

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper