बांध बनाया नहीं, 4.15 करोड़ रुपये खर्च

Sant kabir nagar Updated Fri, 07 Sep 2012 12:00 PM IST
संतकबीरनगर। जनपद में बांध मरम्मत के लिए मिले करीब 4.15 करोड़ रुपये बिना कार्य कराए ही फर्जी तरीके से भुगतान कर लिया गया। सांसद भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी ने कमिश्नर को लिखित रूप से इस बात की सूचना देकर उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। कमिश्नर ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए डीएम को जांच के आदेश दिए हैं।
सांसद कुशल तिवारी ने कमिश्नर को दिए पत्र में कहा है कि घाघरा नदी के रामपुर-मकदूमपुर और बेहराडाड़ी तटबंध के मरम्मत, उच्चीकरण, सुंदरीकरण व रेगुलेटर के निर्माण के लिए 9 करोड़ 99 लाख 73 हजार रुपये स्वीकृत हुआ था। स्वीकृत तीन परियोजनाओं पर कार्य कराने के लिए वर्ष 2011-12 में शासन के जरिए ड्रेनेज खंड द्वितीय संतकबीरनगर को लगभग 3 करोड़ से अधिक धनराशि उपलब्ध कराई गई थी। इन कार्यों को कराए जाने के लिए 10 मई 2011 को निविदाएं भी आमंत्रित की गई थी, परंतु पर्याप्त समय रहते निविदाआें पर सार्थक निर्णय नहीं लिया गया। वित्तीय वर्ष के समापन समय नजदीक आने पर उक्त धन को बिना कोई कार्य कराए मनमाने तरीके से भुगतान करके सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। सांसद का सवाल है कि घाघरा के तटबंध पर स्वीकृत तीनों परियोजनाओं पर कोई कार्य हुआ ही नहीं तो उक्त परियोजनाओं पर प्राप्त धनराशि का व्यय कैसे और किसके आदेश से पर हुआ।
सांसद ने तत्कालीन मुख्य अभियंता गंडक सिंचाई विभाग गोरखपुर पर आरोप मढ़ा है कि उन्होंने विगत वर्षों में गंडक संगठन के अंतर्गत विभिन्न खंडों में बिना कार्य कराए ही भुगतान करके सरकारी धन का बंदरबांट किया है। वित्तीय वर्ष 2011-12 में ड्रेनेज खंड द्वितीय संतकबीरनगर में बाढ़ से प्रभावित कार्यों के मरम्मत के लिए आए आपदा राहत निधि के अंतर्गत एक करोड़ 15 लाख रुपये की धनराशि प्राप्त हुई थी। संबंधित अधिकारियों ने मिलीभगत कर इस धन का बंदरबांट कर लिया। सांसद के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए कमिश्नर ने डीएम को मामले के जांच के आदेश दिए हैं।

कार्य नहीं कराने से लौट गया 6 करोड़
सांसद ने कमिश्नर के संज्ञान में यह भी लाया है कि वर्ष 2011-12 में आपदा राहत निधि के अंतर्गत 6 करोड़ की योजना शासन से स्वीकृत की गई थी। कार्य कराए जाने के लिए शासन ने धन भी उपलब्ध कराया था, परंतु संबंधित अधिकारियों के मनमानी के कारण स्वीकृत कार्य नहीं कराया गया और धन को शासन को वापस कर दिया गया।

प्रकरण की कराएंगे जांच : डीएम
डीएम राजेश कुमार का कहना है कि कमिश्नर के निर्देश का अनुपालन होगा। प्रकरण की जांच के लिए टीम गठित की जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

7 करोड़ के डायवर्जन घपले की पहले ही हो रही जांच
घाघरा नदी के बांध मरम्मत को मिले 7 करोड़ के डायवर्जन मामले की जांच पहले से चल रही है। डीएम ने जांच टीम में पीडब्लूडी के एक्सईएन, आरईएस के एक्सईएन और ड्रेनेज खंड के एक्सईएन को शामिल किया है। इस प्रकरण के बारे में जान लें कि वित्तीय वर्ष 2009-10 में घाघरा के रामपुर-मकदूमपुर बांध के मरम्मत के लिए करीब 7 करोड़ रुपये ड्रेनेज खंड द्वितीय संतकबीरनगर को मिला था। उक्त धनराशि को डायवर्जन करके राप्ती नदी के करमैनी-बेलौली तटबंध पर कार्य कराना दिखा दिया गया। डीएम राजेश कुमार ने प्रकरण की जांच गठित टीम को सौंपा है।

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